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चंडीगढ़ः मेयर पद के लिए चुनाव के मैदान में 5 दावेदार, भाजपा के चार और कांग्रेस का एकमात्र
Mon, 24 Dec 2018 03:48 PM IST
खुशबू गोयल
नीरज कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
नीरज कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 24 Dec 2018 03:48 PM IST
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चंडीगढ़ के मेयर पद के लिए पांच दावेदार हैं। इनमें चार भाजपा और एक कांग्रेस से शामिल है। भाजपा को इस साल खासी मशक्कत करनी होगी। मेयर का चुनाव 18 जनवरी को है। मेयर का कार्यकाल 9 जनवरी को समाप्त हो रहा है। इसके लिए 14 जनवरी को नामांकन होगा, लेकिन चुनाव तिथि बढ़ने से लॉबिंग के लिए समय मिल गया है। दिल्ली तक के नेताओं तक पहुंच बनाने के लिए काफी लंबा वक्त अब मिल गया है। अगला मेयर अनुसूचित जाति से संबंधित होगा। भाजपा में अनुसूचित जाति से संबंधित चार पार्षद सतीश कैंथ, भरत कुमार, राजेश कालिया और फरमिला हैं। वहीं, कांग्रेस की एकमात्र पार्षद शीला देवी हैं। बता दें कि इस बार मेयर पद एससी के लिए आरक्षित है।
यह है समीकरण
नगर निगम में चुने पार्षदों की संख्या 26 है, जिसमें भाजपा के ही 20 पार्षद हैं। इसके अलावा कांग्रेस के चार पार्षद शामिल हैं। वहीं, एक निर्दलीय और एक पार्षद शिरोमणि अकाली दल से है। भाजपा मेयर पद के दावेदारों ने गतिविधियां तेज कर दी हैं। चुनाव की तिथि आगे बढ़ने से संजय टंडन विरोधी खेमे में खुशी है। जानकारों का कहना है कि संसद का सत्र 8 जनवरी को समाप्त हो रहा है, इसलिए 8 जनवरी के बाद भाजपा के केंद्रीय नेताओं और राष्ट्रीय अध्यक्ष से बात हो सकती है। जीत के लिए 26 पार्षदों की कुल संख्या में से 14 पार्षदों के मत की जरूरत होगी। भाजपा की संख्या 20 है, इसलिए मेयर के अलावा सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर भाजपा का ही होगा, लेकिन चारों दावेदारों में से कौन होगा यह पता अभी चलना मुश्किल है।
साफ-सुथरी छवि को तरजीह
इस साल लोकसभा का आम चुनाव है। भाजपा आम चुनाव से पहले चंडीगढ़ का मेयर चुनाव बेहद संजीदगी से लड़ना चाहेगी। मेयर प्रत्याशी के चुनाव में यह ध्यान रखा जाएगा कि वह साफ-सुथरी छवि का हो। इन चारों दावेदारों में से जो भी खरा उतरेगा, उसका पलड़ा भारी रहेगा।
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यह है समीकरण
नगर निगम में चुने पार्षदों की संख्या 26 है, जिसमें भाजपा के ही 20 पार्षद हैं। इसके अलावा कांग्रेस के चार पार्षद शामिल हैं। वहीं, एक निर्दलीय और एक पार्षद शिरोमणि अकाली दल से है। भाजपा मेयर पद के दावेदारों ने गतिविधियां तेज कर दी हैं। चुनाव की तिथि आगे बढ़ने से संजय टंडन विरोधी खेमे में खुशी है। जानकारों का कहना है कि संसद का सत्र 8 जनवरी को समाप्त हो रहा है, इसलिए 8 जनवरी के बाद भाजपा के केंद्रीय नेताओं और राष्ट्रीय अध्यक्ष से बात हो सकती है। जीत के लिए 26 पार्षदों की कुल संख्या में से 14 पार्षदों के मत की जरूरत होगी। भाजपा की संख्या 20 है, इसलिए मेयर के अलावा सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर भाजपा का ही होगा, लेकिन चारों दावेदारों में से कौन होगा यह पता अभी चलना मुश्किल है।
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साफ-सुथरी छवि को तरजीह
इस साल लोकसभा का आम चुनाव है। भाजपा आम चुनाव से पहले चंडीगढ़ का मेयर चुनाव बेहद संजीदगी से लड़ना चाहेगी। मेयर प्रत्याशी के चुनाव में यह ध्यान रखा जाएगा कि वह साफ-सुथरी छवि का हो। इन चारों दावेदारों में से जो भी खरा उतरेगा, उसका पलड़ा भारी रहेगा।
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दौड़ में ये हैं शामिल
फरमिला
मेयर पद की रेस में शामिल भाजपा पार्षद फरमिला निगम सदन की बैठक में बहुत की कम बोलती हैं। पहली बार पार्षद बनी हैं। पार्टी में मेयर पद हासिल करने के लिए गतिविधियां बढ़ा दी हैं।
भरत कुमार...
भाजपा पार्षद भरत कुमार पहली बार पार्षद चुने गए हैं। वे पार्षद चुनाव में कांग्रेस के हैवीवेट कैंडिडेट कमलेश को भारी मतों से पराजित किया था। संघ के करीबी समझे जाते हैं। सदन की बैठक में शांत रहकर अपनी बात रखते हैं। कई बार अधिकारियों के साथ गर्मा गर्मी भी हो चुकी है।
सतीश कैंथ....
पार्षद सतीश कैंथ को सदन का काफी अनुभव है। वे दूसरी बार पार्षद बने हैं। दो बार डिप्टी मेयर रह चुके हैं। सदन में वे जब भी बैठक के लिए आते हैं तो पूरा होमवर्क कर के आते हैं। पहली बार वे कांग्रेस की टिकट से पार्षद बने, लेकिन 2015 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। कैंथ के मुताबिक पार्टी नेताओं से मिलना-जुलना लॉबिंग नहीं है।
राजेश कालिया...
पार्षद राजेश कालिया सार्वजनिक मंचों पर अपनी बात बेबाकी से रखने में माहिर हैं। डोर-टु-डोर गारबेज कलेक्टरों के मुद्दों पर नगर निगम के अंदर और बाहर जोरदार तरीके से अपनी बात रखी। वे भी पहली बार जीतकर पार्षद बने हैं। दिल्ली तक इनकी पहुंच हैं।
शीला देवी
पार्षद शीला देवी कांग्रेसी पार्षद हैं। वे शांत रहकर अपना काम करना और अधिकारियों से करवाना जानती हैं। सदन के अंदर भी शांत रहकर अपने वार्ड के लिए एजेंडा पास करवाना उनकी खासियत है। वरिष्ठ पार्षद हैं, लेकिन कांग्रेस पार्षदों की संख्या मात्र चार हैं।
मेयर पद की रेस में शामिल भाजपा पार्षद फरमिला निगम सदन की बैठक में बहुत की कम बोलती हैं। पहली बार पार्षद बनी हैं। पार्टी में मेयर पद हासिल करने के लिए गतिविधियां बढ़ा दी हैं।
भरत कुमार...
भाजपा पार्षद भरत कुमार पहली बार पार्षद चुने गए हैं। वे पार्षद चुनाव में कांग्रेस के हैवीवेट कैंडिडेट कमलेश को भारी मतों से पराजित किया था। संघ के करीबी समझे जाते हैं। सदन की बैठक में शांत रहकर अपनी बात रखते हैं। कई बार अधिकारियों के साथ गर्मा गर्मी भी हो चुकी है।
सतीश कैंथ....
पार्षद सतीश कैंथ को सदन का काफी अनुभव है। वे दूसरी बार पार्षद बने हैं। दो बार डिप्टी मेयर रह चुके हैं। सदन में वे जब भी बैठक के लिए आते हैं तो पूरा होमवर्क कर के आते हैं। पहली बार वे कांग्रेस की टिकट से पार्षद बने, लेकिन 2015 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। कैंथ के मुताबिक पार्टी नेताओं से मिलना-जुलना लॉबिंग नहीं है।
राजेश कालिया...
पार्षद राजेश कालिया सार्वजनिक मंचों पर अपनी बात बेबाकी से रखने में माहिर हैं। डोर-टु-डोर गारबेज कलेक्टरों के मुद्दों पर नगर निगम के अंदर और बाहर जोरदार तरीके से अपनी बात रखी। वे भी पहली बार जीतकर पार्षद बने हैं। दिल्ली तक इनकी पहुंच हैं।
शीला देवी
पार्षद शीला देवी कांग्रेसी पार्षद हैं। वे शांत रहकर अपना काम करना और अधिकारियों से करवाना जानती हैं। सदन के अंदर भी शांत रहकर अपने वार्ड के लिए एजेंडा पास करवाना उनकी खासियत है। वरिष्ठ पार्षद हैं, लेकिन कांग्रेस पार्षदों की संख्या मात्र चार हैं।