162 करोड़ का पेंशन घोटाला: हरियाणा में भूतों को बांट दी पेंशन, सीबीआई ने की अफसरों पर कार्रवाई की सिफारिश
162 करोड़ रुपये के पेंशन घोटाले में सीबीआई ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में अपनी जांच रिपोर्ट दाखिल कर दी है। सीबीआई ने अपनी जांच में अधिकारियों को दोषी पाया। उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश भी की है। अब अदालत ने हरियाणा सरकार से कार्रवाई का ब्योरा मांग लिया है।
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भूतों (अपात्र, मृतकों व अस्तित्वविहीन लोगों) को 2011 से 2015 के बीच 162 करोड़ रुपये पेंशन बांटने के मामले में सीबीआई ने अपनी जांच रिपोर्ट पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को सौंपते हुए जिला समाज कल्याण अधिकारियों को दोषी बताया है। साथ ही पेंशन के लिए वेरिफिकेशन करने वालों और मंजूरी देने वालों पर एफआईआर की सिफारिश की है।
हाईकोर्ट के न्यायाधीश विनोद भारद्वाज ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए हरियाणा सरकार से कार्रवाई की रिपोर्ट तलब कर ली है। साथ ही सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के प्रधान सचिव व महानिदेशक को अवमानना नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।
आरटीआई कार्यकर्ता राकेश बैंस ने 2017 में अधिवक्ता प्रदीप रापड़िया के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को हरियाणा में हुए पेंशन वितरण घोटाले की जानकारी दी थी। याची ने बताया कि कैग की रिपोर्ट के अनुसार पेंशन वितरण में बड़ा घोटाला हुआ है। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने ऐसे व्यक्तियों को भी पेंशन बांट दी जिनकी या तो मृत्यु हो चुकी या वे पेंशन लेने की योग्यता ही पूरी नहीं करते। इसमें कई पंच, सरपंच भी शामिल रहे हैं। एक के साथ दो पेंशन का लाभ लेने वाले भी इनमें शामिल हैं। इस प्रकार सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया गया। याची ने कहा कि उन्हें हरियाणा विजिलेंस से कोई उम्मीद नहीं है और इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से करवाई जाए।
हाईकोर्ट ने इस मामले में सीबीआई को प्राथमिक जांच करने का आदेश दिया था और इसी के अनुरूप सीबीआई ने हाईकोर्ट को रिपोर्ट सौंप दी है। सीबीआई ने हाईकोर्ट में दाखिल अपनी स्टेट्स रिपोर्ट में कहा है कि प्रदेश के सभी दोषी जिला समाज कल्याण अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
अधिकारी बताएं क्यों न हो अवमानना की कार्रवाई
इस मामले में राज्य सरकार ने 2012 में दोषियों पर कार्रवाई की अंडरटेकिंग दी थी। इस अंडरटेकिंग के बावजूद आज भी मामला हमारे पास विचारधीन है, जो यह दर्शाता है कि अधिकारियों में सरकार की दी गई अंडरटेकिंग को लेकर प्रतिबद्धता की कमी है।
हाईकोर्ट ने कहा कि 2012 से लेकर अब तक जितने भी समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव और महानिदेशक रहे वो प्रथम दृष्टया कोर्ट की अवमानना के दोषी हैं लेकिन अभी अदालत सिर्फ मौजूदा प्रधान सचिव और महानिदेशक को अवमानना का नोटिस जारी कर रही है। 15 मार्च तक दोनों को बताना होगा कि क्यों ना उनके खिलाफ अवमानना के लिए कार्रवाई की जाए।
सीबीआई के अनुसार, बड़ी राशि की वसूली बाकी
सीबीआई ने कहा कि अभी अपात्रों को पेंशन के तौर पर वितरित की गई बड़ी राशि की वसूली बाकी है। 2012 में हरियाणा सरकार ने विश्वास दिलाया था कि इस मामले में कार्रवाई होगी और ऐसा न होने के लिए जिम्मेदार सभी जिला समाज कल्याण अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए।
2015 में की थी शिकायत, सात जिलों के अधिकारी चार्जशीट
आरटीआई कार्यकर्ता राकेश बैंस ने छह अप्रैल 2015 को राज्य सरकार को पेंशन घोटाले की शिकायत दी थी। इसके बाद सरकार ने कार्रवाई नहीं की तो 2017 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई से जांच कराने की मांग की। मई 2023 में सरकार ने सीबीआई को जांच सौंप दी। इस मामले में समाज कल्याण विभाग संदिग्ध भूमिका वाले सात जिला समाज कल्याण अधिकारियों को चार्जशीट कर चुका है।
7.5 करोड़ से अधिक की रिकवरी बाकी
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि करीब 162 करोड़ रुपये का पेंशन घोटाला है। हालांकि, कैग की रिपोर्ट में इसे कई सौ करोड़ रुपये का घोटाला बताया गया है। समाज कल्याण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012 की जांच में 18 हजार 420 अयोग्य लोग पाए गए थे। इसके अलावा 41 हजार 198 गैरहाजिर मिले और 29 हजार 381 की मृत्यु हो चुकी थी।
इसके बाद 22 अगस्त 2021 को अदालत में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार 13 हजार 477 लोग पेंशन के अयोग्य थे, जबकि 17 हजार 94 गैरहाजिर रहे। 50 हजार 312 मृत मिले। इस मामले में कुल 6722 लोगों से 7 करोड़ 57 लाख 57 हजार 85 रुपये की रिकवरी बाकी है। इसमें 996 मृतकों से 1 करोड़ 39 लाख एक हजार 773 रुपये की रिकवरी और 657 लापता लोगों से 95 लाख सात हजार 902 रुपये की रिकवरी शामिल नहीं है।
सिर्फ एक सरपंच को तीन साल की सजा
- कुरुक्षेत्र थाने में 22 जनवरी 2013 को दर्ज मामले में आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया, मगर आरोपी की मौत हो गई।
- पुलिस ने 23 फरवरी 2015 को करनाल, कैथल और कुरुक्षेत्र में तीन अलग-अलग केस दर्ज किए। एक केस की जांच ठीक नहीं की गई और दो केस के आरोपी बरी हो गए।
- कैथल के सीवन थाने में 25 अक्तूबर 2015 को दर्ज एफआइआर में आरोपी सरपंच को तीन साल की सजा हुई।
- कुरुक्षेत्र के शाहबाद थाने में 28 जनवरी 2017 को दर्ज केस को पुलिस ने अनट्रेस बताकर बंद कर दिया।
- जींद के पिल्लूखेड़ा थाने में 27 मई 2021 को दर्ज मामले को पुलिस ने अनट्रेस बता दिया।
- नरवाना थाने में 13 जनवरी 2022 को दर्ज मामले में पुलिस ने केस को अनट्रेस बताया है।