पंजाब के गांवों में सिख ज्यादा, शहरों में हिन्दू, जानिए कितने?
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जनगणना 2001 के आंकड़ों के अनुसार पंजाब की अधिकतर आबादी गांवों में बसती है। वहीं, सिखों की आबादी गांवों में, जबकि हिंदुओं की शहरों में अधिक है। मुस्लिम, ईसाई और बुद्ध समुदाय की जनसंख्या गांवों जबकि जैन आबादी शहरों में ज्यादा है। पंजाब की कुल 27743338 जनसंख्या में से 17344192 गांवों और 10399146 शहरों में है।
सिखों की आबादी गांवों में 12348455 और शहरों में 3656299 है। हिंदू जनसंख्या शहरों में 6282072 जबकि गांवों में 4396066 है। इसी प्रकार मुस्लिम गांवों में 278825 और शहरों में 256664 हैं। ईसाइयों की संख्या गांवों में 242977 और शहरों में 105253 है।
बुद्ध धर्म से संबंधित आबादी गांवों में 23577 और शहरों में 9660 जबकि जैन आबादी शहरों में 40674 व गांवों में 4366 है। मुसलमानों की सर्वाधिक जनसंख्या उत्तर प्रदेश (3.85 करोड़), उसके बाद पश्चिम बंगाल (2.47 करोड़), तीसरे नंबर पर बिहार (1.76 करोड़) और चौथे नंबर पर असम (1.07 करोड़) में है।
धर्म आधारित जनगणना रिपोर्ट पर सवाल उठ रहे हैं
उल्लेखनीय है कि जनगणना का कार्य पूरा होने के बाद देश के कई सियासी दल जाति आधारित जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग कर रहे थे।
60 साल में मुस्लिमों की हिस्सेदारी करीब 4.5 फीसदी बढ़ी। आजादी के बाद 1951 में हुई पहली जनगणना के मुताबिक कुल आबादी में मुस्लिमों की हिस्सेदारी 9.8 फीसदी जबकि हिंदुओं की हिस्सेदारी 84.1 फीसदी थी। इन 60 सालों में कुल आबादी में मुस्लिमों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है वहीं हिंदुओं की घटी है।
वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक कुल आबादी में मुस्लिमों की हिस्सेदारी 1951 के मुकाबले करीब 4.5 फीसदी बढ़कर 14.2 फीसदी हो गई है। वर्ष 2001 में यह आंकड़ा 13.8 फीसदी था। इन 60 सालों में हिंदुओं की हिस्सेदारी 4.3 फीसदी घटी है।
बिहार चुनाव को देखते हुए जारी की रिपोर्ट
जनगणना 2011 के धर्म आधारित आंकड़े पूर्व की यूपीए सरकार के कार्यकाल में ही तैयार हो गए थे, लेकिन तत्कालीन मनमोहन सरकार ने लोकसभा चुनाव को देखते हुए इसे जारी नहीं किया। सामान्य तौर पर जनगणना के तीन साल के भीतर धर्म आधारित आंकड़े जारी कर दिए जाते हैं।
इस तरह मार्च 2014 तक इन आंकड़ों को जारी कर दिया जाना चाहिए था। लेकिन मनमोहन के बाद केंद्र में आई मोदी सरकार ने भी इसे दबाए रखा। मोदी सरकार के लिए बेहद अहम माने जा रहे बिहार विधानसभा चुनाव से पहले इन आंकड़ों को जारी किया गया है।
भारत में तेज गति से बढ़ रही मुस्लिमों की आबादी
वर्ष 1947 से पहले एक ही देश रहे भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में मुस्लिमों की आबादी बढ़ने की रफ्तार में भारी अंतर है। आमतौर पर कहा जाता है कि तेज गति से आबादी बढ़ने का कारण गरीबी और पिछड़ापन है। गरीबी और पिछडे़पन के कई मानकों पर भारत की तुलना में पाकिस्तान और बांग्लादेश पीछे हैं लेकिन वहां आबादी बढ़ने की रफ्तार हमसे काफी कम है।
वर्ष 2001 से 2011 के बीच पाकिस्तान में मुस्लिमों की आबादी करीब 20 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी, वहीं बांग्लादेश में तो यह आंकड़ा करीब 14 फीसदी था। इस दौरान भारत में मुस्लिम समुदाय की आबादी बढ़ने की रफ्तार 24.6 फीसदी रही।