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स्कूल टीचर की अंतिम अरदास में परिजनों ने पेश किया अनोखा उदाहरण
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना(पंजाब)
Updated Fri, 15 Jul 2016 11:36 AM IST
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लेडी टीचर की अंतिम अरदास में कैंसर जागरुकता कार्यक्रम
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब के लुधियाना में एक स्कूल टीचर की अंतिम अरदास में उसके परिजनों ने अनोखा उदाहरण पेश किया। टीचर की मौत कैंसर से हुई थी, इसलिए अंतिम अरदास में उसके परिजनों ने कैंसर विशेषज्ञ बुलाकर मौजूद लोगों को कैंसर से बचने के टिप्स दिलाए। मृतक महिला का नाम 40 वर्षीय अविनाश कौर बताया जा रहा है। एक साल तक कैंसर से लड़ते हुए महिला की मौत हो गई थी। टिप्स देने के लिए कैंसर स्पेशलिस्ट डा. दविंदर सिंह संधू को विशेष तौर पर बुलाया गया।
अपने संबोधन में डा. संधू ने बताया कि अविनाश कौर जब उनके अस्पताल में आई थी तो उसका कैंसर अंतिम स्टेज पर था। लेकिन सब कुछ जानते हुए भी वह अंतिम सांस तक जिंदा दिल बनी रही। उन्होंने बताया कि यह शायद पहली बार है कि जब सभी लोग एक कम उम्र में प्राण त्यागने वाली महिला की मौत पर शोक जता रहे हों, वहां उसी बीमारी से बचने की जानकारी देने के लिए कहा गया हो।
उन्होंने कहा कि पंजाब में कैंसर शराब के कारण भी हो रहा है। तंबाकू और मोटापा भी कैंसर का कारण बनता है। अगर लोग फल व सलाद इत्यादि खाने पर ज्यादा ध्यान दें तो कैंसर होने की संभावनाओं को कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि देश की आजादी के समय औसत उम्र 40 साल हुआ करती थी, लेकिन आज साइंस की तरक्की और बीमारियों का इलाज उपलब्ध होने के कारण यह उम्र 70 साल तक पहुंच गई है। अमेरिका में औसत उम्र 90 साल है, लेकिन वहां कैंसर का प्रतिशत भी भारत से दस गुणा है।
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अविनाश कौर के जेठ अजयदीप सिंह ने कहा कि वह खुद कैन कैंसर फाइट नामक एनजीओ से जुड़े हैं। इसी कारण उन्होंने अंतिम अरदास में आने वाले लोगों को कैंसर से जागरूक करने के लिए डा. दविंदर संधू से आग्रह किया था। ताकि लोग इस बीमारी से बच सकें। अजयदीप ने कहा कि अविनाश कौर अपने पीछे पति एवं एक बारह साल का बेटा छोड़ गए हैं। उनके यूरिन ब्लैडर में कैंसर था। कैंसर का पता चलने के बाद भी वे जीवन में हमेशा ही साकारात्मक रहीं। यहां तक कि लोगों को भी कैंसर के प्रति जागरूक करती रहीं।
वे जागरूकता का काम करके लोगों में मिसाल बनना चाहती थी। परिवार को मलाल है कि वे उनकी इच्छा के मुलाबिक उनके अंग दान नहीं कर सके, क्योंकि बीमारी के कारण उनके अंगों में इंफैक्षन फैल चुका था। अवेयरनेस के लिए ही एनजीओ की ओर से 17 जुलाई को शिवालिक स्कूल में अविनाश कौर को समर्पित ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन किया जाएगा। सीनियर अकाली नेता व पार्षद तनवीर सिंह धालीवाल व परमजीत कौर ने भी अविनाश कौर को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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अपने संबोधन में डा. संधू ने बताया कि अविनाश कौर जब उनके अस्पताल में आई थी तो उसका कैंसर अंतिम स्टेज पर था। लेकिन सब कुछ जानते हुए भी वह अंतिम सांस तक जिंदा दिल बनी रही। उन्होंने बताया कि यह शायद पहली बार है कि जब सभी लोग एक कम उम्र में प्राण त्यागने वाली महिला की मौत पर शोक जता रहे हों, वहां उसी बीमारी से बचने की जानकारी देने के लिए कहा गया हो।
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उन्होंने कहा कि पंजाब में कैंसर शराब के कारण भी हो रहा है। तंबाकू और मोटापा भी कैंसर का कारण बनता है। अगर लोग फल व सलाद इत्यादि खाने पर ज्यादा ध्यान दें तो कैंसर होने की संभावनाओं को कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि देश की आजादी के समय औसत उम्र 40 साल हुआ करती थी, लेकिन आज साइंस की तरक्की और बीमारियों का इलाज उपलब्ध होने के कारण यह उम्र 70 साल तक पहुंच गई है। अमेरिका में औसत उम्र 90 साल है, लेकिन वहां कैंसर का प्रतिशत भी भारत से दस गुणा है।
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अविनाश कौर के जेठ अजयदीप सिंह ने कहा कि वह खुद कैन कैंसर फाइट नामक एनजीओ से जुड़े हैं। इसी कारण उन्होंने अंतिम अरदास में आने वाले लोगों को कैंसर से जागरूक करने के लिए डा. दविंदर संधू से आग्रह किया था। ताकि लोग इस बीमारी से बच सकें। अजयदीप ने कहा कि अविनाश कौर अपने पीछे पति एवं एक बारह साल का बेटा छोड़ गए हैं। उनके यूरिन ब्लैडर में कैंसर था। कैंसर का पता चलने के बाद भी वे जीवन में हमेशा ही साकारात्मक रहीं। यहां तक कि लोगों को भी कैंसर के प्रति जागरूक करती रहीं।
वे जागरूकता का काम करके लोगों में मिसाल बनना चाहती थी। परिवार को मलाल है कि वे उनकी इच्छा के मुलाबिक उनके अंग दान नहीं कर सके, क्योंकि बीमारी के कारण उनके अंगों में इंफैक्षन फैल चुका था। अवेयरनेस के लिए ही एनजीओ की ओर से 17 जुलाई को शिवालिक स्कूल में अविनाश कौर को समर्पित ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन किया जाएगा। सीनियर अकाली नेता व पार्षद तनवीर सिंह धालीवाल व परमजीत कौर ने भी अविनाश कौर को श्रद्धांजलि अर्पित की।