चंडीगढ़: 5300 करोड़ मांगे थे, 5138.10 करोड़ रुपये ही मिले, 8.09 प्रतिशत की बजट में वृद्धि
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चंडीगढ़ प्रशासन को केंद्र सरकार से इस बार भी अनुमान के अनुसार बजट नहीं मिला है। वित्त वर्ष 2020-21 के लिए 5300 करोड़ रुपये बजट में मांगे गए थे, लेकिन केंद्र ने 5138.10 करोड़ ही चंडीगढ़ की झोली में डालें हैं। इसमें रेवेन्यू हेड में 4693.96 करोड़ तो कैपिटल हेड में 494.14 करोड़ मिले हैं। पिछले बार के मुकाबले 384.98 करोड़ चंडीगढ़ प्रशासन को ज्यादा मिले हैं। इसके अनुसार करीब 8.09 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
वर्ष 2019-20 के लिए चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से गृह मंत्रालय को 5218.03 करोड़ रुपये का बजट बनाकर भेजा गया था, जिसकी जगह 4753.12 करोड़ रुपये ही स्वीकृत किए गए। करीब 465 करोड़ के बजट पर कैंची चल गई। केंद्र ने यूटी के कैपिटल हेड में काफी बढ़ोतरी की है। इसका इस्तेमाल नए प्रोजेक्ट के लिए किया जाता है।
पिछली बार के मुकाबले करीब 92 करोड़ ज्यादा मिले हैं। इससे प्रशासन के अधिकारियों को आस है कि अब शहर के रुके हुए विकास कार्यों में तेजी आएगी। पिछली बार यूटी के कैपिटल हेड में केंद्र ने 100 करोड़ रुपये काट लिये थे। यूटी के रेवेन्यू हेड को भी 292.47 करोड़ रुपये ज्यादा मिले हैं। बता दें कि रेवेन्यू हेड में आने वाला पैसा ज्यादातर कर्मचारियों की सैलरी व अन्य कामों में खर्च किया जाता है।
किस विभाग को मिला कितना बजट
विभाग वर्ष 2019-20 वर्ष 2020-21
पुलिस 499.39 561.36
शिक्षा 809.37 843.73
स्वास्थ्य 513.90 522
ट्रांसपोर्ट 282.81 294.96
आवास और शहरी विकास 748.84 963.47
बिजली 958.54 962.75
गांवों के विकास के लिए 6.04 00.00
अन्य 760.41 989.83
नोट: सभी राशि करोड़ में
किस साल कितना बजट मिला
वर्ष मांग बजट मिला
2020-21 5300 करोड़ 5138.10 करोड़
2019-20 5218 करोड़ 4753.12 करोड़
2018-19 5908 करोड़ 4511.91 करोड़
2017-18 6151 करोड़ 4312.40 करोड़
2016-17 5489 करोड़ 3937.47 करोड़
2015-16 4229 करोड़ 3543 करोड़
नोट: सभी राशि करोड़ में
शिक्षा बजट में 47 करोड़ रुपये की कटौती
वर्ष 2020-21 के लिए यूटी प्रशासन को अनुमान के मुताबिक 162 करोड़ रुपये कम मिले हैं। प्रशासन ने शिक्षा के लिए 890.71 करोड़ रुपये मांगे थे, लेकिन केंद्र ने करीब 47 करोड़ रुपये की कटौती करते हुए 843.73 करोड़ रुपये दिए हैं। स्वास्थ्य के लिए यूटी ने 542 करोड़ रुपये मांगे थे, लेकिन 20 करोड़ की कटौती करते हुए 522 करोड़ रुपये दिए। इसके अलावा पुलिस विभाग के लिए यूटी ने केंद्र से 575 करोड़ रुपये मांगे थे, जिसमें से 14 करोड़ की कटौती की गई है और 561 करोड़ रुपये मिले हैं।
रिवाइज्ड बजट में मिलती है राहत
चंडीगढ़ प्रशासन को सितंबर महीने में रिवाइज्ड इस्टीमेट भेजना होता है। इसमें अतिरिक्त बजट की मांग की जा सकती है। मौजूदा वित्तीय वर्ष का रिवाइज्ड बजट 4868.99 करोड़ रुपये हो गया है, जिसमें रेवेन्यू हेड 4402.36 करोड़ और कैपिटल हेड 466.63 करोड़ रुपये है। ऐसे में वर्ष 2020-21 के लिए केंद्र की तरफ से काटे गए 162 करोड़ रुपये पाने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन के पास अभी भी रास्ते खुले हुए हैं।
पिछली बार के मुकाबले 9 प्रतिशत ज्यादा बजट चंडीगढ़ को मिला है। इसके लिए मैं केंद्र सरकार का शुक्रिया अदा करता हूं। पिछली बार के मुकाबले इस बार चंडीगढ़ को 385 करोड़ रुपये ज्यादा मिले हैं। यह एक बड़ी रकम है। इससे यह साबित होता है कि केंद्र सरकार चंडीगढ़ प्रशासन के काम से प्रभावित है। प्रशासन विभागों के काम में पारदर्शिता लाने के लिए गंभीरता से काम कर रहा है। - मनोज परिदा, एडवाइजर
चंडीगढ़ के लिए बेहतर बजट है
चंडीगढ़ के लिए इस बार का बजट काफी अच्छा रहा है। पिछली बार की अपेक्षा इस बार बजट बढ़कर मिला है। इससे नगर निगम को भी फायदा होगा। लगातार बजट की समस्या को लेकर काम प्रभावित होते थे। अब बजट बढ़ने से विकास कार्यों को भी बल मिलेगा। आम आदमी के साथ व्यापारियों के लिए भी इस बजट ने काफी सहूलियत दी है। - राजबाला मलिक, मेयर
अब निगम को ज्यादा फंड मिलने की उम्मीद
इस बार चंडीगढ़ को पिछले बजट की अपेक्षा 385 करोड़ रुपये ज्यादा मिले हैं। इससे निगम को भी अतिरिक्त बजट मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। बजट की समस्या के कारण प्रशासन से अतिरिक्त बजट लेना पड़ता है। निगम ने अपने रेवेन्यू भी बढ़ाए हैं, लेकिन इस बजट का भी लाभ निगम को मिलेगा। गांव के लिए बजट नहीं है, लेकिन प्रशासक ने गांव के विकास कार्यों के लिए भी एस्टीमेट बनाने को कहा है। वहां भी अब बेहतर विकास कर सकेंगे। - केके यादव, कमिश्नर, नगर निगम।