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Haryana: फर्जी दस्तावेजों से निजी स्कूलों को सीबीएसई की संबद्धता दिला रहा गिरोह, रेट पांच से पंद्रह लाख

Thu, 08 Dec 2022 10:08 AM IST
निवेदिता वर्मा यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 08 Dec 2022 10:08 AM IST
सार

पूरे हरियाणा में स्कूल संचालक दलालों से सीबीएसई की संबंद्धताके लिए संपर्क करते हैं। दलाल भवन सुरक्षा, फायर, भूमि और सेकेंडरी शिक्षा निदेशक की एनओसी, सीबीएसई की संबंद्धता दिलाने के लिए पांच से पंद्रह लाख रुपये लेते हैं।

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CBSE affiliation being given to private schools in Haryana through fake documents
CBSE - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

हरियाणा में निजी स्कूलों को फर्जी दस्तावेजों के जरिये सीबीएसई की संबद्धता दिलाई जा रही है। इस खेल को प्रदेश में तीन गिरोह अंजाम दे रहे हैं। ये फर्जी कागजात तैयार कर पांच से पंद्रह लाख रुपये में सेकेंडरी शिक्षा निदेशक, भवन-फायर सेफ्टी और जमीन पूरी होने से लेकर संबंद्धता दिलाने का काम कर रहे हैं। कैथल, कुरुक्षेत्र, करनाल और पलवल जिले में दलालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं, बावजूद इसके दलाल अब भी सक्रिय हैं।

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सीआईडी के पास इन दलालों की पूरी कुंडली आ चुकी है। जल्दी ही कुछ दिनों में और दलालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सकती हैं। सीबीएसई की संबद्धता दिलाने के लिए दलालों ने निदेशक सेकेंडरी शिक्षा के फर्जी डिजिटल हस्ताक्षर भी किए हुए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के पास भी इसकी शिकायतें पहुंची थीं। सीआईडी ने भी शिकायतों के आधार पर मामले की जांच अपने स्तर पर की थी, जिसमें सामने आया था कि पूरे काम को कराने का रेट पांच से पंद्रह लाख रुपये तक तय होता है। 
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सूत्रों के अनुसार हरियाणा के गिरोह राजस्थान और उत्तराखंड तक सक्रिय है। कैथल में 38 निजी स्कूलों के फर्जी मान्यता लेने के मामले में स्कूल संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश मंगलवार को हो चुके हैं। इस मामले में स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी, कर्मचारी भी लपेटे में आ सकते हैं। चूंकि, कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना फर्जी दस्तावेज के आधार पर निदेशक की फर्जी एनओसी और सीबीएसई की संबंद्धता संभव नहीं है।   
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ऐसे काम करता है गिरोह
पूरे हरियाणा में स्कूल संचालक दलालों से सीबीएसई की संबंद्धताके लिए संपर्क करते हैं। दलाल भवन सुरक्षा, फायर, भूमि और सेकेंडरी शिक्षा निदेशक की एनओसी, सीबीएसई की संबंद्धता दिलाने के लिए पांच से पंद्रह लाख रुपये लेते हैं। इसके बाद पूरा काम इनका ही होता है, स्कूल संचालकों को कहीं नहीं जाना होता। गिरोह सारे कागज खुद ही तैयार करता है, जिनके आधार पर संबंद्धता दिलाई जाती है। पूरे मामले में सीबीएसई से लेकर शिक्षा निदेशालय तक के अधिकारी कर्मचारी शामिल हैं।

दलालों के जाल में फंस चुका कुरुक्षेत्र का नामी स्कूल
कुरुक्षेत्र से शिक्षा निदेशालय को इसी साल गुमनाम शिकायतें कई पहुंचीं, इसमें बताया गया कि छह स्कूलों ने शिक्षा निदेशक के नाम की वर्ष 2021 की फर्जी एनओसी के आधार पर सीबीएसई की संबंद्धता ली है। इसमें कुरुक्षेत्र का एक नामी स्कूल भी शामिल था। जब इन स्कूलों का नाम आया तो हड़कंप मच गया। फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले दलाल के खिलाफ स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश पर कुरुक्षेत्र जिले में दो एफआईआर दर्ज की गईं हैं। इनमें जांच जारी है, पूरे प्रदेश में सक्रिय गिरोह का भंडाफोड़ होने की उम्मीद जताई जा रही है।

तरुण धीमान ने छह स्कूलों को दिलाई संबद्घता
सेकेंडरी शिक्षा निदेशक ने पहली सितंबर 2022 को कैथल व कुरुक्षेत्र के एसपी को पत्र लिखकर बताया था कि करनाल जिले के इंद्री निवासी तरुण कुमार धीमान ने कुरुक्षेत्र के चार और कैथल के दो स्कूलों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सीबीएसई की संबंद्धता दिलाई है। उनके पत्र के आधार पर तरुण के खिलाफ मामले दर्ज हो चुके हैं। विभाग ने बीते तीन नवंबर को एक आरटीआई के जवाब में बताया है कि इन स्कूलों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। 


मामला संज्ञान में, कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए : कंवर पाल
शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर ने बताया कि फर्जी दस्तावेज के आधार पर सीबीएसई की संबंद्धता का मामला उनके संज्ञान में है। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दलालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। स्कूल प्रबंधन से भी जवाब-तलब किया गया है। विभाग को एनओसी व मान्यता के मामलों की भी कड़ी पड़ताल करने को कहा है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। स्कूलों को पूरे मानदंड पूरा करते हुए सीबीएसई की संबंद्धता लेनी होगी। 

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