फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Black Fungus is more dangerous than Corona  

हरियाणा: कोरोना से छह गुना ज्यादा जानलेवा ब्लैक फंगस बना नई चुनौती, 18 जिलों में हुई दस्तक 

Mon, 31 May 2021 11:51 AM IST
निवेदिता वर्मा सोम दत्त, अमर उजाला, चंडीगढ़
सोम दत्त, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 31 May 2021 11:51 AM IST
सार

हरियाणा में 4 मई के बाद से ब्लैक फंगस के केस आने शुरू हुए थे। 12 मई तक सिर्फ रोहतक पीजीआई में ही 20 मरीज पहुंच गए थे। पकेवल चार जिले ऐसे हैं, जहां पर ब्लैक फंगस का केस नहीं आया है।   
 

विज्ञापन
Black Fungus is more dangerous than Corona  
black fungus - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कोरोना की दूसरी लहर से पार पा रहे हरियाणा के लिए अब ब्लैक फंगस बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ब्लैक फंगस के खतरनाक होने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी मृत्यु दर कोरोना से 6 गुणा अधिक है।

विज्ञापन


मतलब एक तरफ कोरोना के 100 मरीजों में से एक मरीज की मौत होने से मृत्य दर 1.09 प्रतिशत, वहीं ब्लैक फंगस की मृत्यु दर  6.74 प्रतिशत है। इसके अलावा, नए मामलों की संख्या में भी ब्लैक फंगस पीछे नहीं है। पिछले 25 दिनों में रोजाना औसतन 32 केस आए हैं। ऐसे में इनकी कुल संख्या 816 से अधिक पहुंच गई है।
विज्ञापन



स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आंकड़ों में ये तथ्य सामने आए हैं। शनिवार तक प्रदेश में कुल 816 केस आए थे। इनमें से 55 मरीजों की मौत हो चुकी है। ऐसे में प्रतिदिन औसतन 2 मरीजों की ब्लैक फंगस जान ले रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रिकवरी दर भी 6 प्रतिशत से अधिक

राहत की बात है कि अब तक 58 मरीज ठीक हो चुके हैं। ऐसे में रिकवरी दर भी 6 प्रतिशत से अधिक है। इस समय करीब 688 मरीज अलग अलग मेडिकल कॉलेजों में इलाज ले रहे हैं। हरियाणा में 4 मई के बाद से ब्लैक फंगस के केस आने शुरू हुए थे। 12 मई तक अकेले रोहतक पीजीआई में 20 मरीज पहुंच गए थे। ब्लैक फंगस 18 जिलों में दस्तक दे चुका है। केवल चार जिले ऐसे हैं, जहां पर ब्लैक फंगस का केस नहीं आया है। 

इसलिए हो रही अधिक मौत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लैक फंगस और कोरोना के मामलों में कुछ अंतर है, इसलिए फंगस से मृत्यु दर अधिक है। कोरोना से लोग एक साल से अधिक से लड़ रहे हैं और इसकी दवा और टीका आ चुका है। जबकि ब्लैक फंगस की बीमारी तेजी से फैली है। इसकी दवा भी बाजार में नहीं है। दूसरा, कोरोना के मरीज होम आइसोलेशन में इलाज ले सकते हैं, लेकिन ब्लैक फंगस के मामलों में ऐसा नहीं है। तीसरा, कोरोना के मुकाबले ब्लैक फंगस तेजी से आंख, कान और दिमाग पर हमला करता है, जिससे मरीज की मौत हो रही हैं।

इंजेक्शन के लिए चल रही है मारामारी
एक तरफ हरियाणा में तेजी से ब्लैक फंगस के मामले बढ़ रहे हैं, जबकि इसके इलाज में प्रयोग होने वाले इंजेक्शन एंफोटेरेसिन बी की भारी कमी है। इंजेक्शन की कमी के चलते कई जिलों में तो मरीजों के आपरेशन तक अटके हुए हैं और वहीं स्थानों पर मरीजों को कई कई दिन तक एक भी इंजेक्शन नहीं मिल रहा है। न तो बाजार में ये इंजेक्शन मिल रहे हैं और न ही सरकार के पास इसका पर्याप्त स्टाक उपलब्ध है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed