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बिल गेटस का जनरल बना चंडीगढ़ का लाल
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 31 Oct 2013 07:07 PM IST
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चंडीगढ़ शहर में पले बढ़े गुरदीप सिंह पाल को लंदन में माइक्रोसॉफ्ट के स्काइप के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट का पद भार संभाल लिया है। यह खबर जैसे ही सेक्टर-33 में उनके 81 वर्षीय पिता रिटायर्ड ब्रिगेडियर जीएस सिंह पाल और माता तेजेंद्र कौर को मिली तो रगों में नया जोश भर गया।
बेटा बहुत व्यस्त है
माता-पिता ने अमर उजाला को बताया कि नई पोस्टिंग की जानकारी देते समय बस एक बार ही बेटे से बात हो पायी। वह
इतना व्यस्त है कि बातचीत के लिए समय भी मुश्किल से निकलता है।
मां तेजेंद्र कौर जो की टीचर रही हैं ने कहा कि गुरदीप सिंह का अधिकतर समय ट्रैवलिंग में बीतता है। कंपनी से विशेष जेट विमान मिला है। वह दो मई को घर आया था अब दिसंबर में आने का वादा किया था लेकिन नई जिम्मेदारी मिलने के बाद अब कुछ कहा नहीं जा सकता।
सेना में भी हुआ था चयन
ब्रिगेडियर जेएस पाल ने बताया कि उनके दोनों बेटे बड़ा गुरुप्रीत और छोटा गुरदीप सिंह पढ़ाई और खेल में अव्वल रहे। दोनों ने एनडीए का टेस्ट दिया और दोनों का सेना में चयन भी हो गया। लेकिन, बाद में दोनों ने इंजीनियरिंग में कैरियर बनाने का फैसला लिया।
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बड़ा बेटा गुरप्रीत माइक्रोसॉफ्ट में डायरेक्टर ग्लोबल स्ट्रेटेजिक डेवलपमेंट के पद पर कार्यरत है। गुरदीप ने 89 में माइक्रोसॉफ्ट में नौकरी 34,000 डालर के पैके जे के साथ शुरू की थी।
गुरदीप की शुरुआती पढ़ाई विवेक हाई स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने गुरदीप और गुरप्रीत को सेक्टर-26 स्थित सेंट जोंस स्कूल में दाखिला दिला दिया। दोनों ने 1972-77 तक सेंट जोंस में पढ़ाई की।
तेजेंद्र ने बताया कि गुरदीप की मां ने काफी समय तक सेंट जोंस स्कूल में जूनियर और सीनियर कक्षाओं को पढ़ाया था।
बुआ की खीर का मुरीद
गुरदीप का बचपन सेक्टर-8 की कोठी नंबर 40 में बीता है। आजकल इस कोठी में उनकी बुआ 88 वर्षीय दर्शनजीत कौर रहती हैं।
पुराने दिनों को अमर उजाला से साझा करते हुए उन्होंने कहा कि जब भी वह वीकेंड पर गुरदीप से मिलने आती थीं तो उसकी खास पसंद की खीर और गाजर का हलवा लेकर आती थीं। कौर ने कहा कि छोटा होने के कारण उनका गुरदीप से खासा लगाव रहता था।
'स्कूल के इस छात्र ने दुनिया भर में नाम रोशन किया है। हमें अपने एल्युमनी पर गर्व है। पूरे स्कूल की तरफ से गुरदीप को ढेरों बधाई। जल्द ही हम उसे स्कूल बुलाने और सम्मानित करने के लिए चिट्ठी लिखेंगे।
- कविता दास, सेंट जोंस स्कूल सेक्टर-26 चंडीगढ़
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बेटा बहुत व्यस्त है
माता-पिता ने अमर उजाला को बताया कि नई पोस्टिंग की जानकारी देते समय बस एक बार ही बेटे से बात हो पायी। वह
इतना व्यस्त है कि बातचीत के लिए समय भी मुश्किल से निकलता है।
मां तेजेंद्र कौर जो की टीचर रही हैं ने कहा कि गुरदीप सिंह का अधिकतर समय ट्रैवलिंग में बीतता है। कंपनी से विशेष जेट विमान मिला है। वह दो मई को घर आया था अब दिसंबर में आने का वादा किया था लेकिन नई जिम्मेदारी मिलने के बाद अब कुछ कहा नहीं जा सकता।
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सेना में भी हुआ था चयन
ब्रिगेडियर जेएस पाल ने बताया कि उनके दोनों बेटे बड़ा गुरुप्रीत और छोटा गुरदीप सिंह पढ़ाई और खेल में अव्वल रहे। दोनों ने एनडीए का टेस्ट दिया और दोनों का सेना में चयन भी हो गया। लेकिन, बाद में दोनों ने इंजीनियरिंग में कैरियर बनाने का फैसला लिया।
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बड़ा बेटा गुरप्रीत माइक्रोसॉफ्ट में डायरेक्टर ग्लोबल स्ट्रेटेजिक डेवलपमेंट के पद पर कार्यरत है। गुरदीप ने 89 में माइक्रोसॉफ्ट में नौकरी 34,000 डालर के पैके जे के साथ शुरू की थी।
गुरदीप की शुरुआती पढ़ाई विवेक हाई स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने गुरदीप और गुरप्रीत को सेक्टर-26 स्थित सेंट जोंस स्कूल में दाखिला दिला दिया। दोनों ने 1972-77 तक सेंट जोंस में पढ़ाई की।
तेजेंद्र ने बताया कि गुरदीप की मां ने काफी समय तक सेंट जोंस स्कूल में जूनियर और सीनियर कक्षाओं को पढ़ाया था।
बुआ की खीर का मुरीद
गुरदीप का बचपन सेक्टर-8 की कोठी नंबर 40 में बीता है। आजकल इस कोठी में उनकी बुआ 88 वर्षीय दर्शनजीत कौर रहती हैं।
पुराने दिनों को अमर उजाला से साझा करते हुए उन्होंने कहा कि जब भी वह वीकेंड पर गुरदीप से मिलने आती थीं तो उसकी खास पसंद की खीर और गाजर का हलवा लेकर आती थीं। कौर ने कहा कि छोटा होने के कारण उनका गुरदीप से खासा लगाव रहता था।
'स्कूल के इस छात्र ने दुनिया भर में नाम रोशन किया है। हमें अपने एल्युमनी पर गर्व है। पूरे स्कूल की तरफ से गुरदीप को ढेरों बधाई। जल्द ही हम उसे स्कूल बुलाने और सम्मानित करने के लिए चिट्ठी लिखेंगे।
- कविता दास, सेंट जोंस स्कूल सेक्टर-26 चंडीगढ़