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बच्चों ने वैक्सीन नहीं लगवाई तो भी परीक्षा देने से नहीं रोका जाएगा
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चंडीगढ़। यूटी प्रशासन ने बुधवार को स्पष्ट कर दिया कि अगर किसी बच्चे ने कोरोना का टीका नहीं भी लगवाया है तो उसे परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के सचिव यशपाल गर्ग ने कहा कि विभाग का सुझाव सिर्फ कक्षा में बैठने वालों के लिए है न कि जिनकी परीक्षाएं चल रही हैं, उनके लिए।
यूटी प्रशासन ने सोमवार को एक आदेश जारी कर चार मई से 12 से 14 वर्ष के उन विद्यार्थियों को कक्षा में शारीरिक तौर बैठने पर रोक लगा दिया है, जिन्होंने अब तक कोरोना का टीका नहीं लगवाया है। इस फैसले से अभिभावक परेशान हो गए क्योंकि बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं और अधिकतर बच्चों ने अभी तक टीका नहीं लगवाया है। अभिभावकों को डर था कि अगर बच्चे को परीक्षा नहीं बैठने दिया गया तो उनकी साल भर की मेहनत खराब हो जाएगी।
परिजनों ने कई माध्यम से प्रशासन के अधिकारियों तक यह बात पहुंचाई। इसके बाद प्रशासन ने स्पष्ट किया कि टीका नहीं लगवाने वाले बच्चों को भी परीक्षा देने से नहीं रोका जाएगा। स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने बताया कि 12 से 14 वर्ष की उम्र के बच्चों का टीकाकरण काफी धीमी रफ्तार से चल रहा था जबकि कोरोना का खतरा बढ़ता जा रहा है। टीकाकरण के प्रतिशत को बढ़ाने के लिए ही यह फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं में बैठने वाले बच्चों को बिल्कुल नहीं रोका जाएगा। कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने टीका नहीं लगवाने वाले बच्चों की सिर्फ पढ़ाई के लिए कक्षा में बैठने पर रोक लगाने का फैसला किया है। इस आदेश का परीक्षा से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि इस पर शिक्षा विभाग की तरफ से विस्तृत आदेश जारी किए जाएंगे।
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शहर में चल रही हैं दसवीं और 12वीं की बोर्ड की परीक्षाएं
शहर में दसवीं और 12वीं कक्षा के छात्रों की बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं। 12 से 14 वर्ष के उम्र के बच्चे भी इन कक्षाओं में पढ़ते हैं, इसलिए अभिभावक ज्यादा चिंतित हैं। अभिभावकों की एक और चिंता है कि अगर प्रशासन के दबाव के चलते बच्चे ने टीका लगवा लिया और किसी की तबीयत खराब हो गई तो उसका पूरा साल खराब हो सकता है। परीक्षा की तैयारी भी प्रभावित हो सकती है। हालांकि इस पर प्रशासन के अधिकारियों का तर्क है कि स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग की तरफ से पिछले कई हफ्तों से स्कूलों में टीकाकरण जारी है। बच्चों को पहले ही टीका लगवा लेना चाहिए। इसमें परिजनों की भी गलती है। तबीयत खराब होने के सवाल पर नाम न छापने की शर्त पर प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अभी तक ऐसा कोई भी मामला सामने नहीं आया है। बच्चों के लिए टीका पूरी तरह से सुरक्षित है।
बॉक्स
‘रोक लगाकर प्रशासन बच्चों से छीन रहा शिक्षा का अधिकार’
चंडीगढ़ अभिभावक संघ ने बुधवार को शिक्षा निदेशक को पत्र लिखकर कहा कि प्रशासन का यह आदेश बच्चों के शिक्षा के अधिकार को छीनता है। बच्चों को टीका नहीं लगवाने का कारण यह है कि अभिभावक वैक्सीन को लेकर संतुष्ट नहीं हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने आदेश में कहा था कि कोविड का टीका हर नागरिक को लगाना अनिवार्य नहीं है इसलिए प्रशासन अभिभावकों के साथ बच्चों को वैक्सीन लगवाने के लिए धक्केशाही नहीं कर सकता।
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यूटी प्रशासन ने सोमवार को एक आदेश जारी कर चार मई से 12 से 14 वर्ष के उन विद्यार्थियों को कक्षा में शारीरिक तौर बैठने पर रोक लगा दिया है, जिन्होंने अब तक कोरोना का टीका नहीं लगवाया है। इस फैसले से अभिभावक परेशान हो गए क्योंकि बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं और अधिकतर बच्चों ने अभी तक टीका नहीं लगवाया है। अभिभावकों को डर था कि अगर बच्चे को परीक्षा नहीं बैठने दिया गया तो उनकी साल भर की मेहनत खराब हो जाएगी।
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परिजनों ने कई माध्यम से प्रशासन के अधिकारियों तक यह बात पहुंचाई। इसके बाद प्रशासन ने स्पष्ट किया कि टीका नहीं लगवाने वाले बच्चों को भी परीक्षा देने से नहीं रोका जाएगा। स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने बताया कि 12 से 14 वर्ष की उम्र के बच्चों का टीकाकरण काफी धीमी रफ्तार से चल रहा था जबकि कोरोना का खतरा बढ़ता जा रहा है। टीकाकरण के प्रतिशत को बढ़ाने के लिए ही यह फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं में बैठने वाले बच्चों को बिल्कुल नहीं रोका जाएगा। कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने टीका नहीं लगवाने वाले बच्चों की सिर्फ पढ़ाई के लिए कक्षा में बैठने पर रोक लगाने का फैसला किया है। इस आदेश का परीक्षा से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि इस पर शिक्षा विभाग की तरफ से विस्तृत आदेश जारी किए जाएंगे।
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शहर में चल रही हैं दसवीं और 12वीं की बोर्ड की परीक्षाएं
शहर में दसवीं और 12वीं कक्षा के छात्रों की बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं। 12 से 14 वर्ष के उम्र के बच्चे भी इन कक्षाओं में पढ़ते हैं, इसलिए अभिभावक ज्यादा चिंतित हैं। अभिभावकों की एक और चिंता है कि अगर प्रशासन के दबाव के चलते बच्चे ने टीका लगवा लिया और किसी की तबीयत खराब हो गई तो उसका पूरा साल खराब हो सकता है। परीक्षा की तैयारी भी प्रभावित हो सकती है। हालांकि इस पर प्रशासन के अधिकारियों का तर्क है कि स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग की तरफ से पिछले कई हफ्तों से स्कूलों में टीकाकरण जारी है। बच्चों को पहले ही टीका लगवा लेना चाहिए। इसमें परिजनों की भी गलती है। तबीयत खराब होने के सवाल पर नाम न छापने की शर्त पर प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अभी तक ऐसा कोई भी मामला सामने नहीं आया है। बच्चों के लिए टीका पूरी तरह से सुरक्षित है।
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‘रोक लगाकर प्रशासन बच्चों से छीन रहा शिक्षा का अधिकार’
चंडीगढ़ अभिभावक संघ ने बुधवार को शिक्षा निदेशक को पत्र लिखकर कहा कि प्रशासन का यह आदेश बच्चों के शिक्षा के अधिकार को छीनता है। बच्चों को टीका नहीं लगवाने का कारण यह है कि अभिभावक वैक्सीन को लेकर संतुष्ट नहीं हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने आदेश में कहा था कि कोविड का टीका हर नागरिक को लगाना अनिवार्य नहीं है इसलिए प्रशासन अभिभावकों के साथ बच्चों को वैक्सीन लगवाने के लिए धक्केशाही नहीं कर सकता।