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जीटी बेल्ट का सियासी गणित: हरियाणा में भाजपा के सामने गढ़ बचाने की चुनौती, सिर उठा रहीं दबे पांव आईं चुनौतियां
Fri, 19 Apr 2024 01:30 PM IST
निवेदिता वर्मा
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 19 Apr 2024 01:30 PM IST
सार
हरियाणा में भाजपा जीटी बेल्ट की विधानसभा सीटों के बल पर ही राज्य में दो बार से अपनी सरकार बनाती आई है। मगर पिछले कुछ समय से इस क्षेत्र के सियासी समीकरण बदल गए हैं।
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हरियाणा के सीएम नायब सैनी
- फोटो : twitter @NayabSainiBJP
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विस्तार
हरियाणा में जीटी बेल्ट भाजपा का गढ़ माना जाता है। पिछले दो लोकसभा चुनाव में जीटी बेल्ट में आने वाली तीन सीटों अंबाला, कुरुक्षेत्र और करनाल में भाजपा ने न सिर्फ जीत दर्ज की, बल्कि अपने वोट शेयर में जबरदस्त बढ़ोतरी की है।
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राज्य की सत्ताधारी पार्टी के समक्ष दबे पांव कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। इन चुनौतियों को भांपते हुए पार्टी ने न सिर्फ अपने सिपहसालार बदले बल्कि अपने मुखिया को ही बदल दिया।
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चुनौतियों से जूझ रही पार्टी के सामने जहां इस दुर्ग को बचाने की चुनौती है, वहीं, मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस भाजपा की हैट्रिक रोकने के लिए कोई कसर छोड़ना नहीं चाहती। हालांकि कांग्रेस अभी तक अपने उम्मीदवार घोषित नहीं कर पाई। पार्टी का कहना है कि एक दो दिन में उसके उम्मीदवार मैदान में आ जाएंगे। उम्मीदवार आने के बाद चुनावी मैदान की तस्वीर और साफ हो जाएगी।
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भाजपा का गढ़ क्यों है जीटी बेल्ट
पिछले दो लोकसभा चुनाव में पार्टी ने तीनों लोकसभा सीटों पर भारी अंतर से जीत दर्ज की है। अंबाला लोकसभा सीट पर 2009 में भाजपा का वोट शेयर 35 फीसदी था, जो 2014 में बढ़कर 50.5 फीसदी और 2019 में सात फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 57 फीसदी पर पहुंच गया। यानी आधे से ज्यादा मतदाताओं ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया। वहीं, कांग्रेस को 2014 में 22.4 फीसदी और 2019 में 30.9 फीसदी मत मिले। इसी तरह से कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट पर भी भाजपा ने बढ़त बनाए रखी।
2014 के चुनाव में भाजपा को करीब 37 फीसदी और 2019 में 56 फीसदी मत हासिल हुए, जो विपक्षी दल कांग्रेस के मुकाबले दो गुने थे। कांग्रेस को 2014 में 25.4 फीसदी और 2019 में 24.8 फीसदी मत मिले। करनाल में भाजपा की जीत का अंतर और बढ़ जाता है। करनाल लोकसभा क्षेत्र में भाजपा को 2014 में 50 फीसदी और 2019 में 70 फीसदी, जो कांग्रेस के मुकाबले तीन गुना ज्यादा हैं। 2019 के विधानसभा चुनाव में जीटी रोड पर आने वाले 14 विधानसभा क्षेत्रों में से नौ पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। वहीं, इन सीटों पर जाटों के मुकाबले गैर जाट आबादी ज्यादा है। ऐसा माना जाता रहा है कि गैर जाट मतदाता भाजपा का पारंपरिक वोट बैंक है।
गढ़ को और मजबूत करने की कोशिश
भाजपा को अपने गढ़ से ही उम्मीद है, इसलिए पिछले महीने जब भाजपा ने नई सरकार का गठन किया तो इन तीनों लोकसभा सीटों पर ही फोकस किया गया। अंबाला और करनाल लोकसभा सीट को सबसे मजबूत बनाया गया। सीएम नायब सिंह सैनी मूलरूप से अंबाला के रहने वाले हैं और वह 2014 में नारायणगढ़ से विधायक रह चुके हैं। यमुनानगर के जगाधरी से विधायक कंवरपाल गुर्जर को कैबिनेट में नंबर दो का मंत्री बनाया है। अंबाला सिटी के विधायक असीम गोयल को मंत्री बनाया। पंचकूला के विधायक ज्ञानचंद गुप्ता पहले से विधानसभा अध्यक्ष हैं। करनाल लोकसभा क्षेत्र में आने वाले पानीपत ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से विधायक महिपाल ढांडा को राज्यमंत्री बनाया गया। नायब सिंह को करनाल विधानसभा से उम्मीदवार बनाकर जिले का सीएम सिटी का दर्ज बरकरार रखा गया। वहीं, पूर्व सीएम मनोहर लाल को करनाल लोकसभा से उतारकर इस सीट को और मजबूत करने की कोशिश की गई है। कुरुक्षेत्र लोकसभा के सांसद रहे नायब सिंह सैनी को सीएम बना दिया गया। वहीं, थानेसर के विधायक सुभाष सुधा को राज्य मंत्री बनाकर अन्य इलाकों को साधने की कोशिश की गई है।
भाजपा के सामने चुनौतियां
कद्दावर नेता अनिल विज की नाराजगी
पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने नेताओं को एकजुट रखने की है। छह बार के विधायक व पूर्व गृह मंत्री अनिल विज पिछले महीने हुई विधायक दल की बैठक से नाराज चल रहे हैं। वह अपनी नाराजगी कई मौकों पर जाहिर भी कर चुके हैं। हालांकि वह समय-समय पर यह भी कहते रहे हैं कि उनका किसी के साथ शिकवा नहीं है। सीएम नायब सिंह सैनी व पूर्व सीएम मनोहर लाल उनसे निजी तौर पर मिल चुके हैं, मगर नाराजगी की गांठें सुलझ नहीं पाईं। नाराजगी और मान-मनौव्वल के बीच जनता के बीच जो मैसेज जाना था, वह जा चुका है। हालांकि वह पार्टी उम्मीदवार बंतो कटारिया के पक्ष में अपने विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। विज को हरियाणा में भाजपा के दिग्गज नेताओं में गिना जाता है और पंजाबी समुदाय से आते हैं जो भाजपा का कोर वोट बैंक माना जाता है।
सत्ता विरोधी लहर से निपटना
भाजपा के सामने दूसरी बड़ी चुनौती सत्ता विरोधी लहर से निपटना है। पार्टी ने इसे भांप कर न सिर्फ सीएम चेहरा बदला, बल्कि करनाल और कुरुक्षेत्र लोकसभा से उम्मीदवार भी बदल दिए। जबकि 2019 के चुनाव में भाजपा ने इन दोनों सीटों पर रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की थी। पार्टी ने करनाल से पूर्व सीएम मनोहर लाल को मैदान में उतारा है, जबकि कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट से नवीन जिंदल को चुनावी रथ पर सवार किया है। हालांकि अब देखना होगा कि चेहरा बदलने से सत्ता विरोधी लहर को कम करने में पार्टी को कितनी कामयाबी मिलती है। वहीं, अंबाला लोकसभा सीट पर भाजपा बंतो कटारिया को उतारकर स्व. सांसद रतनलाल कटारिया की सहानुभूति लेने की कोशिश में जुटी है।
प्रदर्शन दोहराने की चुनौती
भाजपा के सामने अपने प्रदर्शन दोहराने के साथ वोट शेयर को बरकरार रखना भी चुनौती है। दरअसल पांच महीने बाद हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने हैं। पार्टी का लोकसभा में जैसा भी प्रदर्शन रहता है, उसका असर विधानसभा में पड़ना तय है। इसीलिए भाजपा ने 2024 में राज्य की सभी दसों लोकसभा सीट पर कमल खिलाने का लक्ष्य तय कर रखा है। पार्टी को पता है कि यदि वह लोकसभा की सभी सीटों पर जीत दर्ज करती है तो विधानसभा चुनाव का रास्ता उसके लिए आसान हो जाएगा। मगर जिस तरह का सियासी मिजाज है और जो सर्वे रिपोर्ट आ रही हैं उसमें भाजपा के लिए दसों सीटों पर प्रदर्शन दोहराना आसान नहीं है।
पिछले तीन चुनाव में अंबाला लोकसभा क्षेत्र में भाजपा-कांग्रेस का प्रदर्शन
साल कांग्रेस भाजपा इनेलो बसपा
2019 30.9 57 0 7.4
2014 22.4 50.5 10.7 8.5
2009 37.2 5.5 0 15.3
पिछले तीन चुनाव में करनाल लोकसभा क्षेत्र में भाजपा व कांग्रेस का प्रदर्शन
साल कांग्रेस भाजपा इनेलो बसपा
2019 19.7 70.4 0 5.2
2014 19.7 50 15.8 8.6
2009 37.6 22.9 0 28.2
पिछले तीन चुनाव में कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र में भाजपा व कांग्रेस का प्रदर्शन
साल कांग्रेस भाजपा इनेलो बसपा
2019 24.8 56.1 4.9 6.2
2014 25.4 36.9 25.4 6.1
2009 45.4 0 31.8 17.3
जीटी बेल्ट के 14 विधानसभा क्षेत्रों में स्थिति
विधानसभा क्षेत्र विधायक पार्टी
अंबाला सिटी असीम गोयल भाजपा
अंबाला कैंट अनिल विज भाजपा
नीलोखेड़ी धर्मपाल गोंदर निर्दलीय
करनाल मनोहर लाल भाजपा
घरौंडा हरविंदर कल्याण भाजपा
पानीपत शहर प्रमोद विज भाजपा
समालखा धर्म सिंह छौक्कर कांग्रेस
गन्नौर निर्मल रानी भाजपा
सोनीपत सुरेंद्र पंवार कांग्रेस
राई मोहन लाल बड़ौली भाजपा
लाडवा मेवा सिंह कांग्रेस
पिहोवा संदीप सिंह भाजपा
शाहबाद रामकरण काला जजपा
थानेसर सुभाष सुधा भाजपा