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Chandigarh News: हरियाणा पुलिस के अधिकारियों को वीरता पुरस्कार पर केंद्र ने उठाए सवाल
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रस्ताव को बताया अधूरा, गोलीबारी का विवरण और आंदोलनकारियों के खिलाफ केसों की जानकारी मांगी
मंत्रालय ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों की सिफारिश नहीं करने पर जताई हैरानी
चंडीगढ़। किसान आंदोलन के दौरान किसानों को दिल्ली कूच करने से रोकने वाले हरियाणा के पांच पुलिस अधिकारियों को वीरता पुरस्कार दिलाने के प्रस्ताव पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सवाल उठाए हैं। मंत्रालय ने हरियाणा के गृह विभाग को भेजे पत्र में कहा कि ऑनलाइन जमा किए गए आवेदनों के साथ सभी जरूरी जानकारी नहीं दी गई है। न ही गोलीबारी का विवरण और आंदोलनकारियों के खिलाफ आपराधिक मामलों की स्थिति अपलोड नहीं की गई है। मंत्रालय ने कहा कि हरियाणा पुलिस के साथ केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के कर्मी भी तैनात थे, लेकिन सरकार ने उनके लिए कोई सिफारिश नहीं की है। ऐसे में पुलिस अधिकारियों के वीरता पुरस्कारों पर पेंच फंस गया है।
फरवरी में अपने दिल्ली चलो आंदोलन के तहत पंजाब से राष्ट्रीय राजधानी की ओर मार्च कर रहे किसानों को हरियाणा पुलिस ने शंभू और खनौरी बार्डर पर पत्थर आदि लगाकर आगे जाने से रोका था। वहीं, शंभू और जींद के दाता सिंह वाला-खनौरी बॉर्डर पर आठ लेयर की सुरक्षा के चलते किसान आगे नहीं बढ़ पाए। इस दौरान केंद्रीय अर्ध सैनिक बल के जवान भी इन जगहों पर तैनात थे। हरियाणा सरकार ने गृह मंत्रालय को छह पुलिस अधिकारियों के नाम भेजे थे। इनमें अंबाला रेंज के आईजी सिबास कविराज, तत्कालीन एसपी जश्नदीप रंधावा, डीसीपी नरेंद्र कुमार, डीएसपी रामकुमार का नाम भी इस लिस्ट में शामिल है। वहीं, एसपी सुमित कुमार, डीएसपी अमित भाटिया का नाम भी शामिल हैं। गृह मंत्रालय के सवालों से अब हरियाणा सरकार मुश्किल में पड़ सकती है, क्योंकि उसने कभी आधिकारिक तौर पर यह नहीं कहा कि पुलिस ने प्रदर्शनकारी किसानों पर गोलियां चलाईं। राज्य सरकार ने हमेशा कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केवल आंसू गैस के गोले और रबर की गोलियों का इस्तेमाल हुआ है। ऐसे में गोलीबारी का विवरण देने से हरियाणा सरकार की परेशानी बढ़ सकती है।
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मंत्रालय ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों की सिफारिश नहीं करने पर जताई हैरानी
चंडीगढ़। किसान आंदोलन के दौरान किसानों को दिल्ली कूच करने से रोकने वाले हरियाणा के पांच पुलिस अधिकारियों को वीरता पुरस्कार दिलाने के प्रस्ताव पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सवाल उठाए हैं। मंत्रालय ने हरियाणा के गृह विभाग को भेजे पत्र में कहा कि ऑनलाइन जमा किए गए आवेदनों के साथ सभी जरूरी जानकारी नहीं दी गई है। न ही गोलीबारी का विवरण और आंदोलनकारियों के खिलाफ आपराधिक मामलों की स्थिति अपलोड नहीं की गई है। मंत्रालय ने कहा कि हरियाणा पुलिस के साथ केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के कर्मी भी तैनात थे, लेकिन सरकार ने उनके लिए कोई सिफारिश नहीं की है। ऐसे में पुलिस अधिकारियों के वीरता पुरस्कारों पर पेंच फंस गया है।
फरवरी में अपने दिल्ली चलो आंदोलन के तहत पंजाब से राष्ट्रीय राजधानी की ओर मार्च कर रहे किसानों को हरियाणा पुलिस ने शंभू और खनौरी बार्डर पर पत्थर आदि लगाकर आगे जाने से रोका था। वहीं, शंभू और जींद के दाता सिंह वाला-खनौरी बॉर्डर पर आठ लेयर की सुरक्षा के चलते किसान आगे नहीं बढ़ पाए। इस दौरान केंद्रीय अर्ध सैनिक बल के जवान भी इन जगहों पर तैनात थे। हरियाणा सरकार ने गृह मंत्रालय को छह पुलिस अधिकारियों के नाम भेजे थे। इनमें अंबाला रेंज के आईजी सिबास कविराज, तत्कालीन एसपी जश्नदीप रंधावा, डीसीपी नरेंद्र कुमार, डीएसपी रामकुमार का नाम भी इस लिस्ट में शामिल है। वहीं, एसपी सुमित कुमार, डीएसपी अमित भाटिया का नाम भी शामिल हैं। गृह मंत्रालय के सवालों से अब हरियाणा सरकार मुश्किल में पड़ सकती है, क्योंकि उसने कभी आधिकारिक तौर पर यह नहीं कहा कि पुलिस ने प्रदर्शनकारी किसानों पर गोलियां चलाईं। राज्य सरकार ने हमेशा कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केवल आंसू गैस के गोले और रबर की गोलियों का इस्तेमाल हुआ है। ऐसे में गोलीबारी का विवरण देने से हरियाणा सरकार की परेशानी बढ़ सकती है।
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