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Chandigarh: उपभोक्ता आयोग में केसों के निपटारे की डेडलाइन पांच माह... लग रहे दो साल, अब तीसरी फोरम की अपील
Mon, 22 Jul 2024 02:47 PM IST
निवेदिता वर्मा
मोहित पांडेय, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित पांडेय, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 22 Jul 2024 02:47 PM IST
सार
उपभोक्ता आयोग का गठन साल 1989 में हुआ। बीते 36 सालों में एक लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया जा चुका है। 95 प्रतिशत दर के साथ मामलों का निपटारा करने के साथ देश में चंडीगढ़ पहले स्थान पर बना हुआ है।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उपभोक्ता आयोग में हर माह 238 व हर दिन करीब 12 की औसत से मामले दर्ज किए जा रहे है। देश में चंडीगढ़ एक मात्र ऐसा शहर है, जहां 91 प्रतिशत दर की औसत की उपभोक्ता मामले दर्ज करवा रहे हैं।
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उपभोक्ता आयोग का गठन साल 1989 में हुआ। वहीं, बीते 36 सालों में एक लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया जा चुका है। 95 प्रतिशत दर के साथ मामलों का निपटारा करने के साथ देश में चंडीगढ़ पहले स्थान पर बना हुआ है। नए एक्ट के तहत मामलों का समय से निपटारा करने के लिए राज्य उपभोक्ता आयोग की ओर से उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय को तीसरे फोरम की मंजूरी के लिए आवदेन दिया गया है।
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मामले का निपटारा होने में लग रहा दो साल का समय
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अनुसार उपभोक्ता आयोग में मामलों को निपटारा कम से कम तीन माह और अधिक से अधिक पांच महीने में होना चाहिए। वर्तमान समय में अधितकर मामलों का निवारण होने में दो साल का समय लग रहा है। केस के सात चरण होने के चलते विभिन्न तरीखें हो जाती है, जिसके चलते अधिक समय लग रहा है।
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इसके साथ नए अधिनियम में बुजुर्ग और दिव्यांग को प्रथामिकता देने के बात कहीं गई है। उपभोक्ता मामलों के जानकार व वकील पंकज चांदगोठिया ने बताया बीते दो सालों में आयोग में केस की संख्या में बढ़ोतरी हुई। पहले उपभोक्ता को शिकायत वहां करनी पड़ती थी, जहां विपक्षी पार्टी हो या कार्य हुआ हो। पर अब नए एक्ट में उपभोक्ता को उसके गृह क्षेत्र से केस लड़ने का अधिकार दिया गया है।
साल 1997 में हुआ था दूसरे जिला उपभोक्ता आयोग का गठन
चंडीगढ़ देश में एक मात्र ऐसा जिला है, जहां दो जिला उपभोक्ता आयोग है। शहर में राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग और जिला उपभोक्ता आयोग का गठन साल 1989 में किया गया था। केसों की संख्या को देखते हुए साल 1997 में जिला विवाद निवारण फोरम दो का निर्माण किया गया था। साल 2002 में सेक्टर -17 से उपभोक्ता आयोग को प्लॉट नंबर-5बी, सेक्टर-19बी में आयोग स्थानांतरण कर दिया गया।
उपभोक्ता आयोग में ऐसे खुद भी लड़ सकते है अपना केस
एक सादे कागज पर निर्धारित वाद शुल्क के साथ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दाखिल कर सकते है। इसके लिए दोनों पक्षों में से किसी एक का शहर से संबंध होना जरूरी है। उदाहरण स्वरूप जिस कंपनी के खिलाफ शिकायत देनी है। उसकी पॉलिसी नियम व शर्तों की कॉपी, कंपनी को भेजी गई मेल या लीगल नोटिस की कॉपी, शिकायत के लिए प्रमाण पत्र, कैश मेमो, रसीद की कॉपी, बिल, गारंटी या वारंटी कार्ड की तीन कॉपी फाइल कवर के साथ, विपक्षी को भेजने के लिए बिना फाइल कवर के बिना पूरी फाइल आयोग को देनी होगी। फोरम के पक्ष में पोस्टल ऑर्डर या डिमांड ड्राफ्ट के जरिये वाद शुल्क जमा होगा।
आर्थिक रूप से तय होगी फीस
- 5 लाख रुपये तक कोई फीस नहीं
- 5 लाख से 10 लाख तक के लिए 200 रुपये
- 10 लाख से 20 लाख रुपये तक के लिए 400 रुपये
- 20 लाख से 50 लाख तक के लिए 1000 रुपये
- 50 लाख से 1 करोड़ तक के लिए 2000 रुपये
- 1 करोड़ से दो करोड़ रुपये तक के लिए 2500 रुपये
- दो करोड़ से चार करोड़ रुपये तक के लिए 3000 रुपये
- चार करोड़ से छह करोड़ रुपये तक के लिए 4000 रुपये
-छ करोड़ से आठ करोड़ रुपये तक के लिए 5000 रुपये
-आठ करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक के लिए 5000 रुपये
- दस करोड़ से अधिक के लिए 7500 रुपये
मामला नंबर -1
ईपीएफओ के खिलाफ शिकायत की सुनवाई में लगा 27 महीने का समय
रोपड़ जिला निवासी सुरजन सिंह ने जिला उपभोक्ता आयोग में नौकरी छोड़ने के बावजूद पूरे पैसे न मिलने की शिकायत मार्च 2022 में दी थी। शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग को दी शिकायत में बताया था कि उसने परिवारिक समस्या के चलते साल 2011 में कंपनी से इस्तीफा दिया। नौकरी से इस्तीफा देने के साथ पेशन लाभ व ईपीएफओ की ओर से मिलने वाली सुविधाओं के लिए सारे दस्तावेज कंपनी में जमा करवाए थे। इसके बाद साल 2021 में ईपीएफओ के दफ्तर से जानकारी मिली की सारे दस्तावेज गुम हो चुके है। मामले की सुनवाई करते हुए उपभोक्ता आयोग ने ईपीएफओ को सेवा में कोताही बरतने का आरोपी करार देते हुए शिकायतकर्ता को 15 हजार रुपये मानसिक उत्पीड़न के लिए देने के आदेश दिया था। मामले की सुनवाई पर फैसला जुलाई 2024 में आया, जिसमें 34 माह का समय लगा।
मामला नंबर -2
बैंक के हेल्पलाइन पर शिकायत की तो खाते से कटे 2.98 लाख... 34 माह का समय लगा
सेक्टर-19 निवासी हरबंस सिंह ने बैंक से करीब 3 लाख रुपये पेंशन लोन लिया था। खाते में पैसे चेक करने के लिए उन्होंने एटीएम से पांच सौ रुपये निकाले पर खाते से पैसे कट गए। पर एटीएम से नहीं निकले। इसके शिकायत देने के लिए जब पंजाब नेशनल बैंक के हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया था साइबर ठग के हाथ लग गए। साइबर ठग ने एटीएम कार्ड, बैंक पास बुक अन्य नंबर पर मांग कर। ओटीपी के जरिए 2.98 लाख रुपये ठग लिए थे। घटना की शिकायत उपभोक्ता आयोग को सितंबर 2021 को दी गई मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने ओटीपी शेयर किए उसकी गलती के चलते पैसे खाते से कटे हैं। इसलिए मुआवजा नहीं दिया जा सकता। मामले पर सुनवाई फैसला जुलाई 2024 में आया, जिसमें 34 माह का समय लगा।