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Punjab: पंजाब में पिछले साल का रिकॉर्ड टूटा, 11 हजार से ज्यादा हुए गेहूं की नाड़ जलाने के मामले
Wed, 22 May 2024 02:27 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 22 May 2024 02:27 PM IST
सार
पंजाब में सेटेलाइट के जरिये एक अप्रैल से 31 मई तक गेहूं की नाड़ जलाने के मामलों पर नजर रखी जा रही है । शुरुआत में नाड़ जलाने के कम मामले रिपोर्ट हो रहे थे, लेकिन अब इसमें लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
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पंजाब में जलाई जा रही गेहूं की नाड़
- फोटो : संवाद
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विस्तार
सरकार के दावों के विपरीत पंजाब में गेहूं की नाड़ जलाने के मामले बीते साल का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 11031 के आंकड़े पर पहुंच गए हैं। जबकि 2023 में अब तक नाड़ जलाने के 10940 मामले रिपोर्ट हुए थे।
मामले बढ़ने के कारण पंजाब के साथ-साथ दिल्ली की हवा भी दूषित हो रही है। एसक्यूआई का स्तर बढ़ने से पंजाब के अधिकतर शहरों में पहले जहां एयर क्वालिटी संतोषजनक श्रेणी में थी, वहां अब मध्यम व कुछेक जगहों पर खराब श्रेणी में पहुंच गई है। हालांकि पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (पीपीसीबी) दावा कर रहा है कि जिन खेतों में नाड़ जलाई जा रही है। जल्द ही कानून के मुताबिक संबंधित खेत मालिकों के खिलाफ जुर्माने किए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर केस भी दर्ज होंगे।
पंजाब में सेटेलाइट के जरिये एक अप्रैल से 31 मई तक गेहूं की नाड़ जलाने के मामलों पर नजर रखी जा रही है । शुरुआत में नाड़ जलाने के कम मामले रिपोर्ट हो रहे थे, लेकिन अब इसमें लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। यहां तक कि पिछले कुछ दिनों से साल 2023 के मुकाबले नाड़ जलाने के मामले रोजाना ज्यादा सामने आ रहे हैं। 16 मई को 143, 17 मई को 683, 18 को 1144, 19 को 597, 20 को 107 मामले सामने आए हैं।
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आंकड़ों के मुताबिक 20 मई तक नाड़ जलाने के 11031 मामले रिपोर्ट हो चुके हैं, जबकि साल 2023 में इस समय तक 10940 मामले सामने आए थे। इनमें 1282 मामलों के साथ गुरदासपुर सबसे आगे चल रहा है, जबकि अमृतसर में 966, तरनतारन में 941, फिरोजपुर में 885, लुधियाना में 730, मोगा में 721, बठिंडा में 620, संगरूर में 560, मुक्तसर में 484, पटियाला में 480. कपूरथला में 455, फाजिल्का में 436, जालंधर में 360, मानसा में 307, फरीदकोट में 303, पठानकोट में 132, मालेरकोटला में 121 मामले सामने आए हैं। नाड़ जलाने के मामलों में वृद्धि के चलते मंडी गोबिंदगढ़ का एक्यूआई स्तर 271 व दिल्ली का 239 पहुंच गया है, जो खराब श्रेणी में है। हालांकि पंजाब के बाकी प्रमुख शहरों अमृतसर, खन्ना, पटियाला, जालंधर, लुधियाना व बठिंडा का एक्यूआई मध्यम श्रेणी में है, लेकिन डाक्टरों के मुताबिक मध्यम श्रेणी का एक्यूआई भी पहले से सांस की बीमारी, दमा व फेफड़ों की बीमारी वाले मरीजों के लिए सही नहीं है। अमृतसर का एक्यूआई 151, बठिंडा का 110, जालंधर का 136, खन्ना का 127, लुधियाना का 177, पटियाला का 142 दर्ज किया गया है।
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मामले बढ़ने के कारण पंजाब के साथ-साथ दिल्ली की हवा भी दूषित हो रही है। एसक्यूआई का स्तर बढ़ने से पंजाब के अधिकतर शहरों में पहले जहां एयर क्वालिटी संतोषजनक श्रेणी में थी, वहां अब मध्यम व कुछेक जगहों पर खराब श्रेणी में पहुंच गई है। हालांकि पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (पीपीसीबी) दावा कर रहा है कि जिन खेतों में नाड़ जलाई जा रही है। जल्द ही कानून के मुताबिक संबंधित खेत मालिकों के खिलाफ जुर्माने किए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर केस भी दर्ज होंगे।
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पंजाब में सेटेलाइट के जरिये एक अप्रैल से 31 मई तक गेहूं की नाड़ जलाने के मामलों पर नजर रखी जा रही है । शुरुआत में नाड़ जलाने के कम मामले रिपोर्ट हो रहे थे, लेकिन अब इसमें लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। यहां तक कि पिछले कुछ दिनों से साल 2023 के मुकाबले नाड़ जलाने के मामले रोजाना ज्यादा सामने आ रहे हैं। 16 मई को 143, 17 मई को 683, 18 को 1144, 19 को 597, 20 को 107 मामले सामने आए हैं।
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आंकड़ों के मुताबिक 20 मई तक नाड़ जलाने के 11031 मामले रिपोर्ट हो चुके हैं, जबकि साल 2023 में इस समय तक 10940 मामले सामने आए थे। इनमें 1282 मामलों के साथ गुरदासपुर सबसे आगे चल रहा है, जबकि अमृतसर में 966, तरनतारन में 941, फिरोजपुर में 885, लुधियाना में 730, मोगा में 721, बठिंडा में 620, संगरूर में 560, मुक्तसर में 484, पटियाला में 480. कपूरथला में 455, फाजिल्का में 436, जालंधर में 360, मानसा में 307, फरीदकोट में 303, पठानकोट में 132, मालेरकोटला में 121 मामले सामने आए हैं। नाड़ जलाने के मामलों में वृद्धि के चलते मंडी गोबिंदगढ़ का एक्यूआई स्तर 271 व दिल्ली का 239 पहुंच गया है, जो खराब श्रेणी में है। हालांकि पंजाब के बाकी प्रमुख शहरों अमृतसर, खन्ना, पटियाला, जालंधर, लुधियाना व बठिंडा का एक्यूआई मध्यम श्रेणी में है, लेकिन डाक्टरों के मुताबिक मध्यम श्रेणी का एक्यूआई भी पहले से सांस की बीमारी, दमा व फेफड़ों की बीमारी वाले मरीजों के लिए सही नहीं है। अमृतसर का एक्यूआई 151, बठिंडा का 110, जालंधर का 136, खन्ना का 127, लुधियाना का 177, पटियाला का 142 दर्ज किया गया है।