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सरबत खालसा बुलाकर अकाल तख्त के जत्थेदार को फिर दी चुनौती
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 21 Jun 2016 11:55 PM IST
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श्री अकाल तख्त साहिब
- फोटो : amar ujala
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श्री अकाल तख्त के समानांतर जत्थेदार की ओर से दूसरा सरबत खालसा बुलाकर एक बार फिर जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह को चुनौती दी गई है। समानांतर गुट के पांचों जत्थेदारों ने आगामी 10 नवंबर को तलवंडी साबो में सरबत खालसा का आह्वान कर सिख संगत को वहां जुटने की अपील की है। वहीं एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने सरबत खालसा को सिख धर्म के सिद्धांतों के खिलाफ बताया है।
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पिछले साल भी कट्टरपंथियों ने 10 नवंबर को ही अमृतसर में सरबत खालसा बुलाया था और वह जुटे लगभग एक लाख लोगों ने श्री अकाल तख्त के जत्थेदार के खिलाफ जनादेश जारी किया था। हालांकि, उस समय शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने कट्टरपंथियों को श्री हरमंदिर साहिब परिसर स्थित गुरुद्वारा मंजी साहिब में पहुंचने की इजाजत नहीं दी थी। उसके बाद कट्टरपंथियों ने अमृतसर-तरनतारन रोड स्थित गांव चब्बा में सरबत खालसा का आयोजन किया था। इसमें वर्तमान जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह के स्थान पर पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारोपी जगतार सिंह हवारा को जत्थेदार घोषित कर दिया गया था। चूंकि, हवारा जेल में थे तो पूर्व सांसद ध्यान सिंह मंड को कार्यकारी जत्थेदार घोषित कर दिया गया था। इसके अलावा तख्त केशगढ़ साहिब और तख्त दमदमा साहिब के भी जत्थेदार मनोनीत किए गए थे।
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श्री अकाल तख्त साहिब के समानांतर कार्यकारी जत्थेदार ध्यान सिंह मंड ने कहा कि तख्त और एसजीपीसी पूरी तरह से आरएसएस व सरकारों के अधीन काम कर रही हैं। सरकार तख्त के हुक्मनामे तैयार कर रही है। सरकार और एजेंसियां सिख संगत को श्री अकाल तख्त साहिब से दूर कर रही हैं। इसे किसी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरबत खालसा की सफलता के लिए 11 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है।
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जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़, अध्यक्ष, एसजीपीसी ने बताया कि इस सरबत खालसा की कोई पवित्रता नहीं है। यह सिख धर्म के सिद्धांतों के खिलाफ है। जत्थेदारों की नियुक्ति या उन्हें पद मुक्त करने के नियम गुरुद्वारा एक्ट 1925 में स्पष्ट हैं। इस मामले में फ्रेमवर्क तैयार करने के सभी अधिकार एसजीपीसी को मिले हुए हैं।