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छोटे राज्यों के बडे़ सपनों की कहानी है ‘वाट ए लूजर’
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 04 Feb 2014 03:27 PM IST
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छोटे राज्यों से कुछ बच्चे बड़े सपने लेकर दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने आते हैं, उन्हीं बच्चों के बडे़ सपनों की कहानी है ‘वाट ए लूजर’। यह कहना है लेखक पंकज दुबे ने का।
प्रेस क्लब में मुंबई से आए पंकज ने अपनी पहली किताब ‘वाट ए लूजर’ को कवयित्री निरूपमा दत्ता, हिंदी कवि माधव कौशिक और अदब फाउंडेशन की चेयरमैन मितुल दीक्षित के हाथों लॉन्च करवाया।
पंकज ने बताया की आजकल पहचान बनाना बहुत अहम हो गया है। यहीं से मुझे अपनी इस नावेल का ख्याल आया। मैंने अक्सर देखा है दिल्ली यूनिवर्सिटी में कई बच्चे अपने छोटे राज्यों को छोड़ कर पढ़ने आते हैं। उनकी आंखों में सपने होते है, कुछ बनने के। कुछ के सपने पूरे होते हैं और कु छ के नहीं। इसको ही ध्यान में रखते हुए नावेल लिखा गया है।
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अपनी किताब का संदेश हर किसी तक पहुंचाने के लिए, इसे अंग्रेजी और हिंदी में लिखा है। हिंदी किताब का नाम ‘लूजर कहीं का’ है। निरूपमा दत्ता ने बताया यह किताब एक बार पढ़ने बैठी तो उठने का मन नहीं हुआ।
माधव कौशिक ने बताया पंकज ने फिल्म में कई स्क्रीन प्ले लिखे है, जिसका अनुभव इस नावेल में दिखता है। इस किताब का मूल्य हिंदी में (लूजर कहीं का) 125 रुपये और इंग्लिश में 195 रुपये है। किताब को पेंग्विन इंडिया ने पब्लिश किया है।
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प्रेस क्लब में मुंबई से आए पंकज ने अपनी पहली किताब ‘वाट ए लूजर’ को कवयित्री निरूपमा दत्ता, हिंदी कवि माधव कौशिक और अदब फाउंडेशन की चेयरमैन मितुल दीक्षित के हाथों लॉन्च करवाया।
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पंकज ने बताया की आजकल पहचान बनाना बहुत अहम हो गया है। यहीं से मुझे अपनी इस नावेल का ख्याल आया। मैंने अक्सर देखा है दिल्ली यूनिवर्सिटी में कई बच्चे अपने छोटे राज्यों को छोड़ कर पढ़ने आते हैं। उनकी आंखों में सपने होते है, कुछ बनने के। कुछ के सपने पूरे होते हैं और कु छ के नहीं। इसको ही ध्यान में रखते हुए नावेल लिखा गया है।
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अपनी किताब का संदेश हर किसी तक पहुंचाने के लिए, इसे अंग्रेजी और हिंदी में लिखा है। हिंदी किताब का नाम ‘लूजर कहीं का’ है। निरूपमा दत्ता ने बताया यह किताब एक बार पढ़ने बैठी तो उठने का मन नहीं हुआ।
माधव कौशिक ने बताया पंकज ने फिल्म में कई स्क्रीन प्ले लिखे है, जिसका अनुभव इस नावेल में दिखता है। इस किताब का मूल्य हिंदी में (लूजर कहीं का) 125 रुपये और इंग्लिश में 195 रुपये है। किताब को पेंग्विन इंडिया ने पब्लिश किया है।