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सेक्टर-37 में कोठी कब्जाने का मामला : आरोपी सौरव गुप्ता ने दायर की अग्रिम जमानत याचिका
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चंडीगढ़। सेक्टर-37 में करोड़ों की कोठी कब्जाने के मामले में मंगलवार को पुलिस ने पंजाब व चंडीगढ़ के बड़े शराब कारोबारी और इस मामले के आरोपी अरविंद सिंगला के सेक्टर-40 स्थित दफ्तर में दबिश दी, लेकिन वह नहीं मिला। इस दौरान पुलिस ने उसके कर्मचारियों और रिश्तेदारों से भी पूछताछ की लेकिन सिंगला का कोई सुराग नहीं मिला। उधर, मामले के एक अन्य आरोपी आरोपी सौरव गुप्ता ने मंगलवार को जिला अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर कर दी।
याचिका में सौरव ने कहा है कि वह आरोपी नहीं बल्कि पीड़ित है। उसे कोठी विवाद के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। अगर उसे विवाद के बारे में जानकारी होती तो वह इस कोठी पर अपने 3 करोड़ रुपये निवेश नहीं करता। उसने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसे इंसाफ दिलाने की बजाय उल्टा उसके खिलाफ ही केस दर्ज कर दिया। आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पर जिला अदालत ने चंडीगढ़ पुलिस को 19 मार्च के लिए नोटिस जारी कर दिया है।
उधर, पुलिस की ओर से गठित विशेष टीम ने वर्ष 2017 में एस्टेट ऑफिस में असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर के पद पर तैनात रहे एचसीएस मनोज खत्री, उनके तत्कालीन निजी सचिव राजिंदर मल्होत्रा और एक डीलिंग क्लर्क और सेक्टर-39 के थाने के तत्कालीन एएसआई परमिंदर सिंह को समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया है। बुधवार को इन सभी से पूछताछ होगी। जांच टीम को एस्टेट ऑफिस के अफसरों पर फाइलों में गड़बड़ी करने और एएसआई पर साजिश में शामिल होने का शक है। अब पूछताछ के बाद ही खुलासा हो सकेगा कि सेक्टर-37 में कोठी कब्जाने के मामले में इनकी क्या भूमिका थी। इसके अलावा एसआईटी की जांच में राजदीप सिंह के दो बैंक खाते सामने आए हैं। टीम अब विभाग राजदीप के पैन कार्ड की जानकारियां हासिल कर उसके प्रॉपर्टी अन्य खातों की जांच करने में जुटी हुई है।
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यह है मामला
बता दें कि बीते 2 मार्च को पुलिस ने सेक्टर-37 स्थित कोठी नंबर 340 को कब्जाने और मालिक को अगवा कर प्रताड़ना देने के मामले में 9 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इनमें से पत्रकार संजीव महाजन, डीएसपी रामगोपाल का भाई सतपाल डागर और आरोपी सौरव गुप्ता का भाई प्रॉपर्टी डीलर मनीष गुप्ता गिरफ्तार हो चुके हैं जबकि अन्य आरोपी शराब कारोबारी अरविंद सिंगला, खलिंदर सिंह कादियान, सौरव गुप्ता, अशोक अरोड़ा शेखर और दलजीत सिंह फरार चल रहे हैं। वहीं, मामले में इंस्पेक्टर राजदीप सिंह की भी गिरफ्तारी हुई है। गिरफ्तार हुए चारों आरोपियों को अब जेल भेजा जा चुका है। साथ ही पुलिस नकली राहुल मेहता की भी तलाश में है।
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याचिका में सौरव ने कहा है कि वह आरोपी नहीं बल्कि पीड़ित है। उसे कोठी विवाद के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। अगर उसे विवाद के बारे में जानकारी होती तो वह इस कोठी पर अपने 3 करोड़ रुपये निवेश नहीं करता। उसने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसे इंसाफ दिलाने की बजाय उल्टा उसके खिलाफ ही केस दर्ज कर दिया। आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पर जिला अदालत ने चंडीगढ़ पुलिस को 19 मार्च के लिए नोटिस जारी कर दिया है।
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उधर, पुलिस की ओर से गठित विशेष टीम ने वर्ष 2017 में एस्टेट ऑफिस में असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर के पद पर तैनात रहे एचसीएस मनोज खत्री, उनके तत्कालीन निजी सचिव राजिंदर मल्होत्रा और एक डीलिंग क्लर्क और सेक्टर-39 के थाने के तत्कालीन एएसआई परमिंदर सिंह को समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया है। बुधवार को इन सभी से पूछताछ होगी। जांच टीम को एस्टेट ऑफिस के अफसरों पर फाइलों में गड़बड़ी करने और एएसआई पर साजिश में शामिल होने का शक है। अब पूछताछ के बाद ही खुलासा हो सकेगा कि सेक्टर-37 में कोठी कब्जाने के मामले में इनकी क्या भूमिका थी। इसके अलावा एसआईटी की जांच में राजदीप सिंह के दो बैंक खाते सामने आए हैं। टीम अब विभाग राजदीप के पैन कार्ड की जानकारियां हासिल कर उसके प्रॉपर्टी अन्य खातों की जांच करने में जुटी हुई है।
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यह है मामला
बता दें कि बीते 2 मार्च को पुलिस ने सेक्टर-37 स्थित कोठी नंबर 340 को कब्जाने और मालिक को अगवा कर प्रताड़ना देने के मामले में 9 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इनमें से पत्रकार संजीव महाजन, डीएसपी रामगोपाल का भाई सतपाल डागर और आरोपी सौरव गुप्ता का भाई प्रॉपर्टी डीलर मनीष गुप्ता गिरफ्तार हो चुके हैं जबकि अन्य आरोपी शराब कारोबारी अरविंद सिंगला, खलिंदर सिंह कादियान, सौरव गुप्ता, अशोक अरोड़ा शेखर और दलजीत सिंह फरार चल रहे हैं। वहीं, मामले में इंस्पेक्टर राजदीप सिंह की भी गिरफ्तारी हुई है। गिरफ्तार हुए चारों आरोपियों को अब जेल भेजा जा चुका है। साथ ही पुलिस नकली राहुल मेहता की भी तलाश में है।