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Chandigarh News: एसटीए घेरने निकले कैब चालकों को सेक्टर-17 में रोका, आज अधिकारियों के साथ होगी वार्ता
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चंडीगढ़। विभिन्न मांगों के संदर्भ में ट्राइसिटी के कैब चालकों ने वीरवार को सेक्टर-17 स्थित बस स्टैंड के पीछे धरना दिया। सभी कैब चालक सेक्टर-18 स्थित स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के दफ्तर को घेरने के लिए निकले थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें सेक्टर-17 में ही रोक लिया। सभी चालक सुबह 10 से दोपहर करीब दो बजे तक धरने पर बैठे रहे। इस दौरान पुलिस ने उनकी एसटीए के अधिकारियों से बात कराई। अब शुक्रवार को कैब चालकों और अधिकारियों के बीच बैठक होगी।
कैब चालकों का कहना है कि उन्होंने कई बार धरना प्रदर्शन और भूख हड़ताल की। लेकिन प्रशासन के अधिकारियों की नींद नहीं खुल रही है। उनकी मांगें जस की तस हैं। हर बार उन्हें झूठे आश्वासन ही दिए जाते हैं। उनकी न्यूनतम किराया तय करने, निजी नंबरों पर चल रही कैब टैक्सी और बाइक टैक्सी को बंद करने, अवैध रूप से चल रही कैब कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने, ट्राइसिटी में कंपनियों के दफ्तर खोलने समेत कई मांगे हैं। चालकों का कहना है कि अवैध बाइक टैक्सी की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। सिर्फ चंडीगढ़ ही नहीं बल्कि आसपास के राज्यों से भी कई लोग चंडीगढ़ आकर बाइक टैक्सी चला रहे हैं, क्योंकि यहां पर प्रशासन की कोई रोक-टोक नहीं है। नियमों के तहत सफेद नंबर प्लेट पर व्यावसायिक गतिविधि नहीं की जा सकती, लेकिन यह धंधा बेरोकटोक हो रहा है। अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं। उन्होंने कहा कि बाइक टैक्सी चालकों की वजह से कैब चालक घर बैठे हैं। उन्हें सवारियां नहीं मिल रही हैं। सभी ने आठ से 10 लाख रुपये लगाकर गाड़ी खरीदी है। टैक्स भी दिया है, लेकिन अब उनके पास सवारी नहीं हैं। ऐसे में रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है।
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कैब चालकों का कहना है कि उन्होंने कई बार धरना प्रदर्शन और भूख हड़ताल की। लेकिन प्रशासन के अधिकारियों की नींद नहीं खुल रही है। उनकी मांगें जस की तस हैं। हर बार उन्हें झूठे आश्वासन ही दिए जाते हैं। उनकी न्यूनतम किराया तय करने, निजी नंबरों पर चल रही कैब टैक्सी और बाइक टैक्सी को बंद करने, अवैध रूप से चल रही कैब कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने, ट्राइसिटी में कंपनियों के दफ्तर खोलने समेत कई मांगे हैं। चालकों का कहना है कि अवैध बाइक टैक्सी की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। सिर्फ चंडीगढ़ ही नहीं बल्कि आसपास के राज्यों से भी कई लोग चंडीगढ़ आकर बाइक टैक्सी चला रहे हैं, क्योंकि यहां पर प्रशासन की कोई रोक-टोक नहीं है। नियमों के तहत सफेद नंबर प्लेट पर व्यावसायिक गतिविधि नहीं की जा सकती, लेकिन यह धंधा बेरोकटोक हो रहा है। अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं। उन्होंने कहा कि बाइक टैक्सी चालकों की वजह से कैब चालक घर बैठे हैं। उन्हें सवारियां नहीं मिल रही हैं। सभी ने आठ से 10 लाख रुपये लगाकर गाड़ी खरीदी है। टैक्स भी दिया है, लेकिन अब उनके पास सवारी नहीं हैं। ऐसे में रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है।
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