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Chandigarh News: सीसीएसएचएयू में प्रो. बदलदेव राज कंबोज की वीसी के तौर पर नियुक्ति को चुनौती
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-प्रोफेसर के तौर पर 10 वर्ष का अनुभव न होने की याचिका में दी गई है दलील
-बिना किसी विज्ञापन व सर्च कमेटी के यह नियुक्ति करने का लगाया गया है आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
हिसार के चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (सीसीएसएचएयू) के वाइस चांसलर (वीसी) के तौर पर प्रो. बलदेव राज कांबोज की नियुक्ति को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। हिसार निवासी अनिल पणिक्कर ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि कंबोज यूजीसी के नियमों के अनुसार वीसी पद पर नियुक्ति के लिए प्रोफेसर के रूप में 10 साल के अनुभव की न्यूनतम आवश्यकता को पूरा नहीं करते हैं। इसके साथ ही आरोप लगाया गया कि यूनिवर्सिटी ने बिना विज्ञापन जारी किए व आवेदन मांगे ही उनकी नियुक्ति कर दी। याची ने कहा कि अयोग्य व्यक्ति को वीसी के पद पर नियुक्त करना अवैध, मनमाना और असंवैधानिक है। याची ने कहा कि इस मामले में कुलपति के पद पर अपात्र व्यक्ति के चयन में शामिल लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को निर्देश दिया जाना चाहिए। आरटीआई से मिली जानकारी का हवाला देते हुए याची ने कहा कि कंबोज सितंबर 2010 से अगस्त 2013 तक करनाल के सीरियल सिस्टम्स इनिशिएटिव फॉर साउथ एशिया में हब सीनियर रिसर्च मैनेजर के पद पर काम किया था जो प्रोफेसर की तुलना में छोटा पद है। ऐसे में इस अनुभव को प्रोफेसर के अनुभव के तौर पर नहीं माना जा सकता। यूजीसी के अनुसार कुलपति के पद पर नियुक्ति के लिए प्रोफेसर के तौर पर 10 साल का अनुभव जरूरी है और सीएसआईएसए परियोजना में उनके अनुभव को घटाने के बाद कम्बोज प्रोफेसर के रूप में 10 साल के अनुभव को पूरा नहीं करते हैं। याची ने कहा कि इस पद को न तो विज्ञापित किया गया और न ही कंबोज के नाम केलिए कोई कमेटी बनाई गई। ऐसे में यह यूजीसी के नियमों के खिलाफ है। 30 अक्टूबर, 2022 को याचिकाकर्ता ने कंबोज को वीसी के पद से हटाने और उन्हें नियुक्त करने वाले सभी लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने तथा वेतन व अन्य जारी लाभ की वसूली के लिए शिकायत दी थी।
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-बिना किसी विज्ञापन व सर्च कमेटी के यह नियुक्ति करने का लगाया गया है आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
हिसार के चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (सीसीएसएचएयू) के वाइस चांसलर (वीसी) के तौर पर प्रो. बलदेव राज कांबोज की नियुक्ति को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। हिसार निवासी अनिल पणिक्कर ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि कंबोज यूजीसी के नियमों के अनुसार वीसी पद पर नियुक्ति के लिए प्रोफेसर के रूप में 10 साल के अनुभव की न्यूनतम आवश्यकता को पूरा नहीं करते हैं। इसके साथ ही आरोप लगाया गया कि यूनिवर्सिटी ने बिना विज्ञापन जारी किए व आवेदन मांगे ही उनकी नियुक्ति कर दी। याची ने कहा कि अयोग्य व्यक्ति को वीसी के पद पर नियुक्त करना अवैध, मनमाना और असंवैधानिक है। याची ने कहा कि इस मामले में कुलपति के पद पर अपात्र व्यक्ति के चयन में शामिल लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को निर्देश दिया जाना चाहिए। आरटीआई से मिली जानकारी का हवाला देते हुए याची ने कहा कि कंबोज सितंबर 2010 से अगस्त 2013 तक करनाल के सीरियल सिस्टम्स इनिशिएटिव फॉर साउथ एशिया में हब सीनियर रिसर्च मैनेजर के पद पर काम किया था जो प्रोफेसर की तुलना में छोटा पद है। ऐसे में इस अनुभव को प्रोफेसर के अनुभव के तौर पर नहीं माना जा सकता। यूजीसी के अनुसार कुलपति के पद पर नियुक्ति के लिए प्रोफेसर के तौर पर 10 साल का अनुभव जरूरी है और सीएसआईएसए परियोजना में उनके अनुभव को घटाने के बाद कम्बोज प्रोफेसर के रूप में 10 साल के अनुभव को पूरा नहीं करते हैं। याची ने कहा कि इस पद को न तो विज्ञापित किया गया और न ही कंबोज के नाम केलिए कोई कमेटी बनाई गई। ऐसे में यह यूजीसी के नियमों के खिलाफ है। 30 अक्टूबर, 2022 को याचिकाकर्ता ने कंबोज को वीसी के पद से हटाने और उन्हें नियुक्त करने वाले सभी लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने तथा वेतन व अन्य जारी लाभ की वसूली के लिए शिकायत दी थी।