बेजुबानों का दर्द: चंडीगढ़ में पेड़ों में कील ठोककर लगाए जा रहे साइन बोर्ड, हरियाली को बढ़ा खतरा
ट्री प्रोटेक्शन एक्ट के मुताबिक, ऐसा करने वालों पर कार्रवाई का प्रावधान है। कील ठोकने वाले के खिलाफ पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही गलती दोहराने पर 15 दिन की सजा का भी प्रावधान है, लेकिन आज तक न किसी से जुर्माना वसूला गया और न किसी को सजा मिली। यही कारण है कि पेड़ों के दिल कीलों के जरिए छलनी किए जा रहे हैं।
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चंडीगढ़ की हरियाली विश्वभर में बेशक अपनी पहचान रखती है, लेकिन यहां के बेजुबान पेड़ों के धड़ अब कीलों से छलनी किए जा रहे हैं। कील ठोककर साइन बोर्ड टांगने से पेड़ों पर संकट मंडरा रहा है। पीजीआई चौक से लेकर नयागांव की ओर जाने वाले मार्ग पर कई पेड़ों पर सीटीयू के बस स्टैंड के बोर्ड लगाए गए हैं। इन पर लिखा है कि कौन सी बस कहां जाएगी। यह बोर्ड वर्षों पुराने हैं। इन्हें लगाने के लिए मोटी कीलों का प्रयोग किया गया है। इन कीलों के आसपास जंग भी लग गई है। इससे पेड़ों का कुछ हिस्सा सूख भी रहा है। इन कीलों की वजह से पेड़ों का विकास भी बाधित हो गया है।
पर्यावरण प्रेमी सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसा करने पर कार्रवाई का प्रावधान है। फिर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। इसके लिए सरकारी मशीनरी भी कम जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने अपील की है कि पेड़ बेजुबान हैं, इन्हें नुकसान न पहुंचाएं।
ये होता है नुकसान
- पेड़ की कोशिकाएं कट जाती हैं। इस कारण जड़ों के जरिए पानी ऊपरी भाग तक नहीं पहुंच पाता।
- जिस जगह पर कीलें ठोकी गई हैं, वहां जंग लग जाती है। यह जंग पेड़ों को सुखाने का काम कर रही है।
- पर्यावरणविदों के मुताबिक, कील ठोकते समय पेड़ को भी दर्द होता है। वह आंसू के रूप में पानी निकालते हैं।
- कीलें ठोकने से पेड़ में ट्यूमर भी बनते हैं, जो पेड़ के विकास को प्रभावित करते हैं।
ट्री प्रोटेक्शन एक्ट के मुताबिक, ऐसा करने वालों पर कार्रवाई का प्रावधान है। कील ठोकने वाले के खिलाफ पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही गलती दोहराने पर 15 दिन की सजा का भी प्रावधान है, लेकिन आज तक न किसी से जुर्माना वसूला गया और न किसी को सजा मिली। यही कारण है कि पेड़ों के दिल कीलों के जरिए छलनी किए जा रहे हैं।
पेड़ों पर कील ठोकने से उनका विकास प्रभावित होता है। पानी व जरूरी पोषक तत्व ऊपर तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे में कार्रवाई का प्रावधान भी है। -देवेंद्र दलाई, मुख्य वन संरक्षक
करते हैं कार्रवाईमुहिम छेड़नी होगी
पेड़ पर होर्डिंग, साइन बोर्ड कभी नहीं लगने चाहिए। कील ठोकने से पेड़ का विकास प्रभावित होता है। यहां की हरियाली को बचाने के लिए एक मुहिम छेड़नी होगी। - प्रो. एमसी सिद्धू, विशेषज्ञ, वनस्पति विज्ञान विभाग पीयू
पेड़ों पर होर्डिंग बैनर हटाने की जिम्मेदारी नगर निगम की है, लेकिन हमारे पास भी कोई शिकायत पहुंचती है तो कार्रवाई करते हैं। -सीबी ओझा, चीफ इंजीनियर, यूटी प्रशासन