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Chandigarh: कनाडा में स्टडी वीजा व पीआर के नियम सख्त, वीरान हुए कॉलेज कैंपस, लौटने लगे स्टूडेंट्स

Thu, 01 Aug 2024 07:27 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Thu, 01 Aug 2024 07:27 PM IST
सार

एक दशक से पंजाब से कनाडा जाने वाले विद्यार्थियों की लंबी कतार थी, जिसका फायदा देखकर यहां के नामचीन एजेंटों ने कनाडा में अपना हेडक्वार्टर बना लिया। वहां पर बड़े कॉलेजों से संपर्क कर उनके कैंपस शहरों में खोलकर पंजाब से स्टूडेंट्स को भेजना शुरू कर दिया। हालात ऐसे बने कि इन कैंपस संचालकों की चांदी होने लगी। 

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Canada has strict rules for study visa and PR, students have started returning
कनाडा से लौट रहे भारत के छात्र - फोटो : फाइल

विस्तार

कनाडा की ट्रूडो सरकार ने पढ़ाई करने के लिए विदेश से आने वाले विद्यार्थियों के लिए नियमों में बदलाव करने के साथ ही कॉलेजों पर भी सख्ती शुरू कर दी है। पिछले सालों के मुकाबले 35 फीसदी विद्यार्थियों की कटौती की गई है। वहीं, कई निजी कॉलेजों की ओर से कैंपस खोलकर चलाए जा रहे खेल पर भी डंडा चला दिया है। इस कार्रवाई से वहां कॉलेजों के कैंपस वीरान होने लगे हैं। बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स पंजाब लौटने लगे हैं।

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खास बात यह है कि पंजाब के कई नामी लोगों ने कनाडा में कॉलेजों के कैंपस खोलकर धंधा चलाया हुआ था। नए नियमों के मुताबिक अब कैंपस कॉलेज से पढ़ने वाले विद्यार्थियों को वर्क परमिट नहीं मिल पाएगा। कनाडा ने विदेश से आने वाले विद्यार्थियों के लिए स्टूडेंट वीजा की संख्या को घटाकर 3.60 लाख कर दिया है। यह पिछले साल के मुकाबले 35 फीसदी कम है। 
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कनाडा में विदेश से आकर पढ़ने वालों में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा में है। फिलहाल 2.3 लाख भारतीय विद्यार्थी कनाडा में पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन आगे जाने वालों की संख्या में 80 फीसदी से अधिक गिरावट आने वाली है।
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जालंधर में कपूरथला चौक के पास के एजेंट ने एक बड़े कॉलेज का कैंपस बना दिया और उसकी सीटें बेचकर अरबों रुपये के वारे न्यारे किए। इसी तरह पंजाब के करीब चार दर्जन एजेंटों ने कनाडा में जाकर कैंपस खोले और वहां जमकर चांदी कूटी, लेकिन अब नए नियमों के मुताबिक इन संचालकों के कैंपस में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को वर्क परमिट नहीं मिलेगा। ऐसे में यह कैंपस वीरान होने लगे हैं।

निययों में बदलाव

विदेशी विद्यार्थियों की उन्हीं स्पाउस यानी जीवनसाथी को ओपन वर्क परमिट दिया जाएगा, जो मास्टर्स या डॉक्टरेट प्रोग्राम कर रहे हैं। ग्रेजुएट या कॉलेज के छात्रों के स्पाउस के लिए ओपन वर्क परमिट नहीं होगा। इससे फर्जी शादियों पर नकेल कसी गई है।
-स्टूडेंट वर्क परमिट के लिए एक नए दस्तावेज की जरूरत होगी, जो अटेस्ट किया जाने वाला लेटर है। यह कनाडाई प्रांत की ओर से जारी किया जाता है, जिसमें आवेदन करने वाले को ठहरने की मंजूरी दी गई होती है।
-कनाडा में प्रांत सरकार का अधिकार होगा कि किस कॉलेज को कितनी सीटें आवंटित करनी हैं। यह सीटें उसके आधारभूत ढांचे और अंदर बने हॉस्टल पर निर्भर होंगी। आगे कनाडा की फेडरल ट्रूडो सरकार ही फैसले लेती थी।
-कनाडा में एलओआई (लेटर ऑफ इंटेंट) के साथ ही दाखिला मिलता था, लेकिन अब पीएएल प्रोविंसनल अटेस्टेशन लेटर से दाखिला मिलेगा। अगर यह लेटर नहीं लगता है, तो आगे वर्क परमिट नहीं मिलेगा।
-जीआईसी पहले 10 हजार कनाडाई डॉलर थी, जिसको बढ़ाकर अब 20 हजार डॉलर कर दिया गया है।

कनाडा पंजाबियों की पहली पसंद

विदेश में पढ़ाई करने की इच्छा रखने वाले भारतीय विद्यार्थियों के लिए कनाडा हमेशा पहली पसंद रहा है। विदेश मंत्रालय के डेटा के मुताबिक, हर साल औसतन 1.5 लाख विद्यार्थी कनाडा गए। इसके बाद अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात जाने वाले विद्यार्थियों की तादाद रही। यूके और ऑस्ट्रेलिया जाने वालों की संख्या क्रमशः 50 हजार और 90 हजार के करीब रही। 

2013 से 2022 तक कनाडा में पढ़ाई करने वाले भारतीय विद्यार्थियों की संख्या में 260 फीसदी का इजाफा हुआ है। लंबे समय से इमिग्रेशन में अपनी पहचान बनाने वाले ईएसएस ग्लोबल के मैनेजर रवनीत सिंह का कहना है कि हालिया समय में नाटकीय बदलाव दिख रहे हैं। कनाडाई अध्ययन वीजा आवेदनों की संख्या काफी कम हो गई है। कनाडा में स्पाउस वीजा बंद होने से भारतीय विद्यार्थियों की संख्या में गिरावट आई है। कनाडा में महंगाई के अलावा जीआईसी 20 हजार डॉलर होने का असर हुआ है।

नौकरी नहीं, घर भी महंगे

त्रिवेदी ओवरसीज के सुकांत का कहना है कि कनाडा की जस्टिन ट्रूडो की सरकार ने पोस्ट-ग्रेजुएट वर्क परमिट (पीजीडब्ल्यूपी) पर जो फैसला लिया है, उसने अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों, विशेषकर भारतीयों को निराश किया है। कनाडा से जिस तरह की खबरें आ रही हैं, वहां पर नौकरी नहीं है, घर महंगे हो रहे हैं। बैंक ब्याज बढ़ गए हैं। कनाडा में अपराध बढ़ता जा रहा है। इससे अभिभावकों में चिंता होना स्वभाविक है। 

इस साल जनवरी और फरवरी में कनाडाई सरकार की ओर से भारतीय विद्यार्थियों को लगभग 45 हजार अध्ययन परमिट दिए गए थे। मार्च 2024 में यह संख्या घटकर 4,210 रह गई, जबकि जून में यह 39 हजार के करीब थी।

कनाडा-भारत रिश्तों में तल्खी सबसे बड़ी वजह: बॉसी

कनाडा के टोरंटो के रहने वाले प्रसिद्ध लेखक जोगिंदर बॉसी का कहना है कि यहां पर कट्टरपंथी ताकतों ने भारत व कनाडा के रिश्तों को खराब किया है। यहां पर आने वाले स्टूडेंट्स को कट्टरपंथी लालच देकर अपने साथ मिलाते हैं और उनको दलदल में धकेल रहे हैं, जिससे कनाडा के हालात खराब हो रहे हैं।

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