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हरियाणाः राइस मिलर्स के घपलों पर सरकार ने कसा शिंकजा, 97 के खिलाफ केस दर्ज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 29 Jun 2018 09:45 AM IST
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हरियाणा के विभिन्न जिलों में नब्बे से अधिक राइस मिलर्स ऐसे हैं, जिन्होंने सरकार का लगभग 300 करोड़ का चावल दबा रखा है। इसी बकाये की वसूली को लेकर गंभीर हुई सरकार ने अब इन राइर्स मिलरों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। यह खेल वर्ष 2013-14 के समय से चल रहा है। सरकार कई बार इन राइस मिलर्स को बकाया वसूली के बाबत नोटिस दे चुकी है।
लेकिन न तो इन राइस मिलरों का कोई जवाब मिल रहा है और न ही कई का अता-पता चल रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार इस घपले को अंजाम देने के लिए कुछ राइस मिलें तो फर्जी ढंग से तैयार की गई। उनके मालिक भी फर्जी थे, जिन्होंने कुछ सरकारी कर्मियों के साथ मिलीभगत कर इस घपले को अंजाम दिया।
इसी को लेकर सख्त हुई हरियाणा सरकार अब विभिन्न जिलों में 97 राइस मिलरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी है। पिछले दिनों सरकार ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को भी ऐसे मामलों को मॉनिटर करते हुए सरकार का चावल व बकाया दबाकर रखने वाले राइस मिलरों के खिलाफ केस दर्ज करने के निर्देश थे। इन्हीं निर्देशों के चलते अब प्रदेशभर के विभिन्न जिलों में इन राइस मिलरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का सिलसिला शुरू हो गया है।
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विगत दिवस अंबाला के नारायणगढ़ में भी पांच राइस मिलरों के खिलाफ भी इसी कड़ी में मुकद्में दर्ज किए गए। उन पर भी सरकारी चावल न लौटने की एवज में लगभग 8 करोड़ रुपये बकाया है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि विभिन्न जिलों में दर्ज की गई इन 97 एफआाईआर में सरकारी कर्मियों की मिलीभगत भी सामने आ रही है। इनकी भूमिका भी घपलेबाजी में रही है।
राइस मिलरों ने ऐसे की घपलेबाजी
सरकारी एजेंसियां मंडियों से धान खरीदकर उन्हें राइस मिलरों को देती है। ताकि वे धान का चावल बनाकर सरकार को वापस लौटाएं। इस काम के लिए राइस मिलरों को बाकायदा पेमेंट की जाती है। इस प्रक्रिया को कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) कहा जाता है। हरियाणा में वर्ष 2013-14 से सरकारी एजेंसियों ने राइस मिलरों को जितनी धान चावल में कन्वर्ट करने को दी, उसके मुकाबले इन राइस मिलरों ने सरकार को चावल वापस नहीं लौटा।
राइस मिलरों ने जितना चावल लौटाना था, उसकी बजाए कम मात्रा में सरकार को चावल लौटाया। सरकार के अनुसार 97 राइस मिलरों ने 300 करोड़ का चावल सरकार को वापस नहीं लौटाया।
उधर, हरियाणा खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले राज्य मंत्री कर्णदेव कंबोज ने कहा कि बकाये की वसूली के लिए सरकार ने स्पेशल टास्क फोर्स गठित कर दी है। उनके अनुसार अभी भी इन राइस मिलरों से 19 हजार मीट्रिक टन चावल वसूला जाना है। उन्होंने कहा कि ऐसे राइस मिलरों को बख्शा नहीं जाएगा।
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लेकिन न तो इन राइस मिलरों का कोई जवाब मिल रहा है और न ही कई का अता-पता चल रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार इस घपले को अंजाम देने के लिए कुछ राइस मिलें तो फर्जी ढंग से तैयार की गई। उनके मालिक भी फर्जी थे, जिन्होंने कुछ सरकारी कर्मियों के साथ मिलीभगत कर इस घपले को अंजाम दिया।
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इसी को लेकर सख्त हुई हरियाणा सरकार अब विभिन्न जिलों में 97 राइस मिलरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी है। पिछले दिनों सरकार ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को भी ऐसे मामलों को मॉनिटर करते हुए सरकार का चावल व बकाया दबाकर रखने वाले राइस मिलरों के खिलाफ केस दर्ज करने के निर्देश थे। इन्हीं निर्देशों के चलते अब प्रदेशभर के विभिन्न जिलों में इन राइस मिलरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का सिलसिला शुरू हो गया है।
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विगत दिवस अंबाला के नारायणगढ़ में भी पांच राइस मिलरों के खिलाफ भी इसी कड़ी में मुकद्में दर्ज किए गए। उन पर भी सरकारी चावल न लौटने की एवज में लगभग 8 करोड़ रुपये बकाया है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि विभिन्न जिलों में दर्ज की गई इन 97 एफआाईआर में सरकारी कर्मियों की मिलीभगत भी सामने आ रही है। इनकी भूमिका भी घपलेबाजी में रही है।
राइस मिलरों ने ऐसे की घपलेबाजी
सरकारी एजेंसियां मंडियों से धान खरीदकर उन्हें राइस मिलरों को देती है। ताकि वे धान का चावल बनाकर सरकार को वापस लौटाएं। इस काम के लिए राइस मिलरों को बाकायदा पेमेंट की जाती है। इस प्रक्रिया को कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) कहा जाता है। हरियाणा में वर्ष 2013-14 से सरकारी एजेंसियों ने राइस मिलरों को जितनी धान चावल में कन्वर्ट करने को दी, उसके मुकाबले इन राइस मिलरों ने सरकार को चावल वापस नहीं लौटा।
राइस मिलरों ने जितना चावल लौटाना था, उसकी बजाए कम मात्रा में सरकार को चावल लौटाया। सरकार के अनुसार 97 राइस मिलरों ने 300 करोड़ का चावल सरकार को वापस नहीं लौटाया।
उधर, हरियाणा खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले राज्य मंत्री कर्णदेव कंबोज ने कहा कि बकाये की वसूली के लिए सरकार ने स्पेशल टास्क फोर्स गठित कर दी है। उनके अनुसार अभी भी इन राइस मिलरों से 19 हजार मीट्रिक टन चावल वसूला जाना है। उन्होंने कहा कि ऐसे राइस मिलरों को बख्शा नहीं जाएगा।