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मेयर चुनावः भाजपा के दोनों गुट कांग्रेस से साध रहे संपर्क, जानिए क्यों?
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 05 Jan 2018 10:24 AM IST
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चुनाव को लेकर चंडीगढ़ बीजेपी की मीटिंग
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चंडीगढ़ में मेयर चुनाव उम्मीदवारी को लेकर भाजपा दो गुटों में बंट गई है और दोनों ही गुट अब कांग्रेस से संपर्क साधने में लगे हुए हैं। कांग्रेस के पास सिर्फ चार पार्षद हैं, लेकिन भाजपा में बवाल मचने के बाद बाकी बचे दोनों उम्मीदवारों को जीतने के लिए कांग्रेस के समर्थन की जरूरत है। भाजपा के अधिकृत और बागी गुट के समर्थकों ने कांग्रेस नेताओं और पार्षदों से संपर्क करना शुरू कर दिया है क्योंकि कांग्रेस इस समय जीतने की स्थिति में नहीं है, लेकिन विरोधी गुट के किसी भी उम्मीदवार को चुनाव जिता सकती है।
अगर कांग्रेस चुनाव से नहीं हटती है तो ऐसी स्थिति में भाजपा उम्मीदवार देवेश मोदगिल का पलड़ा भारी है क्योंकि मोदगिल के समर्थन में इस समय 9 भाजपा, एक निर्दलीय, एक अकाली और एक सांसद की वोट है। यह कुल वोट 12 है, जबकि बागी गुट में आशा जसवाल को मिलाकर कुल 11 पार्षद हैं। ऐसे में सांसद खेर का गुट चाहता है कि अगर आशा जसवाल अपना नामांकन वापस नहीं लेती हैं तो कांग्रेस उम्मीदवार भी चुनाव लड़े।
इसके बावजूद चुनाव जीतने के लिए मोदगिल के समर्थक भी बागी पार्षदों के संपर्क में है ताकि मतदान के समय वोट मिल जाए। कांग्रेस के मेयर पद के उम्मीदवार देवेंद्र बबला का कहना है कि वह वेट एंड वाच की स्थिति में हैं। भाजपा के दोनों गुटों की ओर से समर्थन के लिए मैसेज आ रहे हैं, लेकिन अभी इस बारे कुछ भी सोचा नहीं गया है। उनका कहना है कि उनकी पार्टी अपने आप ही किंग मेकर बन गई है। सारी गेम अपने आप ही हमारे पास आ गई है, लेकिन उनकी पार्टी चुनाव लड़ रही है। आगामी कोई भी निर्णय लिया जाता है तो पार्टी के सीनियर नेताओं से बात करके ही किया जाएगा।
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सुबह आशा और शाम को मोदगिल के साथ हुई बैठक
भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन की वीरवार सुबह मेयर आशा जसवाल और शाम को देवेश मोदगिल के साथ बैठक हुई है। सूत्रों का कहना है कि मोदगिल ने भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन से अपील की है कि वह आशा जसवाल का नामांकन वापस करवाएं।
अगर मना भी लेते हैं तब भी क्रास वोटिंग की है उम्मीद
आशा जसवाल और रवि कांत शर्मा का नामांकन वापस करवाने में पार्टी कामयाब भी हो जाती है तो भी क्रास वोटिंग होने की उम्मीद है। ऐसे में कांग्रेस अभी जल्दबाजी में निर्णय लेने के मूड में नहीं है क्योंकि कांग्रेस को पता है कि अगर आशा जसवाल ने नामांकन वापस ले लिया तो उन्हें चुनाव लड़ना ही पड़ेगा। ऐसे में उन्हें क्रास वोटिंग का फायदा मिलेगा।
फिर ज्यादा मेहनत की जरूरत न होती
आशा जसवाल नामांकन न भरतीं तो सांसद किरण खेर गुट को मोदगिल को जितवाने के लिए ज्यादा मेहनत की जरूरत न पड़ती क्योंकि भाजपा के अपने पार्षद ही 20 हैं और चुनाव जीतने के लिए 14 वोट की जरूरत है। सांसद की भी वोट मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में होती है।
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अगर कांग्रेस चुनाव से नहीं हटती है तो ऐसी स्थिति में भाजपा उम्मीदवार देवेश मोदगिल का पलड़ा भारी है क्योंकि मोदगिल के समर्थन में इस समय 9 भाजपा, एक निर्दलीय, एक अकाली और एक सांसद की वोट है। यह कुल वोट 12 है, जबकि बागी गुट में आशा जसवाल को मिलाकर कुल 11 पार्षद हैं। ऐसे में सांसद खेर का गुट चाहता है कि अगर आशा जसवाल अपना नामांकन वापस नहीं लेती हैं तो कांग्रेस उम्मीदवार भी चुनाव लड़े।
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इसके बावजूद चुनाव जीतने के लिए मोदगिल के समर्थक भी बागी पार्षदों के संपर्क में है ताकि मतदान के समय वोट मिल जाए। कांग्रेस के मेयर पद के उम्मीदवार देवेंद्र बबला का कहना है कि वह वेट एंड वाच की स्थिति में हैं। भाजपा के दोनों गुटों की ओर से समर्थन के लिए मैसेज आ रहे हैं, लेकिन अभी इस बारे कुछ भी सोचा नहीं गया है। उनका कहना है कि उनकी पार्टी अपने आप ही किंग मेकर बन गई है। सारी गेम अपने आप ही हमारे पास आ गई है, लेकिन उनकी पार्टी चुनाव लड़ रही है। आगामी कोई भी निर्णय लिया जाता है तो पार्टी के सीनियर नेताओं से बात करके ही किया जाएगा।
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सुबह आशा और शाम को मोदगिल के साथ हुई बैठक
भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन की वीरवार सुबह मेयर आशा जसवाल और शाम को देवेश मोदगिल के साथ बैठक हुई है। सूत्रों का कहना है कि मोदगिल ने भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन से अपील की है कि वह आशा जसवाल का नामांकन वापस करवाएं।
अगर मना भी लेते हैं तब भी क्रास वोटिंग की है उम्मीद
आशा जसवाल और रवि कांत शर्मा का नामांकन वापस करवाने में पार्टी कामयाब भी हो जाती है तो भी क्रास वोटिंग होने की उम्मीद है। ऐसे में कांग्रेस अभी जल्दबाजी में निर्णय लेने के मूड में नहीं है क्योंकि कांग्रेस को पता है कि अगर आशा जसवाल ने नामांकन वापस ले लिया तो उन्हें चुनाव लड़ना ही पड़ेगा। ऐसे में उन्हें क्रास वोटिंग का फायदा मिलेगा।
फिर ज्यादा मेहनत की जरूरत न होती
आशा जसवाल नामांकन न भरतीं तो सांसद किरण खेर गुट को मोदगिल को जितवाने के लिए ज्यादा मेहनत की जरूरत न पड़ती क्योंकि भाजपा के अपने पार्षद ही 20 हैं और चुनाव जीतने के लिए 14 वोट की जरूरत है। सांसद की भी वोट मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में होती है।