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Punjab: पंजाब में बिना नक्शे के निर्माण पर अब मशीन से कटेगा चालान, स्थानीय निकाय विभाग बनाएगा सॉफ्टवेयर
Mon, 29 Jul 2024 12:50 PM IST
निवेदिता वर्मा
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 29 Jul 2024 12:50 PM IST
सार
पंजाब में 167 नगर निकाय हैं। सभी में बिल्डिंग ब्रांचों की तरफ से चालान बुक के जरिये ही चालान काटा जाता है। स्थानीय निकाय विभाग ने पिछले वर्ष सभी निकायों को अवैध निर्माण व चालान का डाटा भेजने के निर्देश दिए थे। सामने आया था कि अधिकतर निकायों की ओर से चालान को लेकर अपना डाटा मेंटेन नहीं किया जा रहा है। यही कारण है कि विभाग ने फैसला लिया था कि इस पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाएगा।
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भगवंत मान
- फोटो : X @BhagwantMann
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विस्तार
पंजाब में जल्द ही नगर निकायों की बिल्डिंग ब्रांचों को मैनुअल चालान से छुटकारा मिलने जा रहा है। दरअसल स्थानीय निकाय विभाग अब जल्द ही सभी नगर निकायों को चालान मशीनें प्रदान करेगा, जिससे बिल्डिंग वॉयलेशन और बिना नक्शे के निर्माण का चालान अब मशीनें के जरिये ही जारी किया जाएगा।
इस काम के लिए विभाग की तरफ से एक सॉफ्टवेयर भी तैयार किया जाएगा, जिससे रिकॉर्ड मेंटेन करने में भी मदद मिलेगी। इस संबंध में विभाग की एक बैठक हो चुकी है और प्रस्ताव भी तैयार कर लिया गया है, जिसे जल्द ही मंजूरी के लिए उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा। मंजूरी के बाद ही इस नए सिस्टम को लागू कर दिया जाएगा।
विभाग के अनुसार बहुत ही कम नगर निकाय ऐसे हैं, जो डाटा को बेहतर रूप से मेंटेन कर रहे हैं। इसके चलते ही उन्होंने चालान बुक का झंझट खत्म करने का फैसला लिया है।
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पंजाब में दो साल पहले अवैध कॉलोनियों को लेकर भी एक सर्वे करवाया गया था, जिसमें पांच हजार कॉलोनियों अवैध पाई गई थीं। इसमें करीब 50 लाख लोग रह रहे हैं। इसके अलावा निगम सीमा के बाहर भी अवैध कॉलोनियां हैं, जिनका डाटा विभाग नहीं जुटा पाया था।
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इस काम के लिए विभाग की तरफ से एक सॉफ्टवेयर भी तैयार किया जाएगा, जिससे रिकॉर्ड मेंटेन करने में भी मदद मिलेगी। इस संबंध में विभाग की एक बैठक हो चुकी है और प्रस्ताव भी तैयार कर लिया गया है, जिसे जल्द ही मंजूरी के लिए उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा। मंजूरी के बाद ही इस नए सिस्टम को लागू कर दिया जाएगा।
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विभाग के अनुसार बहुत ही कम नगर निकाय ऐसे हैं, जो डाटा को बेहतर रूप से मेंटेन कर रहे हैं। इसके चलते ही उन्होंने चालान बुक का झंझट खत्म करने का फैसला लिया है।
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लोग चालान राशि नहीं करवाते जमा
विभाग के अनुसार डाटा मेंटेन न होने के चलते स्थानीय निकायों को राजस्व से भी हाथ धोना पड़ रहा है। अधिकतर लोग अवैध निर्माण पर चालान के बाद भी जुर्माने की राशि जमा नहीं करवाते हैं। चालान बुक का डाटा सुरक्षित रखने में नगर निकाय असफल हो रहे हैं। यही कारण है कि विभाग इसे लेकर एक बैंक के साथ भी बैठक कर चुका है और बैंक से ही सॉफ्टवेयर बनाने का काम पूरा कराने पर सहमति बनी है। अब उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव भेजने की तैयारी की जा रही है, ताकि इस परियोजना पर आगे बढ़ा जा सकें।पंजाब में दो साल पहले अवैध कॉलोनियों को लेकर भी एक सर्वे करवाया गया था, जिसमें पांच हजार कॉलोनियों अवैध पाई गई थीं। इसमें करीब 50 लाख लोग रह रहे हैं। इसके अलावा निगम सीमा के बाहर भी अवैध कॉलोनियां हैं, जिनका डाटा विभाग नहीं जुटा पाया था।