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लाहौर के गुरुद्वारे को मस्जिद में बदलने की कोशिश, कैप्टन बोले- बेहद निंदनीय, सुनिश्चित हो सुरक्षा
Tue, 28 Jul 2020 01:03 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 28 Jul 2020 01:03 PM IST
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कैप्टन अमरिंदर सिंह
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लाहौर के नौलखा बाजार स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा ‘शहीदी स्थान’ को मस्जिद में बदलने की कोशिश पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस कोशिश की निंदा की और इसे गलत बताया। उन्होंने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से गुजारिश की कि वे पाकिस्तान तक पंजाब सरकार की प्रतिक्रिया पहुंचा दें और उनसे कहें कि वे पाकिस्तान में सिख संबंधी सभी धार्मिक स्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
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Strongly condemn attempts being made to convert holy Gurdwara Sri Shahidi Asthan in Lahore, site of martyrdom of Bhai Taru Singh Ji, into mosque. Urge @DrSJaishankar to convey Punjab's concerns in strongest terms to Pakistan to safeguard all Sikh places of reverence.विज्ञापन— Capt.Amarinder Singh (@capt_amarinder) July 28, 2020
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भारत ने कड़े शब्दों में आपत्ति दर्ज कराई
बता दें कि भारतीय विदेश मंत्रालय ने सोमवार को दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग में इस बारे में कड़े शब्दों में आपत्ति दर्ज कराई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने बताया, नौलखा बाजार स्थित भाई तरु सिंह के शहादत स्थल गुरुद्वारा शहीदी स्थान को पाकिस्तान मस्जिद शहीद गंज बताने की कोशिश कर रहा है। उस इमारत को मस्जिद में बदलने की कोशिश की जा रही है।
श्रीवास्तव ने बताया कि इस बारे में पाकिस्तानी उच्चायोग के समक्ष विरोध दर्ज कराया गया है। भारत ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि पाकिस्तान इस मामले की जांच करके उचित कार्रवाई करे। पाकिस्तान को अल्पसंख्यकों, उनके धार्मिक अधिकारों, संस्कृति और धर्मस्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है।
1745 में हुई थी शहादत
इसी ऐतिहासिक गुरुद्वारे में 1745 में भाई तरु सिंह की शहादत हुई। अमृतसर में 1720 के आसपास जन्मे भाई तरु सिंह की इस्लाम धर्म न स्वीकार करने पर इसी जगह हत्या कर दी गई थी। सिख धर्म के अनुयायियों के लिए यह बेहद पवित्र और आस्था का स्थान है।
श्रीवास्तव ने बताया कि इस बारे में पाकिस्तानी उच्चायोग के समक्ष विरोध दर्ज कराया गया है। भारत ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि पाकिस्तान इस मामले की जांच करके उचित कार्रवाई करे। पाकिस्तान को अल्पसंख्यकों, उनके धार्मिक अधिकारों, संस्कृति और धर्मस्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है।
1745 में हुई थी शहादत
इसी ऐतिहासिक गुरुद्वारे में 1745 में भाई तरु सिंह की शहादत हुई। अमृतसर में 1720 के आसपास जन्मे भाई तरु सिंह की इस्लाम धर्म न स्वीकार करने पर इसी जगह हत्या कर दी गई थी। सिख धर्म के अनुयायियों के लिए यह बेहद पवित्र और आस्था का स्थान है।