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चंडीगढ़ निगम को अपने ही रैन बसेरों की जानकारी नहीं, प्रशासन ने दिलाया याद

Mon, 15 Feb 2021 02:08 PM IST
निवेदिता वर्मा नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 15 Feb 2021 02:08 PM IST
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Chandigarh Corporation not aware of its own night shelters 
चंडीगढ़ सेक्टर 29 स्थित चंडीगढ़ नगर निगम का रैन बसेरा। - फोटो : अमर उजाला

चंडीगढ़ नगर निगम को अपनी ही संपत्तियों की जानकारी नहीं है। हाल ही में जब प्रशासन से नगर निगम ने रैन बसेरों के लिए भूमि मांगी तो मुख्य वास्तुकार कपिल सेतिया ने निगम से पहले दी गई भूमि के बारे में पूछा। काफी खोजबीन के बाद निगम को पता चला कि निगम के पास भी पांच रैन बसेरे हैं। अब निगम इनकी जानकारी जुटा रहा है। 

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चंडीगढ़ को अब ओडीएफ प्लस प्लस के लिए चुना जा चुका है इसलिए केंद्र सरकार ने निगम को रैन बसेरे बनाकर ज्यादा से ज्यादा लोगों के रहने की व्यवस्था करने को कहा था। निगम ने रैन बसेरे बनाने के लिए प्रशासन को पत्र लिखकर भूमि मांगी। इस पर मुख्य वास्तुकार ने निगम से पूछा कि पहले सेक्टर 25, 28, 29, 17 और मनीमाजरा में दी गई भूमि की जानकारी दें। तब निगम को पता चला कि उन्हें प्रशासन से कई साल पहले रैन बसेरों के लिए भूमि आवंटित की गई थी। उसके बाद अधिकारी सतर्क होकर रैन बसेरों के बारे में जानकारी लेने में जुट गए। 
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दो आरक्षित पुलिस बल के पास, एक मे चल रही एनजीओ
प्रशासन की ओर से निगम को पांच जगह भूमि आवंटित की गई थीं। इनमें से सेक्टर-25 स्थित ट्रक पार्किंग स्थल में बना रैन बसेरा निगम के पास है। सेक्टर-28 व 29 के रैन बसेरों में आईटीबीपी और सीआरपीएफ के जवान रहते हैं। वहीं, सेक्टर-17 स्थित रैन बसेरा रेडक्रॉस के पास है जबकि मनीमाजरा स्थित रैन बसेरे में दिव्यांगों का डे स्कूल चलता है, जो एक एनजीओ के पास है। हालांकि इसमें रहने के लिए भी जगह बनी हुई है। 

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एक साल पहले रैन बसेरा खाली कराना था, अब तक नहीं हुआ 

लगभग 25 साल पहले निगम ने सेक्टर-28 व 29 का रैन बसेरा आईटीबीपी व सीआरपीएफ को कुछ समय के लिए दिया था। अधिकारियों की गलती के कारण बाद में इसके बारे में किसी ने कुछ पूछा ही नहीं। अब यह बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है। स्थानीय बटालियन के प्रभारियों से प्रशासन ने बात की तो उनका कहना है कि अगर वह लोग इसे खाली कर देंगे तो उनके जवान कहां रहेंगे। रैन बसेरा निगरानी कमेटी ने प्रशासन के तत्कालीन मुख्य अभियंता मुकेशानंद को पिछले साल दोनों रैन बसेरा खाली कराने को कहा था, लेकिन इस पर अब तक कोई काम नहीं हुआ। 

उच्च न्यायालय व न्यायाधीश की सुरक्षा में तैनात हैं जवान 
सीआरपीएफ व आईटीबीपी के जवान शहर में उच्च न्यायालय व न्यायाधीश की सुरक्षा में तैनात रहते हैं। इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्र में भी इन जवानों की तैनाती है। हालांकि दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे पर दोनों बटालियन का मुख्यालय है। प्रशासन ने जब केंद्रीय मंत्रालय को पत्र लिखकर जवानों को अन्य जगह स्थानांतरित करने को कहा है, ताकि बिल्डिंग की मरम्मत कराई जा सके। 

निगम को सेक्टर-43 में नए रैन बसेरे के लिए मिली भूमि 
प्रशासन ने सेक्टर-43 में करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से एक रैन बसेरा बनवाने के लिए निगम को भूमि आवंटित कर दी है। मुख्य वास्तुकार की निगरानी में रैन बसेरे का नक्शा तैयार कराया जा रहा है। इस रैन बसेरे में 100 से ज्यादा लोगों के रहने की व्यवस्था होगी। जिसमें महिला, पुरुष व दिव्यांगों के लिए रहने व शौचालय की अलग-अलग व्यवस्था होगी। यह रैन बसेरा एकदम आधुनिक होगा।

 उच्चतम न्यायालय की ओर से गठित की गई रैन बसेरा निगरानी कमेटी की बैठक में इस मुद्दे को रखा था। प्रशासन के मुख्य अभियंता को रैन बसेरा खाली कराने की जिम्मेदारी दी गई थी। कोरोना महामारी के कारण इस पर कोई कार्य नहीं हो सका है। केंद्र से बात चल रही है। जल्द रैन बसेरा निगम के कब्जे में आ जाएगा।    - केके यादव, आयुक्त, नगर निगम

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