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Chandigarh: वादे के बावजूद नौकरी नहीं दी, उपभोक्ता आयोग ने एकेडमी को दिया 5.39 लाख फीस लौटाने का आदेश
Thu, 11 Apr 2024 04:50 PM IST
निवेदिता वर्मा
अक्षय जाधव, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
अक्षय जाधव, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 11 Apr 2024 04:50 PM IST
सार
आयोग को दी शिकायत में अक्षित ने बताया कि उन्होंने 21 जुलाई 2019 में जीपी रेटिंग कोर्स के लिए द मैरीटाइम एकेडमी में दाखिला लिया था। जीपी रेटिंग कोर्स मर्चेंट नेवी में प्रवेश करने के लिए किया जाता है। कोर्स फीस के तौर पर अक्षित ने 2.05 लाख रुपये दिए थे। इसके अलावा शिकायतकर्ता ने स्पांसरशिप/जाब प्लेसमेंट के लिए एकेडमी को चार लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया था।
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विस्तार
कोचिंग संस्थानों द्वारा विद्यार्थियों को नौकरी का वादा देकर एडमिशन दिया जाता है, लेकिन कोर्स पूरा होने के बाद भी ज्यादातर विद्यार्थी बेरोजगार रह जाते हैं। कोचिंग संस्थानों को ज्यादा फीस देकर महंगा कोर्स करने के बाद भी विद्यार्थियों की नौकरी नहीं लग पाती।
ऐसा ही एक मामला चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता आयोग में आया। शहर के एक युवक ने पंचकूला स्थित द मैरीटाइम एकेडमी (टीएमए) से छह महीने का जीपी रेटिंग कोर्स किया। इसके लिए सेक्टर-40 के 18 वर्षीय अक्षित कुमार ने एकेडमी को कुल छह लाख रुपये का भुगतान किया था। एकेडमी की तरफ से युवक को कोर्स पूरा करने के बाद प्लेसमेंट दी जानी थी, लेकिन अक्षित को न प्लेसमेंट दी गई और न ही नौकरी मिली। इसके बाद उसने एकेडमी के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग को शिकायत दी।
आयोग ने एकेडमी प्रबंधन को शिकायतकर्ता के पांच लाख 93 हजार 500 रुपये नौ प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। इसके अलावा शिकायतकर्ता को हुई मानसिक परेशानी के लिए 30 हजार रुपये हर्जाना और 10 हजार रुपये मुकद्दमा खर्च के तौर पर देने होंगे।
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आयोग को दी शिकायत में अक्षित ने बताया कि उन्होंने 21 जुलाई 2019 में जीपी रेटिंग कोर्स के लिए द मैरीटाइम एकेडमी (टीएमए) में दाखिला लिया था। जीपी रेटिंग कोर्स मर्चेंट नेवी में प्रवेश करने के लिए किया जाता है। कोर्स फीस के तौर पर अक्षित ने 2.05 लाख रुपये दिए थे। इसके अलावा शिकायतकर्ता ने स्पांसरशिप/जाब प्लेसमेंट के लिए एकेडमी को चार लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया था। छह जनवरी 2020 को कोर्स पूरा होने के बाद एकेडमी ने शिकायतकर्ता को चरित्र प्रमाण पत्र जारी किया, जिसमें लिखा था कि शिकायतकर्ता ने टीएमए में जीपी रेटिंग कोर्स पूरा कर लिया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कोर्स पूरा करने के बावजूद एकेडमी एक साल तक जॉब प्लेसमेंट करवाने में विफल रही है। इसके बाद 15 मार्च 2021 को शिकायतकर्ता ने एकेडमी को प्लेसमेंट के लिए पत्र भी लिखा, लेकिन एकेडमी की तरफ से आज तक कुछ नहीं किया गया।
शिकायतकर्ता को नहीं दी थी जॉब गारंटी
एकेडमी की तरफ से दायर जवाब में कहा गया कि जनवरी 2020 में कोरोना महामारी की वजह से लॉकडाउन लगा था। मजबूरी में एकेडमी को बंद करना पड़ा था। इस वजह से शिकायतकर्ता आइएमईटीए सिंगापुर के निदेशक की तरफ से प्रमाण पत्र नहीं दिया गया था। हालांकि अब एकेडमी प्रमाण पत्र देने के लिए तैयार है। वहीं, यह कहा गया कि एकेडमी ने कभी भी शिकायतकर्ता को नौकरी की 100 प्रतिशत गारंटी नहीं दी थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग ने शिकायतकर्ता के हक में फैसला सुनाया।
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ऐसा ही एक मामला चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता आयोग में आया। शहर के एक युवक ने पंचकूला स्थित द मैरीटाइम एकेडमी (टीएमए) से छह महीने का जीपी रेटिंग कोर्स किया। इसके लिए सेक्टर-40 के 18 वर्षीय अक्षित कुमार ने एकेडमी को कुल छह लाख रुपये का भुगतान किया था। एकेडमी की तरफ से युवक को कोर्स पूरा करने के बाद प्लेसमेंट दी जानी थी, लेकिन अक्षित को न प्लेसमेंट दी गई और न ही नौकरी मिली। इसके बाद उसने एकेडमी के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग को शिकायत दी।
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आयोग ने एकेडमी प्रबंधन को शिकायतकर्ता के पांच लाख 93 हजार 500 रुपये नौ प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। इसके अलावा शिकायतकर्ता को हुई मानसिक परेशानी के लिए 30 हजार रुपये हर्जाना और 10 हजार रुपये मुकद्दमा खर्च के तौर पर देने होंगे।
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आयोग को दी शिकायत में अक्षित ने बताया कि उन्होंने 21 जुलाई 2019 में जीपी रेटिंग कोर्स के लिए द मैरीटाइम एकेडमी (टीएमए) में दाखिला लिया था। जीपी रेटिंग कोर्स मर्चेंट नेवी में प्रवेश करने के लिए किया जाता है। कोर्स फीस के तौर पर अक्षित ने 2.05 लाख रुपये दिए थे। इसके अलावा शिकायतकर्ता ने स्पांसरशिप/जाब प्लेसमेंट के लिए एकेडमी को चार लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया था। छह जनवरी 2020 को कोर्स पूरा होने के बाद एकेडमी ने शिकायतकर्ता को चरित्र प्रमाण पत्र जारी किया, जिसमें लिखा था कि शिकायतकर्ता ने टीएमए में जीपी रेटिंग कोर्स पूरा कर लिया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कोर्स पूरा करने के बावजूद एकेडमी एक साल तक जॉब प्लेसमेंट करवाने में विफल रही है। इसके बाद 15 मार्च 2021 को शिकायतकर्ता ने एकेडमी को प्लेसमेंट के लिए पत्र भी लिखा, लेकिन एकेडमी की तरफ से आज तक कुछ नहीं किया गया।
शिकायतकर्ता को नहीं दी थी जॉब गारंटी
एकेडमी की तरफ से दायर जवाब में कहा गया कि जनवरी 2020 में कोरोना महामारी की वजह से लॉकडाउन लगा था। मजबूरी में एकेडमी को बंद करना पड़ा था। इस वजह से शिकायतकर्ता आइएमईटीए सिंगापुर के निदेशक की तरफ से प्रमाण पत्र नहीं दिया गया था। हालांकि अब एकेडमी प्रमाण पत्र देने के लिए तैयार है। वहीं, यह कहा गया कि एकेडमी ने कभी भी शिकायतकर्ता को नौकरी की 100 प्रतिशत गारंटी नहीं दी थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग ने शिकायतकर्ता के हक में फैसला सुनाया।