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FIR से हट सकता है जाति का कॉलम, हाईकोर्ट ने पंजाब को दिया नोटिस

Mon, 17 Apr 2017 10:24 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 17 Apr 2017 10:24 PM IST
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Caste column can be removed from FIR
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
एफआईआर दर्ज करते हुए आरोपी की जाति लिखे जाने को जातिवाद बढ़ाने वाला करार देते हुए इस पर रोक लगाए जाने के लिए जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ को 25 मई के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है। एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने याचिका में कहा है कि जब हमारा संविधान जातिवाद मुक्त और सभी धर्मों को बराबर का दर्जा देने वाला है, तो फिर एफआईआर में आरोपी और पीड़ित की जाति क्यों दर्ज की जाती है। 
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पंजाब पुलिस रूल्स-1934 के नियमों में एफआईआर दर्ज करते समय आरोपी और पीड़ित की जाति लिखे जाने का प्रावधान है। अरोड़ा ने कहा कि यह प्रावधान संविधान से पहले के हैं। अब यह न सिर्फ असंवैधानिक है बल्कि संविधान की मूल भावना का भी उल्लंघन है।  अरोड़ा ने बताया कि बीते साल सितंबर माह में शिमला हाईकोर्ट ने भी पुलिस रूल्स के तहत विभिन्न फॉर्म्स में से जाति के कॉलम को खत्म करने के निर्देश दिए थे।
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ऐसे में हरियाणा, पंजाब और यूटी में भी यह व्यवस्था समाप्त करने की अपील की गई। इसके साथ ही अदालत से आग्रह किया है कि एफआईआर में आरोपी और पीड़ित की जाति न लिखे जाने के निर्देश दें। 
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हाईकोर्ट ने पूछा, अपने नाम के साथ जाति क्यों लिखी

Caste column can be removed from FIR
highcourt
हाईकोर्ट ने इस याचिका में उठाए गए मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए कहा कि गुरुओं ने भी हमें जाति प्रथा के खिलाफ ही शिक्षा दी है। सुनवाई के दौरान दिलचस्प बात यह हुई कि हाईकोर्ट ने याची एडवोकेट अरोड़ा से ही पूछ लिया कि अगर आप जातिप्रथा के खिलाफ हो तो अपने नाम के पीछे अपनी जाति क्यों लिखते हो। इस पर अरोड़ा ने कहा कि वह हाईकोर्ट के इस सुझाव पर गंभीरता से गौर करेंगे।

जेल में 68 फीसदी हिंदू :
अरोड़ा ने नेशनल क्राइम ब्यूरो के प्रिजन स्टेटिस्टिक्स-2000 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि जेल में 68.9 प्रतिशत हिंदू, 17.7 प्रतिशत मुस्लिम और बाकी कैदी अन्य धर्मों के मानने वाले हैं। इसी तरह 30 प्रतिशत ओबीसी, 35 प्रतिशत सामान्य और 21.9 प्रतिशत कैदी अनुसूचित जाति वर्ग के हैं। अरोड़ा ने कहा कि यह आंकड़े भी इसी जातिवादी भावना के कारण ही तैयार किए गए हैं। 
 
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