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आर्थिक आधार पर आरक्षण को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 09 Feb 2018 09:33 AM IST
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हरियाणा में 2013 की नोटिफिकेशन के तहत आर्थिक आधार पर समान्य श्रेणी में 10 प्रतिशत आरक्षण को चुनौती देने खारिज करने की अपील पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। वीरवार को हाई कोर्ट की पीआईएल बेंच ने कहा कि यह मामला जनहित का नहीं है और बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया। हालांकि हाईकोर्ट की एक अन्य बेंच के सामने यह मामला विचाराधीन है जिसने आर्थिक आधार पर दिए गए आरक्षण पर रोक लगाई है।
याचिका दाखिल करते हुए इंदिरा साहनी व एम नागराज मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए आर्थिक आधार पर दिए गए आरक्षण को खारिज करने की अपील की गई थी। मामले में झज्जर निवासी सुरेश ने याचिका दाखिल करते हुए आर्थिक पिछड़ा वर्ग को दिए 10 प्रतिशत आरक्षण को चुनौती दी। मामले में याची द्वारा दलील दी गई थी कि आर्थिक आधार पर दिए गए आरक्षण के कारण प्रदेश में कुल आरक्षण 67 फीसदी हो गया है।
इंदिरा साहनी मामले में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता है। जिंदल ने कहा कि इंदिरा साहनी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि विशेष परिस्थितियों में और तय मानकों का अनुसरण करने के बाद ही आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक हो सकता है। याची ने कहा कि हरियाणा में कुल आरक्षण 67 फीसदी है।
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हरियाणा सरकार के एक्ट के माध्यम से 57 फीसदी का आरक्षण दिया गया है जबकि 2013 की नोटिफिकेशन के माध्यम से आर्थिक पिछड़ा वर्ग को 10 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया है। याची ने कहा कि उनकी मुख्य दलील आरक्षण 50 फीसदी से ज्यादा होने की और आर्थिक आधार पर आरक्षण का संविधान में प्रावधान न होना है। याची ने कहा कि संविधान के अनुसार आरक्षण का आधार सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन हो सकता है लेकिन आर्थिक नहीं।
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याचिका दाखिल करते हुए इंदिरा साहनी व एम नागराज मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए आर्थिक आधार पर दिए गए आरक्षण को खारिज करने की अपील की गई थी। मामले में झज्जर निवासी सुरेश ने याचिका दाखिल करते हुए आर्थिक पिछड़ा वर्ग को दिए 10 प्रतिशत आरक्षण को चुनौती दी। मामले में याची द्वारा दलील दी गई थी कि आर्थिक आधार पर दिए गए आरक्षण के कारण प्रदेश में कुल आरक्षण 67 फीसदी हो गया है।
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इंदिरा साहनी मामले में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता है। जिंदल ने कहा कि इंदिरा साहनी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि विशेष परिस्थितियों में और तय मानकों का अनुसरण करने के बाद ही आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक हो सकता है। याची ने कहा कि हरियाणा में कुल आरक्षण 67 फीसदी है।
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हरियाणा सरकार के एक्ट के माध्यम से 57 फीसदी का आरक्षण दिया गया है जबकि 2013 की नोटिफिकेशन के माध्यम से आर्थिक पिछड़ा वर्ग को 10 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया है। याची ने कहा कि उनकी मुख्य दलील आरक्षण 50 फीसदी से ज्यादा होने की और आर्थिक आधार पर आरक्षण का संविधान में प्रावधान न होना है। याची ने कहा कि संविधान के अनुसार आरक्षण का आधार सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन हो सकता है लेकिन आर्थिक नहीं।