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दृष्टिहीन बोले- हम कैशलेस के लिए तैयार लेकिन सरकार और बैंक नहीं

Wed, 14 Dec 2016 09:21 AM IST
योगेंद्र त्रिपाठी /अमर उजाला, चंडीगढ़
योगेंद्र त्रिपाठी /अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 14 Dec 2016 09:21 AM IST
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 Blindmen spoke that they are ready for cashless but what about the government and bank
कैशलैस

वित्त मंत्री अरुण जेटली में नए नोटों पर ब्रेल लिपि बनाने केदावे किए थे, लेकिन यह पूरे नहीं हो पाए हैं। इस कारण नोट पहचानने में हमें दिक्कत हो रही है। दो हजार रुपये का नोट 20 रुपये का लगता है। 

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वहीं 500 का नोट 10 रुपये का नोट लगता है। हम कैशलेस के पक्ष में हैं, लेकिन हमें बैंकों में अलग लाइन और स्वैपिंग मशीन टाकिंग सॉफ्टवेयर की सुविधा होनी चाहिए। यह सुविधा हमें नहीं मिलती है। इसी कारण हमें परेशानी होती है। 
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नोटबंदी के 35वें दिन अमर उजाला से बातचीत के दौरान सेक्टर - 26 स्थित  इंस्टीट्यूट फार द ब्लाइंट के  प्रिंसिपल जेएस जायरा ने यह बात कही। उन्होंने बताया कि मुझे दिखाई नहीं देता है। 
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हम पुराने 500 और 1000 रुपये के नोट के साइज को देखकर पहचान लेते थे। लेकिन मौजूदा दो हजार रुपये का नोट बीस रुपये का लगता है। इसकेसाइज को कम किया है। अगर ब्रेल लिपि नोटों पर दर्ज होती तो हम हर नोट की पहचान आसानी से कर सकते थे। हम सरकार से गुजारिश कर रहे हैं कि नोटों पर ब्रेल लिपि दी जाना चाहिए।

कैशलेस के पक्ष में मगर सुविधाएं नहीं

 Blindmen spoke that they are ready for cashless but what about the government and bank
कैशलैस

सेक्टर - 26 स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ ब्लाइंड केटीचर राजकुमार ने बताया कि हम कैशलेस केपक्ष में हैं। मगर चंडीगढ़ प्रशासन और बैंकों की ओर से हमारे लिए व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। 

अगर यह व्यवस्था हमें सही तरीके से मिले तो दिव्यांग इसका स्वागत करेंगे। उन्होंने बताया कि वह बैंक पैसे निकालने गए, उन्हें भी सभी की लाइन में शामिल कर दिया गया। इस दौरान उन्हें चार घंटे चेक लेकर आने में लगे। 

सके लिए बैंक प्रशासन की ओर से दिव्यांगों के लिए अलग लाइन नहीं लगवाई गई।  शहर के सभी दुकानों पर स्वैपिंग मशीन टाकिंग सॉफ्टवेयर होना चाहिए। जिससे कि  दिव्यांगों को  सामान की खरीदारी में किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पडे़। 

इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल जेएस जायरा ने बताया कि हम दिव्यांग बच्चों को भी ब्रेल लिपि नए नोट में नहीं होने के कारण जागरूक नहीं कर पा रहे हैं।  उन्होंने कहा कि कैशलेस सिस्टम को हम फालो करेंगे। 

हमें इसके लिए मोबाइल टाकिंग सॉफ्टवेयर और सस्ते में मिलने चाहिए। अगर यह सुविधा मिल जाए तो हम विशेष बच्चों को प्रशिक्षित करेंगे। उन्होंने कहा कि अभी उनकेपास 145 विशेष बच्चे हैं। हम उनको केवल इसलिए नहीं प्रशिक्षित कर पा रहे हैं क्योंकि हमें नए नोटों और कैशलेस सुविधा के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं मिल रहे हैं।

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