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POP: सिपाही का बेटा बना पैरा कमांडो अफसर, पिता बोले- कई त्याग किए, पूरा हो गया सपना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 10 Dec 2018 01:22 PM IST
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पैरा कमांडो अफसर
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सिपाही का बेटा पैरा कमांडो रेजिमेंट में अफसर बन गया तो पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक उठे। बोले- मैंने कई त्याग किए, पर बेटे ने निराश नहीं किया, सपना पूरा हो गया। चंडीगढ़ सेक्टर-46 निवासी चरणदत्त पंत ने जो सपना देखा था, उनके बेटे संजय पंत ने उसे पूरा कर दिखाया है। भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) से पासआउट कर संजय पैरा कमांडो रेजिमेंट में अफसर पर नियुक्त हो गए हैं।
उनके पिता बार्डर रोड आर्गनाइजेशन में सिपाही के पद पर तैनात हैं। चरणदत्त पंत की दिली ख्वाहिश थी कि उनका बेटा पढ़ाई कर सेना में अफसर बने। इसके लिए उन्होंने कई त्याग किए। चरणदत्त के मुताबिक, बार्डर रोड आर्गनाइजेशन में होने कारण उनकी ड्यूटी बार्डर पर लगती थी। कभी अरुणाचल प्रदेश तो कभी देश के किसी अन्य कोने में। वहां से आने के लिए वे ट्रेन का जनरल या स्लीपर डिब्बा चुनते थे ताकि बेटों की पढ़ाई के लिए पैसे कम न पाएं।
कम खर्च पर घर चलाते थे, जो पैसे बचते, उससे बेटे की फीस भरते। पिता के इस संघर्ष का ख्याल बेटे को भी था इसलिए उसने आर्मी में जाने की ठान ली और आईएमए में ट्रेनिंग के दौरान कड़ी मेहनत की। सैन्य अकादमी से कुल 427 अफसर पासआउट हुए हैं। इनमें सिर्फ 14 अफसरों का सलेक्शन पैरा कमांडो रेजिमेंट में अफसर के पद पर हुआ है, जिनमें संजय भी शामिल हैं।
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उनके पिता बार्डर रोड आर्गनाइजेशन में सिपाही के पद पर तैनात हैं। चरणदत्त पंत की दिली ख्वाहिश थी कि उनका बेटा पढ़ाई कर सेना में अफसर बने। इसके लिए उन्होंने कई त्याग किए। चरणदत्त के मुताबिक, बार्डर रोड आर्गनाइजेशन में होने कारण उनकी ड्यूटी बार्डर पर लगती थी। कभी अरुणाचल प्रदेश तो कभी देश के किसी अन्य कोने में। वहां से आने के लिए वे ट्रेन का जनरल या स्लीपर डिब्बा चुनते थे ताकि बेटों की पढ़ाई के लिए पैसे कम न पाएं।
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कम खर्च पर घर चलाते थे, जो पैसे बचते, उससे बेटे की फीस भरते। पिता के इस संघर्ष का ख्याल बेटे को भी था इसलिए उसने आर्मी में जाने की ठान ली और आईएमए में ट्रेनिंग के दौरान कड़ी मेहनत की। सैन्य अकादमी से कुल 427 अफसर पासआउट हुए हैं। इनमें सिर्फ 14 अफसरों का सलेक्शन पैरा कमांडो रेजिमेंट में अफसर के पद पर हुआ है, जिनमें संजय भी शामिल हैं।
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बहुत कुछ सीखने को मिला और मिलेगा
संजय ने बताया कि पैरा कमांडो रेजिमेंट के लिए सभी से वॉलंटियर फार्म भरवाए गए थे। उसके बाद एक कठिन चयन प्रक्रिया आयोजित की गई थी, जिसे पास करने के बाद 14 युवाओं को अफसर को चुना गया। उनके मुताबिक, वे पहले से चाहते थे कि उन्हें आर्मी में कोई एडवेंचर से भरा काम करने का मौका मिले और पैरा कमांडो की रेजिमेंट पूरी तरह से एडवेंचर से भरपूर है।
यहां पर बहुत कुछ सीखने को मिला और मिलेगा। संजय की बेसिक पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय सेक्टर-47 में हुई है। उसके बाद उन्होंने पिथौरागढ़ से बीटेक की डिग्री हासिल की। बीटेक की आखिरी साल की पढ़ाई के दौरान उन्होंने सीडीएस का एग्जाम दिया और उनका सलेक्शन आईएमए में हो गया। संजय को यह सफलता तीसरे प्रयास में मिली। पहले उन्होंने एनडीए की परीक्षा दी, लेकिन सफलता नहीं मिली।
दूसरी बार उन्होंने आर्मी की एक टेक्निकल परीक्षा दी, लेकिन निराशा ही लगी। तीसरी बार में उन्हें सफलता मिल गई। संजय का एक छोटा भाई है, जो बीटेक कर रहा है, जबकि बड़ी बहन की शादी हो चुकी है। संजय की इच्छा है कि वे अब पैरा कमांडो रेजिमेंट में ऊंचाइयों को छुएं और देश का नाम रोशन करें।
यहां पर बहुत कुछ सीखने को मिला और मिलेगा। संजय की बेसिक पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय सेक्टर-47 में हुई है। उसके बाद उन्होंने पिथौरागढ़ से बीटेक की डिग्री हासिल की। बीटेक की आखिरी साल की पढ़ाई के दौरान उन्होंने सीडीएस का एग्जाम दिया और उनका सलेक्शन आईएमए में हो गया। संजय को यह सफलता तीसरे प्रयास में मिली। पहले उन्होंने एनडीए की परीक्षा दी, लेकिन सफलता नहीं मिली।
दूसरी बार उन्होंने आर्मी की एक टेक्निकल परीक्षा दी, लेकिन निराशा ही लगी। तीसरी बार में उन्हें सफलता मिल गई। संजय का एक छोटा भाई है, जो बीटेक कर रहा है, जबकि बड़ी बहन की शादी हो चुकी है। संजय की इच्छा है कि वे अब पैरा कमांडो रेजिमेंट में ऊंचाइयों को छुएं और देश का नाम रोशन करें।