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कैप्टन की पीएम मोदी से मांग, बोले- मनोहर परिकर रक्षा मंत्री के लायक नहीं

Sat, 29 Oct 2016 04:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 29 Oct 2016 04:51 PM IST
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Captain amarinder singh demands to dismiss defense minister parrikar
रक्षामंत्री को बर्खास्त करने की मांग - फोटो : File Photo
पंजाब प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि मनोहर परिकर जैसा व्यक्ति रक्षा मंत्रालय जैसे अहम विभाग के लायक नहीं है। उनको तुरंत अनौपचारिक तरीके से हटा देना चाहिए।
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रक्षा मंत्रालय की विवादास्पद सेना की रैंक प्रणाली पर प्रतिक्रिया जताते हुए कैप्टन ने कहा कि इससे रक्षा सेनाओं के बीच बड़े स्तर पर नाराजगी पैदा हो गई है। इससे रक्षा और सिविल के बीच असमानता पैदा हो गई है। मंत्रालय का अपने आदेशों पर बने रहने का फैसला देश की रक्षा सेनाओं के लिए बड़े झटके के रूप में सामने आया है, जो परिकर द्वारा नोटिफिकेशन वापस लेने की उम्मीद लगाए बैठी थीं।
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कैप्टन ने कहा कि परिकर रक्षा सेनाओं के साथ खेल रहे हैं, उनका मनोबल गिरा रहे हैं। उन्होंने यह भी सोचने की कोशिश नहीं की कि इससे देश की सुरक्षा और एकता को खतरा हो सकता है। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी से अपील की कि हालात हाथ से निकलने से पहले उन पर काबू पाने को तुरंत दखल दें।
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कैप्टन बोले, नई रैंकिंग व्यवस्था वापस न लेने पर होंगे गंभीर नतीजे

Captain amarinder singh demands to dismiss defense minister parrikar
पंजाब प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : File Photo
कैप्टन ने कहा कि जिस तरह से परिकर रक्षा सेनाओं के साथ बर्ताव कर रहे हैं, उन्होंने शर्मिंदगी की सारी हदें पार कर दी हैं। एक तरफ सरकार सर्जिकल स्ट्राइक के लिए सेना की प्रशंसा करती है। दूसरी तरफ, रक्षा मंत्रालय जानबूझ कर सेना का मनोबल गिरा रहा है।

एक असैनिक प्रिंसिपल डायरेक्टर को मेजर जनरल, डायरेक्टर को ब्रिगेडियर और ज्वाइंट डायरेक्टर को कर्नल के बराबर जगह देना सेना के अधिकारियों का दर्जा सिविल अधिकारियों से घटाने के समान है। अगर सरकार अफसरशाही को फायदा देना चाहती है तो सेना का मनोबल गिराने के बजाय कोई दूसरा रास्ता ढूंढ सकती थी। कैप्टन ने कहा कि हैरानी की बात है कि भाजपा के तीन सांसद पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह, कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर और कर्नल सोना राम सेना से हैं।

इसके बावजूद वे सेना के साथ हो रहे अन्याय पर चुप हैं। उन्हें या तो सेना का पक्ष लेना चाहिए या अपने पद छोड़ देने चाहिए। कैप्टन ने इस ममले में रक्षा मंत्रालय के तर्क कि यह सिर्फ ड्यूटियों और कामकाजी जिम्मेदारियां तय करने का मामला है, को बेतुका बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रधानमत्री तुरंत परिकर के खिलाफ कार्रवाई में विफल रहे तो उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। सेनाओं की नाराजगी नियंत्रण से बाहर हो गई तो मोदी उसे काबू नहीं कर पाएंगे।
 
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