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Chandigarh News: ग्रेन मार्केट के कचरे और गोबर से बनेगी सीबीजी
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ग्रेन मार्केट के कचरे और गोबर से बनेगी सीबीजी
5 टन क्षमता का प्लांट होगा अपग्रेड, लोगों को मिलेगा कचरे के बेहतर निस्तारण का फायदा; सीबीजी के साथ बनेगी जैविक खाद, निगम को मिलेगी रॉयल्टी
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। सेक्टर-26 ग्रेन मार्केट का गीला कचरा और गौशालाओं का गोबर अब कचरे के ढेर के बजाय सीबीजी और जैविक खाद बनाने में काम आएगा। नगर निगम इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में 5 टन क्षमता वाले बायोमेथेनेशन प्लांट को अपग्रेड करने जा रहा है। इससे मंडी के गीले कचरे और गोबर के निस्तारण की समस्या कम होगी और उससे कंप्रेस्ड बायो-गैस (सीबीजी) व जैविक खाद तैयार की जाएगी। खास बात यह है कि प्लांट को अपग्रेड करने पर निगम को अपनी जेब से पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा।
निगम ने इसके लिए डिजाइन, बिल्ड एंड ऑपरेट (डीबीओ) आधार पर रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी किया है। जिस एजेंसी की ओर से प्रति मीट्रिक टन गीले कचरे के बदले सबसे अधिक रॉयल्टी की पेशकश की जाएगी, उसे प्रोजेक्ट सौंपा जाएगा। एजेंसी प्लांट को अपग्रेड करने के साथ उसका संचालन भी करेगी।
11 साल तक एजेंसी संभालेगी प्लांट
अपग्रेडेशन के बाद एजेंसी पर एक साल का डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड रहेगा। इसके बाद उसे 10 साल तक प्लांट का संचालन और रखरखाव करना होगा। यानी निगम को लंबे समय तक प्लांट चलाने और रखरखाव पर खर्च नहीं करना पड़ेगा।
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2016 में बिजली बनाने के लिए लगा था प्लांट
इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में यह बायोमेथेनेशन प्लांट नवंबर 2016 में लगाया गया था। तब सेक्टर-26 मंडी के गीले कचरे और गौशालाओं से मिलने वाले गोबर से बिजली तैयार की जाती थी। इस बिजली का इस्तेमाल आसपास की स्ट्रीट लाइटों में किया जाता था। अब निगम ने प्लांट को आधुनिक तकनीक के साथ सीबीजी और जैविक खाद उत्पादन के लिए अपग्रेड करने का फैसला लिया है।
कचरा लेने के लिए निगम को पैसा नहीं देना होगा
प्रस्ताव के मुताबिक एजेंसी निगम से गीला कचरा लेने के लिए कोई भुगतान नहीं लेगी, बल्कि प्रति मीट्रिक टन कचरे के हिसाब से निगम को रॉयल्टी देगी। इससे एक ओर मंडी के गीले कचरे और गोबर के निस्तारण का स्थायी इंतजाम होगा, वहीं निगम को प्लांट से नियमित राजस्व भी मिलेगा। नगर निगम के चीफ इंजीनियर संजय अरोड़ा के अनुसार, प्लांट के अपग्रेडेशन पर निगम को कोई राशि खर्च नहीं करनी होगी। एजेंसी अपने खर्च पर इसे अपग्रेड कर संचालित करेगी और निगम को प्रति टन गीले कचरे के हिसाब से रॉयल्टी देगी।
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5 टन क्षमता का प्लांट होगा अपग्रेड, लोगों को मिलेगा कचरे के बेहतर निस्तारण का फायदा
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। सेक्टर-26 ग्रेन मार्केट का गीला कचरा और गौशालाओं का गोबर अब कचरे के ढेर के बजाय सीबीजी और जैविक खाद बनाने में काम आएगा। नगर निगम इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में 5 टन क्षमता वाले बायोमेथेनेशन प्लांट को अपग्रेड करने जा रहा है। इससे मंडी के गीले कचरे और गोबर के निस्तारण की समस्या कम होगी और उससे कंप्रेस्ड बायो-गैस (सीबीजी) व जैविक खाद तैयार की जाएगी। खास बात यह है कि प्लांट को अपग्रेड करने पर निगम को अपनी जेब से पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा।
निगम ने इसके लिए डिजाइन, बिल्ड एंड ऑपरेट (डीबीओ) आधार पर रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी किया है। जिस एजेंसी की ओर से प्रति मीट्रिक टन गीले कचरे के बदले सबसे अधिक रॉयल्टी की पेशकश की जाएगी, उसे प्रोजेक्ट सौंपा जाएगा। एजेंसी प्लांट को अपग्रेड करने के साथ उसका संचालन भी करेगी।
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11 साल तक एजेंसी संभालेगी प्लांट
अपग्रेडेशन के बाद एजेंसी पर एक साल का डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड रहेगा। इसके बाद उसे 10 साल तक प्लांट का संचालन और रखरखाव करना होगा। यानी निगम को लंबे समय तक प्लांट चलाने और रखरखाव पर खर्च नहीं करना पड़ेगा।
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2016 में बिजली बनाने के लिए लगा था प्लांट
इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में यह बायोमेथेनेशन प्लांट नवंबर 2016 में लगाया गया था। तब सेक्टर-26 मंडी के गीले कचरे और गौशालाओं से मिलने वाले गोबर से बिजली तैयार की जाती थी। इस बिजली का इस्तेमाल आसपास की स्ट्रीट लाइटों में किया जाता था। अब निगम ने प्लांट को आधुनिक तकनीक के साथ सीबीजी और जैविक खाद उत्पादन के लिए अपग्रेड करने का फैसला लिया है।
कचरा लेने के लिए निगम को पैसा नहीं देना होगा
प्रस्ताव के मुताबिक एजेंसी निगम से गीला कचरा लेने के लिए कोई भुगतान नहीं लेगी, बल्कि प्रति मीट्रिक टन कचरे के हिसाब से निगम को रॉयल्टी देगी। इससे एक ओर मंडी के गीले कचरे और गोबर के निस्तारण का स्थायी इंतजाम होगा, वहीं निगम को प्लांट से नियमित राजस्व भी मिलेगा। नगर निगम के चीफ इंजीनियर संजय अरोड़ा के अनुसार, प्लांट के अपग्रेडेशन पर निगम को कोई राशि खर्च नहीं करनी होगी। एजेंसी अपने खर्च पर इसे अपग्रेड कर संचालित करेगी और निगम को प्रति टन गीले कचरे के हिसाब से रॉयल्टी देगी।