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चंडीगढ़ः 10 साल बाद होगी प्रॉपर्टी की ऑक्शन, 15 दिन में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश
Thu, 03 Jan 2019 12:13 PM IST
खुशबू गोयल
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 03 Jan 2019 12:13 PM IST
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आखिरकार 10 साल के लंबे इंतजार के बाद चंडीगढ़ के अलग-अलग हिस्सों में खाली पड़ी रेजिडेंशियल और कॉमर्शियल साइट की ऑक्शन होने जा रही है। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर की अनुमति मिलने के बाद यूटी प्रशासन ने एस्टेट ऑफिस को 15 दिनों में डेट फाइनल करके ऑक्शन प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले प्रशासन की ओर से साल 2009 में ऑक्शन करवाई गई थी। प्रापर्टी ऑक्शन के मामले में प्रशासक से अनुमति लेने के लिए डीसी मनदीप बराड़ ने नए सिरे से फाइल चलाई थी।
इसके चलते प्रशासक ने ऑक्शन प्रक्रिया को पूरी करने के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इस संदर्भ में यूटी प्रशासन के फाइनेंस सेक्रेटरी अजोय कुमार सिन्हा ने बताया कि एस्टेट ऑफिस को ऑक्शन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए फाइल भेज दी गई है। ऑक्शन प्रक्रिया को पूरी करने के लिए एस्टेट ऑफिस को 15 दिनों का समय दिया गया है। इस बीच एस्टेट ऑफिस अपनी सुविधा के अनुसार डेट फाइनल कर रेजिडेंशियल और कॉमर्शियल साइट की ऑक्शन करवाएगा। फाइनेंस सेक्रेटरी ने बताया कि प्रशासक की अनुमति मिलने के बाद एस्टेट ऑफिस को पत्र जारी कर दिया गया है।
इन संपत्तियों की होगी नीलामी
डीसी मनदीप बराड़ ने बताया कि 10 रेजिडेंशियल, 13 कॉमर्शियल और एक इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी की प्रशासक के निर्देश पर अगले 15 दिनों में एस्टेट ऑफिस ई-ऑक्शन करने जा रहा है। प्रशासन ने प्रॉपर्टी को लेकर रिजर्व प्राइज लिस्ट भी जारी कर दी है। इसमें रेजिडेंशियल साइट्स में सबसे सस्ती प्रॉपर्टी का रिजर्व प्राइज 89.26 लाख रुपये रखा गया है। वहीं, सबसे महंगी रेजिडेंशियल प्रापर्टी का रिजर्व प्राइज 7.53 करोड़ रुपये है। कॉमर्शियल प्रॉपर्टी में सबसे सस्ती प्रॉपर्टी का रिजर्व प्राइज 33 लाख रुपये और सबसे महंगी प्रापर्टी का रिजर्व प्राइज 13.87 करोड़ रुपये रखा गया है।
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इसलिए पूरी नहीं हो सकी ऑक्शन प्रक्रिया
इससे पूर्व प्रशासन ने साल 2009 में अपनी प्रॉपर्टी की ऑक्शन की थी। उस दौरान विभाग ने 45 प्रॉपर्टी की ऑक्शन की थी। इससे यूटी प्रशासन को करीब 100 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। इसके बाद प्रॉपर्टी में लगातार गिरावट होती गई। यही कारण है कि चंडीगढ़ में किसी ने भी इस्टेट ऑफिस की बोली में दिलचस्पी नहीं दिखाई। लीज होल्ड से फ्री होल्ड मामले में यूटी प्रशासन की ओर से कोई फैसला नहीं लिए जाने के कारण भी यूटी प्रशासन की प्रॉपर्टी को खरीदार नहीं मिल रहे हैं।
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इसके चलते प्रशासक ने ऑक्शन प्रक्रिया को पूरी करने के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इस संदर्भ में यूटी प्रशासन के फाइनेंस सेक्रेटरी अजोय कुमार सिन्हा ने बताया कि एस्टेट ऑफिस को ऑक्शन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए फाइल भेज दी गई है। ऑक्शन प्रक्रिया को पूरी करने के लिए एस्टेट ऑफिस को 15 दिनों का समय दिया गया है। इस बीच एस्टेट ऑफिस अपनी सुविधा के अनुसार डेट फाइनल कर रेजिडेंशियल और कॉमर्शियल साइट की ऑक्शन करवाएगा। फाइनेंस सेक्रेटरी ने बताया कि प्रशासक की अनुमति मिलने के बाद एस्टेट ऑफिस को पत्र जारी कर दिया गया है।
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इन संपत्तियों की होगी नीलामी
डीसी मनदीप बराड़ ने बताया कि 10 रेजिडेंशियल, 13 कॉमर्शियल और एक इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी की प्रशासक के निर्देश पर अगले 15 दिनों में एस्टेट ऑफिस ई-ऑक्शन करने जा रहा है। प्रशासन ने प्रॉपर्टी को लेकर रिजर्व प्राइज लिस्ट भी जारी कर दी है। इसमें रेजिडेंशियल साइट्स में सबसे सस्ती प्रॉपर्टी का रिजर्व प्राइज 89.26 लाख रुपये रखा गया है। वहीं, सबसे महंगी रेजिडेंशियल प्रापर्टी का रिजर्व प्राइज 7.53 करोड़ रुपये है। कॉमर्शियल प्रॉपर्टी में सबसे सस्ती प्रॉपर्टी का रिजर्व प्राइज 33 लाख रुपये और सबसे महंगी प्रापर्टी का रिजर्व प्राइज 13.87 करोड़ रुपये रखा गया है।
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इसलिए पूरी नहीं हो सकी ऑक्शन प्रक्रिया
इससे पूर्व प्रशासन ने साल 2009 में अपनी प्रॉपर्टी की ऑक्शन की थी। उस दौरान विभाग ने 45 प्रॉपर्टी की ऑक्शन की थी। इससे यूटी प्रशासन को करीब 100 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। इसके बाद प्रॉपर्टी में लगातार गिरावट होती गई। यही कारण है कि चंडीगढ़ में किसी ने भी इस्टेट ऑफिस की बोली में दिलचस्पी नहीं दिखाई। लीज होल्ड से फ्री होल्ड मामले में यूटी प्रशासन की ओर से कोई फैसला नहीं लिए जाने के कारण भी यूटी प्रशासन की प्रॉपर्टी को खरीदार नहीं मिल रहे हैं।