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हरियाणा : कैग ने सरकारी उपक्रमों के वित्तीय कुप्रबंधन की खोली पोल, सरकार को करोड़ों के राजस्व की हानि

Sun, 07 Mar 2021 02:27 PM IST
ajay kumar यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 07 Mar 2021 02:27 PM IST
सार

  • अफसरों की लापरवाही से हरियाणा सरकार को करोड़ों के राजस्व की हानि हुई
  • सूची में नाम न होने के बावजूद फतेहाबाद के मिलर्स को आवंटित किया धान

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CAG Report reveals about Financial mismanagement in government undertakings in Haryana
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) ने हरियाणा के सरकारी उपक्रमों के वित्तीय कुप्रबंधन और कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है। अफसरों की लापरवाही के कारण सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा। हरियाणा कृषि उद्योग निगम ने फतेहाबाद के मिलर को सूची में नाम न होने के बावजूद धान आवंटित कर दिया, जिससे सवा करोड़ के चावल का दुरुपयोग हुआ।

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कैग ने हरियाणा राज्य सड़क एवं पुल विकास निगम, हरियाणा कृषि उद्योग निगम व हरियाणा राज्य भंडारण निगम के कामकाज को भी असंतोषजनक पाया है। शुक्रवार को हरियाणा विधानसभा के सदन पटल पर रखी गई 31 मार्च 2019 को खत्म हुए वित्तीय वर्ष की ऑडिट रिपोर्ट में कैग ने वित्तीय नुकसान से बचने के लिए अनेक सुझाव दिए हैं।
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फतेहाबाद के गैर अनुमोदित राइस मिलर्स को धान देने पर कैग ने कड़ी आपत्ति जताई है। कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जब निदेशालय ने मिलर्स की सूची में हरि ब्रदर्स राइस मिल का नाम किसी भी मंडी के लिए शामिल नहीं किया था तो उसे 2699 मीट्रिक टन धान कैसे आवंटित कर दिया। बैक गारंटी के रूप में दिया गया 50 लाख का पोस्ट डेटेड चेक भी कृषि उद्योग निगम ने भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं किया। न ही मिल का भौतिक सत्यापन किया।

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मिलर को 1808 मीट्रिक टन कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) एफसीआई को देना था, उसमें से भी 1318 मीट्रिक टन ही दिया। लगभग डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य के 480 मीट्रिक टन चावल की एफसीआई को आपूर्ति नहीं की। मामला जब पकड़ में आया तो सितंबर 2018 में किए गए भौतिक सत्यापन में मिल परिसर बंद पाया गया और धान भी उपलब्ध नहीं था।

जिला मिलिंग समिति ने मिलर्स के खिलाफ इसके लिए तुरंत एफआईआर दर्ज नहीं कराई। कृषि उद्योग निगम ने कैग को बताया है कि मिलर और गारंटरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है और मध्यस्थता की कार्रवाई भी कर रहे हैं। निगम के इस जवाब से कैग संतुष्ट नहीं हुआ।

महालेखाकार लेखापरीक्षा फैसल इमाम ने की सिफारिश 
महालेखाकार लेखापरीक्षा हरियाणा फैसल इमाम ने कस्टम मिल्ड राइस के दुरुपयोग पर अहम सिफारिश की है। उन्होंने अपनी टिप्पणी में लिखा है कि कृषि उद्योग निगम लिमिटेड को नियमित रूप से मिलों में स्टॉक का भौतिक सत्यापन करना चाहिए। साथ ही उन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करें जिन्होंने गैर अनुमोदित मिलर को धान का स्टॉक आवंटित कर दिया। इसके अलावा कृषि उद्योग निगम व राज्य भंडारण निगम अपने अधीन आने वाले केंद्रों में यह जांच कराएं कि एफसीआई से ब्याज की राशि लेने के लिए देरी से दावा करने पर कितने राजस्व की चपत लगी है। साथ इससे बचने के लिए संस्थागत तंत्र स्थापित करें।

इन वजह से भी हुई वित्तीय हानि
राज्य सड़क एवं पुल विकास निगम ने अग्रिम आयकर जमा नहीं किया और आयकर रिटर्न दाखिल करने में देरी की। इससे नौ करोड़ के ब्याज का भुगतान करना पड़ा। इससे निगम बच सकता था। निगम ने अपनी निधियों को अधिकतम ब्याज दरों पर निवेश भी नहीं किया, इससे 40 लाख रुपये के ब्याज की चपत लगी। कृषि उद्योग निगम व राज्य भंडारण निगम ने खरीफ विपणन सीजन 2017-18 के दौरान भारतीय खाद्य निगम से कस्टम मिल्ड राइस का ब्याज मांगने में देरी की, जिससे दोनों निगमों को एक करोड़ का टाला जा सकने वाला ब्याज देना पड़ा।   

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