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चेंबर अलॉटमेंट नियम 36 साल पुराने, अन्य राज्यों की समीक्षा कर सौंपें सुझाव: हाईकोर्ट

Sun, 21 Jan 2024 03:55 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jan 2024 03:55 AM IST
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Chamber allotment rules are 36 years old, review other states and submit suggestions: High Court
चंडीगढ़। वकीलों को चेंबर अलॉटमेंट के लिए बनाए 1988 के नियमों के 36 साल बीत जाने और वकीलों की संख्या बहुत अधिक बढ़ जाने की बात कहते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इनमें संशोधन के लिए सभी पक्षों को अन्य राज्यों के नियमों की समीक्षा कर अदालत की मदद करने का आदेश दिया है।याचिका दाखिल कर चंडीगढ़ निवासी अशोक शर्मा नाभेवाला ने हाईकोर्ट को बताया कि वकीलों को चेंबर अलॉटमेंट के लिए 1988 की नोटिफिकेशन अभी तक प्रभावी है। इसके नियम 6 के अनुसार यदि कोई वकील अपना चेंबर छोड़ता है तो यह उसके एसोसिएट को ही अलॉट किया जा सकता है। इसके साथ ही यदि अलॉटमेंट रद्द की जाती है तो भी मुख्य न्यायाधीश की ओर से अलॉटी वकील के एसोसिएट को ही प्राथमिकता दी जाएगी।
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याची ने कहा कि यदि किसी एसोसिएट को चेंबर अलॉट किया जाता है और वह हाईकोर्ट में आकर वकालत नहीं करता है तो चेंबर पर उसका कब्जा बना रहता है, जबकि अलॉटमेंट नए वकीलों को की जानी चाहिए, जिनके पास चेंबर नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह नियम 36 साल पुराना है और इतने वर्षों में वकीलों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में हाईकोर्ट ने सभी पक्षोंं को आदेश दिया है कि वे अन्य राज्यों में इस नियम को लेकर अध्ययन करें और अगली सुनवाई पर इसमें संशोधन को लेकर अदालत की मदद करें।
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