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1150 JBT-TGT को राहत, भर्ती रद्द करने के आदेश पर लगी रोक, प्रशासन को नोटिस

Fri, 01 Jun 2018 10:43 AM IST
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 01 Jun 2018 10:43 AM IST
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CAT stay on 1150 jbt tgt recruitment cancellation orders
टीचरों का विरोध प्रदर्शन
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने यूटी प्रशासन की ओर से बुधवार को जेबीटी-टीजीटी भर्ती प्रक्रिया के तहत 2015 में हुई सभी (करीब 850) नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश पर वीरवार को रोक लगा दी। 344 शिक्षकों ने वीरवार को ही प्रशासन के आदेश के खिलाफ कैट में केस दायर कर दिया। जस्टिस एमएस सुल्लर और न्यायिक सदस्य पी गोपीनाथ की बेंच ने मामले में सुनवाई करते हुए शिक्षकों को बिना एक महीने का नोटिस जारी कर सीधा बर्खास्त करने के आदेश जारी करने को उनके कानूनी अधिकारों का हनन मानते हुए उन्हें राहत देते हुए प्रशासन के फैसले पर 24 घंटे से पहले ही रोक लगा दी है। इसके साथ ही यूटी प्रशासन और शिक्षा विभाग को 6 जुलाई के लिए नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है।
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शिक्षकों की ओर से पेश हुए एडवोकेट डॉ. अनमोल रत्तन सिद्धू ने दलील दी कि शिक्षा विभाग ने 1150 जेबीटी, टीजीटी और एनटीटी शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसके तहत याचिकाकर्ताओं ने आवेदन किया था। पूरी प्रक्रिया होने के बाद करीब 850 शिक्षकों ने यूटी शिक्षा विभाग में ज्वाइन किया था। चंडीगढ़ पुलिस ने जुलाई 2016 में पंजाब विजिलेंस की शिकायत के आधार पर जेबीटी-टीजीटी भर्ती में धांधली पर केस दर्ज किया था। स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) इसकी जांच कर रही है। मामले में कई आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं और पुलिस जांच अभी चल रही है।
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ऐसे में जांच टीम की संस्तुति के आधार पर प्रशासन ने बुधवार को आदेश जारी कर इस पूरी भर्ती प्रक्रिया के तहत हुई नियुक्तियों को ही रद्द कर दो साल से नौकरी कर रहे शिक्षकों को एक दम से नौकरी से हटा दिया। इनमें वह शिक्षक भी थे, जो पहले से कहीं और नौकरी कर रहे थे और यहां नियुक्ति मिलने पर ज्वाइन किया था। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ताओं में से किसी का भी नाम एफआईआर में नहीं था। जांच टीम की ओर से भर्ती धांधली में जिला अदालत में चार्जशीट भी दायर की जा चुकी है। इनमें एक भी शिकायतकर्ता का नाम नहीं है।
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इसके अलावा सभी शिकायतकर्ता एसआईटी के समक्ष पेश होकर जांच भी ज्वाइन कर चुके हैं। एसआईटी ने सभी याचिकाकर्ताओं के अपने स्तर पर टेस्ट भी लिए थे। इसमें वह सभी पास भी हो गए थे और उन्हें जांच टीम से क्लीनचिट मिल चुकी थी। इसके बावजूद उन्हें बिना कोई नोटिस दिए और बिना किसी कारण एकाएक नौकरी से हटा दिया।

एचसीएस पेपरलीक को आधार बना खारिज की नियुक्तियां
एडवोकेट सिद्धू ने ट्रिब्यूनल के समक्ष दलील दी कि पुलिस और प्रशासन ने इस भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने के लिए हरियाणा सिविल सर्विस (ज्यूडीशियल) पेपर लीक को आधार बनाया है। जांच कमेटी ने एचसीएस पेपरलीक के बाद सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए सारी प्रक्रिया रद्द करने के आदेश को आधार बनाते हुए जेबीटी-टीजीटी भर्ती प्रक्रिया को भी रद्द कर दिया। जबकि, एचसीएस पेपरलीक मामले का इससे कोई लेना-देना नहीं है।

यूटी काउंसिल की दलील
मामले में यूटी की ओर से पेश हुए काउंसिल ने ट्रिब्यूनल को बताया कि सभी शिक्षकों का प्रोबेशन पीरियड बढ़ा दिया गया था। इसके बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग ने प्रशासक के आदेश के बाद पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया। इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला भी दिया, जिसके तहत विशेष परिस्थितियों में प्रशासन ऐसा फैसला ले सकता है। ट्रिब्यूनल ने यूटी काउंसिल को यह दलीलें अपने जवाब में दायर करने को कहा।

बेंच की विशेष टिप्पणी...
मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस एमएस सुल्लर ने यूटी काउंसिल से सवाल किया प्रशासन ने सभी शिक्षकों को बिना एक महीने का नोटिस दिए कैसे निकाल दिया। वह भी भारत के नागरिक हैं। उनके भी कुछ कानूनी अधिकार हैं। इस पर प्रशासन कैसे उनके कानूनी अधिकारों को अनदेखा कर सकता है।

स्टे के बाद शिक्षकों ने ली राहत की सांस
मामले की सुनवाई के लिए सुबह से ही शिक्षक ट्रिब्यूनल पहुंचने शुरू हो गए थे। जैसे-जैसे शिक्षकों को स्कूलों से टर्मिनेशन के लेटर मिलने शुरू हुए वैसे-वैसे वह कैट पहुंचने लगे। दोपहर तक वह तीन सौ के करीब शिक्षक जमा हो गए। करीब दो बजे कैट से मामले में स्टे लगा तो इसकी सूचना मिलते ही सभी शिक्षकों में खुशी की लहर छा गई। सभी बाहर सड़क पर आकर जमा हो गए।

यह है मामला
यूटी शिक्षा विभाग में वर्ष 2015 में 1150 जेबीटी और टीजीटी की भर्ती की गई थी। इसके बाद पंजाब विजिलेंस जांच में सामने आया था कि भर्ती के लिए लिखित परीक्षा से तीन दिन पहले ही पेपर परीक्षार्थियों के हाथों में था। इसके लिए दलालों ने परीक्षार्थियों से सात-सात लाख रुपये लिए थे। पंजाब विजिलेंस की पूछताछ में आरोपी दिनेश यादव ने कबूला था कि टीचर भर्ती घोटाले में धांधली हुई है। इसके बाद पंजाब विजिलेंस ने एक रिपोर्ट बनाकर यूटी प्रशासन और पुलिस को भेजी थी और मामले की छानबीन करने को कहा था। शिक्षक भर्ती घोटाले के सामने आने पर यूटी पुलिस ने एसआईटी गठित की थी।


इसका नेतृत्व एसपी रवि कुमार को दिया गया था। यूटी पुलिस ने 29 जुलाई 2016 को इस मामले में केस दर्ज किया था। एसआईटी ने सबसे पहले पंजाब विजिलेंस से गिरफ्तार किए गए आरोपी दिनेश कुमार यादव और प्रदीप लोचन को प्रोडक्शन वारंट पर लाकर उसका चार दिन का रिमांड लिया था। इसके बाद पुलिस टीम ने सह आरोपी सोनीपत निवासी बृजेंद्र नैन को भिवानी से गिरफ्तार किया था। इसके बाद एसआईटी ने कई अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें कई सरकारी स्कूलों में टीचर भी शामिल हैं। 17 मई को पंजाब पुलिस ने तेलंगाना पुलिस के साथ मिलकर संजय श्रीवास्तव उर्फ मिथिलेश पांडे और शिव बहादुर को गिरफ्तार किया था।
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