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कैबिनेट का फैसलाः नियमित होंगी अवैध कालोनियां, एससी कर्मियों को पदोन्नति में आरक्षण बहाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 31 Jul 2018 09:41 AM IST
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कैबिनेट की मीटिंग करते हुए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
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पंजाब भर में अनियमित तरीके से हो रहे निर्माण को रोकने के लिए राज्य मंत्रिमंडल ने अवैध कालोनियों और इन कालोनियों के दायरे में आए प्लाटों/भवनों को नियमित करने की नीति को मंजूरी दे दी है। इस नीति के अंतर्गत 19 मार्च, 2018 से पहले बनी कालोनियों को शामिल किया गया है।
सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, नई नीति के तहत कोई भी डेवलपर, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन या कोआपरेटिव सोसायटी अवैध कालोनियों को नियमित करने के लिए अप्लाई कर सकते हैं। हालांकि प्लाटों के मामले में पूरी कालोनी को एक साथ नियमित करवाना जरूरी नहीं बनाया गया है। मालिक भी अपने प्लाट को नियमित करवाने के लिए सीधे तौर पर आवेदन कर सकता है।
यह नीति पंजाब न्यू कैपिटल (पेरीफेरी) कंट्रोल एक्ट-1952 के अधीन म्यूनिसिपल सीमा समेत पूरे राज्य में लागू होगी लेकिन पेरीफेरी इलाके में बाकी स्थानों पर यह नीति लागू नहीं होगी। यह नीति अपार्टमेंट वाली कालोनियों पर भी लागू नहीं होगी। इस नीति के तहत अवैध कालोनियों को नियमित करवाने के लिए चार महीने का समय दिया जाएगा। यह समयावधि समाप्त हो जाने पर संबंधित अथारिटी को अवैध कालोनियों का पता लगाने के लिए तीन महीने का समय दिया जाएगा।
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इस नीति के तहत अवैध कालोनी या प्लाट/भवन को नियमित करवाने के लिए तय समय के बाद अप्लाई किए जाने पर नियमितीकरण फीस की 20 फीसदी राशि जुर्माने के तौर पर देनी होगी। कोई भी आवेदक जो इस नीति के तहत अप्लाई करने से चूक जाता है, उसे कानून के उपबंधों के तहत जुर्माना किया जाएगा।
इस नीति के तहत कंपोजिशन चार्जेज की 25 फीसदी राशि हासिल करने के बाद कालोनाइजर के खिलाफ सिविल/आपराधिक कार्रवाई (अगर हो तो) स्थगित की जा सकती है। हालांकि इस कार्रवाई को कालोनियां नियमित होने की अंतिम प्रक्रिया मुकम्मल होने के बाद ही वापस लिया जाएगा।
कालोनियां और प्लाटों को नियमित करने के लिए फीस 20 अप्रैल, 2018 को नोटिफाई हुई पिछली नीति के मुताबिक ली जाएगी। अवैध कालोनियां/प्लाटों को नियमित करने की प्रक्रिया से एकत्र हुई राशि को इन कालोनियों के निवासियों को आधारभूत सुविधाएं मुहैया कराने पर खर्च किया जाएगा।
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सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, नई नीति के तहत कोई भी डेवलपर, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन या कोआपरेटिव सोसायटी अवैध कालोनियों को नियमित करने के लिए अप्लाई कर सकते हैं। हालांकि प्लाटों के मामले में पूरी कालोनी को एक साथ नियमित करवाना जरूरी नहीं बनाया गया है। मालिक भी अपने प्लाट को नियमित करवाने के लिए सीधे तौर पर आवेदन कर सकता है।
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यह नीति पंजाब न्यू कैपिटल (पेरीफेरी) कंट्रोल एक्ट-1952 के अधीन म्यूनिसिपल सीमा समेत पूरे राज्य में लागू होगी लेकिन पेरीफेरी इलाके में बाकी स्थानों पर यह नीति लागू नहीं होगी। यह नीति अपार्टमेंट वाली कालोनियों पर भी लागू नहीं होगी। इस नीति के तहत अवैध कालोनियों को नियमित करवाने के लिए चार महीने का समय दिया जाएगा। यह समयावधि समाप्त हो जाने पर संबंधित अथारिटी को अवैध कालोनियों का पता लगाने के लिए तीन महीने का समय दिया जाएगा।
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इस नीति के तहत अवैध कालोनी या प्लाट/भवन को नियमित करवाने के लिए तय समय के बाद अप्लाई किए जाने पर नियमितीकरण फीस की 20 फीसदी राशि जुर्माने के तौर पर देनी होगी। कोई भी आवेदक जो इस नीति के तहत अप्लाई करने से चूक जाता है, उसे कानून के उपबंधों के तहत जुर्माना किया जाएगा।
इस नीति के तहत कंपोजिशन चार्जेज की 25 फीसदी राशि हासिल करने के बाद कालोनाइजर के खिलाफ सिविल/आपराधिक कार्रवाई (अगर हो तो) स्थगित की जा सकती है। हालांकि इस कार्रवाई को कालोनियां नियमित होने की अंतिम प्रक्रिया मुकम्मल होने के बाद ही वापस लिया जाएगा।
कालोनियां और प्लाटों को नियमित करने के लिए फीस 20 अप्रैल, 2018 को नोटिफाई हुई पिछली नीति के मुताबिक ली जाएगी। अवैध कालोनियां/प्लाटों को नियमित करने की प्रक्रिया से एकत्र हुई राशि को इन कालोनियों के निवासियों को आधारभूत सुविधाएं मुहैया कराने पर खर्च किया जाएगा।
एससी कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण हुआ बहाल
पंजाब कैबिनेट की मीटिंग
पंजाब में अनुसूचित जातियों से संबंधित सरकारी मुलाजिमों को बड़ी राहत देते हुए मंत्रिमंडल ने पदोन्नति के जरिए पदों को भरने में अनुसूचित जातियों के मुलाजिमों के लिए ग्रुप ए और बी की सेवाओं में 14 प्रतिशत और ग्रुप सी और डी की सेवाओं में 20 प्रतिशत के आरक्षण का कोटा बहाल करने की मंजूरी दे दी है। यह नागराज केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर सरकार द्वारा नए सिरे से इकट्ठा किए आंकड़ों पर आधारित है।
इसके साथ ही मंत्रिमंडल ने पंजाब लोक सेवा आयोग में विभिन्न काडरों के आठ पद पुन: सृजित करने की भी मंजूरी दे दी है। इन पदों में छह क्लर्क, एक नेटवर्क इंजीनियर और एक कानूनी सहायक शामिल है। मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि सामाजिक सुरक्षा, सशक्तीकरण और अल्पसंख्यक विभाग द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी है।
इस संबंध में आर्डिनेंस के अंतिम मसौदे को मंज़ूरी देने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया है। यह आरक्षण अनुसूचित जातियों के मुलाजिमों के लिए प्रोफोरमा ओहदा उन्नति और बदली के जरिये नियुक्ति के लिए लागू होगा।
उल्लेखनीय है कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 20 फरवरी, 2018 को अमन कुमार बनाम पंजाब राज्य व अन्य पर मामले में फैसला सुनाते हुए ‘पंजाब राज्य अनुससूचित जातियों और पिछड़ी श्रेणियों (सेवाओं में आरक्षण) एक्ट -2006 ’ की धाराओं 4(3), 4(4), और 4(8) को रद्द कर दिया था। प्रवक्ता के मुताबिक पहला एक्ट गलत आंकड़ों पर आधारित था, जिसे अब सभी विभागों, सरकारी संस्थानों आदि से एकत्रित करके दुरुस्त कर दिया गया है। इन आंकड़ों का अध्ययन करने के बाद यह आरक्षण प्रस्तावित किया गया है।
इसके साथ ही मंत्रिमंडल ने पंजाब लोक सेवा आयोग में विभिन्न काडरों के आठ पद पुन: सृजित करने की भी मंजूरी दे दी है। इन पदों में छह क्लर्क, एक नेटवर्क इंजीनियर और एक कानूनी सहायक शामिल है। मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि सामाजिक सुरक्षा, सशक्तीकरण और अल्पसंख्यक विभाग द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी है।
इस संबंध में आर्डिनेंस के अंतिम मसौदे को मंज़ूरी देने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया है। यह आरक्षण अनुसूचित जातियों के मुलाजिमों के लिए प्रोफोरमा ओहदा उन्नति और बदली के जरिये नियुक्ति के लिए लागू होगा।
उल्लेखनीय है कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 20 फरवरी, 2018 को अमन कुमार बनाम पंजाब राज्य व अन्य पर मामले में फैसला सुनाते हुए ‘पंजाब राज्य अनुससूचित जातियों और पिछड़ी श्रेणियों (सेवाओं में आरक्षण) एक्ट -2006 ’ की धाराओं 4(3), 4(4), और 4(8) को रद्द कर दिया था। प्रवक्ता के मुताबिक पहला एक्ट गलत आंकड़ों पर आधारित था, जिसे अब सभी विभागों, सरकारी संस्थानों आदि से एकत्रित करके दुरुस्त कर दिया गया है। इन आंकड़ों का अध्ययन करने के बाद यह आरक्षण प्रस्तावित किया गया है।