Punjab election 2022: निर्दलीय व आप प्रत्याशी ने दिया झूठा हलफनामा, भगोड़ा घोषित होने की बात छिपाई, अब मुकदमा हुआ दर्ज
चुनाव आयोग के निर्देश पर सनौर से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी हरमीत सिंह पठानमाजरा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उन पर झूठा हलफनामा दाखिल करने का आरोप है।
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पंजाब विधानसभा चुनाव में हिस्सा ले रहे दो प्रत्याशियों के खिलाफ नामांकन पत्र में भगोड़े होने संबंधी जानकारी छिपाने के कारण एफआईआर दर्ज की गई है। यह जानकारी शुक्रवार को पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. एस. करुणा राजू ने दी। डॉ. राजू ने बताया कि पटियाला के सनौर विधानसभा हलके से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी हरमीत सिंह पठानमाजरा उर्फ हरमीत सिंह ढिल्लों निवासी पठानमाजरा जिला पटियाला पर बरनाला में आईपीसी की धारा 174 के तहत दर्ज एफआईआर में 2 जुलाई 2019 को कोर्ट की ओर से भगोड़ा करार दिए संबंधी शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में फॉर्म-ए (एफिडेविट) में झूठी जानकारी देने संबंधी आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी हरमीत सिंह पठानमाजरा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।
उन्होंने बताया कि इस शिकायत की जांच जिला निर्वाचन अधिकारी पटियाला और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पटियाला ने अपने-अपने स्तर पर की और शिकायत को सही पाया। इसके बाद हरमीत सिंह निवासी पठानमाजरा के खिलाफ थाना जुलकां में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950, 1951, 1989 की धारा 125ए और आईपीसी की धारा 193, 199 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने आगे बताया कि विधानसभा हलका मालेरकोटला से आजाद उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे मोहम्मद शकील की ओर से दायर नामांकन पत्र में भगोड़ा होने संबंधी जानकारी छिपाई गई है। मोहम्मद शकील के खिलाफ पुलिस थाना शहरी-2 मालेरकोटला में 30 अप्रैल 2007 को एफआईआर नंबर 32 आईपीसी की धारा 307, 326, 120बी और 34 के तहत केस दर्ज हुआ था। इस मामले में मोहम्मद शकील निवासी मोहल्ला सादेवाल को अधिकृत अदालत ने 13 दिसंबर 2019 को भगोड़ा करार दिया था।
हो सकती है 3 से 7 साल की सजा व जुर्माना
डॉ. राजू ने बताया कि इस मामले में मोहम्मद शकील के खिलाफ आईपीसी की धारा 193,199 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950, 1951, 1989 की धारा 125ए के तहत मामला दर्ज करते हुए गिरफ्तार कर लिया गया है। सीईओ ने बताया कि इस मामले में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950, 1951, 1989 की धारा 125ए के तहत 3 माह की सजा या जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं। इसके अलावा आईपीसी की धारा 193, 199 के अंतर्गत 3 से 7 साल की सजा और जुर्माना भी हो सकता है।