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Chandigarh News: कोविड नियमों के उल्लंघन मामलों में केस वापस लेने के पक्ष में नहीं हरियाणा सरकार

Sat, 30 Mar 2024 01:23 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 30 Mar 2024 01:23 AM IST
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Cases registered during Covid will not be returned
-हरियाणा पुलिस के आईजीपी हाईकोर्ट में कहा, केस वापस लिए तो लोगों के बीच गलत संदेश जाएगा
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-भविष्य में किसी आपदा या महामारी में नहीं होगा नियमों का पालन

-प्रदेश में कुल 943133 मामले विचाराधीन, कोरोना के केवल 996

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। कोविड-19 के प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वालों पर दर्ज मामलों को वापस लेने से लोगों के बीच गलत संदेश जाएगा और भविष्य में ऐसी महामारी आने पर लोग नियमों का पालन नहीं करेंगे, ऐसे में सरकार इसके पक्ष में नहीं है। हरियाणा पुलिस के आईजीपी (अपराध) कुलविंदर सिंह ने यह जानकारी हाईकोर्ट में दी है। माननीयों पर लंबित आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा लिए गए संज्ञान मामले में हरियाणा पुलिस के आईजीपी (अपराध) कुलविंदर सिंह ने हलफनामा दाखिल करते हुए सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि सरकार चाहती है कि हाईकोर्ट इन मामलों की संक्षिप्त कार्यवाही का आदेश दे ताकि इनका शीघ्रता से निर्णय लिया जा सके। प्रदेश में 15 मार्च 2020 से 28 फरवरी, 2022 के बीच कोरोना नियमों के उल्लंघन के 996 मामले विचाराधीन हैं, 10 मामलों की जांच चल रही है, 986 मामले ट्रायल कोर्ट के समक्ष लंबित हैं। हाईकोर्ट ने 9 फरवरी को कोविड-19 उल्लंघन के सभी मामलों की हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ की अदातलों में सुनवाई पर रोक लगा दी थी और तीनों को ऐसे लंबित मामलों की संख्या का ब्योरा सौंपने का आदेश दिया था। हरियाणा सरकार ने बताया कि प्रदेश की अदालतों में कुल लंबित मामलों की संख्या 943133 है। यदि इसकी तुलना कोरोना नियमों के उल्लंघन के मामलों से की जाए तो यह बहुत कम है। 996 मामले फिलहाल लंबित हैं और इनका निपटारा करने के लिए सीआरपीसी की धारा 260 के तहत सारांश कार्यवाही का आदेश दिया जा सकता है।


यह था 9 फरवरी का आदेश

हाईकोर्ट ने आदेश में कहा था कि कोरोना महामारी मानवता के लिए बहुत बड़ी चुनौती थी और इसे रोकने के लिए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लगाया गया था। लॉकडाउन के दौरान सरकार की ओर से कुछ बंदिशें लगाई गई थी और बड़े पैमाने पर इनका पालन भी किया गया लेकिन आकस्मिक स्थिति में कुछ लोगों को भोजन, दवा व अन्य आवश्यक चीजों के लिए अपने घरों से बाहर भी निकलना पड़ा। अब वो दौर निकल चुका है और ऐसे में इस दौरान कोरोना के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ केस वापिस लेने पर विचार किया जा सकता है।
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