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नवजोत सिद्धू पर भाजपा ने चुप्पी तोड़ी, सोशल मीडिया पर दिया बड़ा बयान
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
Updated Sat, 29 Oct 2016 11:38 AM IST
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नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर विजय सांपला ने दिया बयान
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नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर भाजपा ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ दी है। केंद्रीय राज्यमंत्री व प्रदेश प्रधान विजय सांपला ने सोशल मीडिया पर बड़ा बयान दिया। सांपला ने सिद्धू के बारे में फेसबुक पर लिखा कि कई बार जब घर में किसी बच्चे को ज्यादा ही प्यार दिया जाए, तो उसके मन में यह ख्याल आ जाता है कि मैं तो अपने घर, अपने परिवार से भी बड़ा हो गया हूं और फिर ऐसा बच्चा जीवन में धोखा ही खाता है।
क्या नहीं दिया नवजोत सिंह सिद्धू को भाजपा ने। तीन बार सांसद चुने गए, तो भाजपा के चुनाव निशान पर। पत्नी को विधायक बनाया भारतीय जनता पार्टी ने, सरकार में संसदीय सचिव का पद देकर सम्मान दिया। देश भर में भाजपा के हर मंच पर नवजोत सिंह सिद्धू को हाईकमान वाली प्रथम कतार में बैठाया। सिद्धू को भी यह भ्रम हो गया था कि भाजपा से भी बड़ा हो गया हूं। यह कहावत सिद्धू जोड़े पर बड़ी सटीक बैठती है।
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क्या नहीं दिया नवजोत सिंह सिद्धू को भाजपा ने। तीन बार सांसद चुने गए, तो भाजपा के चुनाव निशान पर। पत्नी को विधायक बनाया भारतीय जनता पार्टी ने, सरकार में संसदीय सचिव का पद देकर सम्मान दिया। देश भर में भाजपा के हर मंच पर नवजोत सिंह सिद्धू को हाईकमान वाली प्रथम कतार में बैठाया। सिद्धू को भी यह भ्रम हो गया था कि भाजपा से भी बड़ा हो गया हूं। यह कहावत सिद्धू जोड़े पर बड़ी सटीक बैठती है।
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‘मॅझ वेचके घोड़ी लिआंदी, दूध पीणो गए, लिद चकणी पई’
विजय सांपला
- फोटो : फाइल फोटो
ज्यादा-ज्यादा करते हुए थोड़े से भी गया, इसी कहावत के अनुसार नवजोत सिंह सिद्धू ने अपना घर छोड़कर आज क्या पा लिया, कभी एक दर पर, कभी दूसरे दर पर, अभी तक तो नकारा ही गया, फिर भी समझ पता नहीं क्यों नहीं आ रही।
मैं तो फिर भगवान के आगे प्रार्थना करता हूं कि नवजोत सिंह सिद्धू का राजनीतिक कैरियर अग्रसर रहे, पर जिस तरीके से वह अलग-अलग पार्टियों में शामिल होने के लिए तत्पर हैं, उससे अंदाजा लगता है कि वह पंजाब, पंजाबियों और पंजाबियत के लिए जुमले तो सुना सकते हैं, शेर तो पढ़ सकते हैं, पर करना कुछ नहीं चाहते, इच्छा उनकी निजी है कि जहां से उन्हें पसंदीदा रुतबा मिलता दिखे, वह उस पार्टी का पल्लू पकड़ लेंगे। सिद्धांत तो उन्होंने उसी दिन छोड़ दिए थे, जिस दिन उन्होंने भाजपा छोड़ दी थी। चलो जहां भी रहे खुश रहें।
मैं तो फिर भगवान के आगे प्रार्थना करता हूं कि नवजोत सिंह सिद्धू का राजनीतिक कैरियर अग्रसर रहे, पर जिस तरीके से वह अलग-अलग पार्टियों में शामिल होने के लिए तत्पर हैं, उससे अंदाजा लगता है कि वह पंजाब, पंजाबियों और पंजाबियत के लिए जुमले तो सुना सकते हैं, शेर तो पढ़ सकते हैं, पर करना कुछ नहीं चाहते, इच्छा उनकी निजी है कि जहां से उन्हें पसंदीदा रुतबा मिलता दिखे, वह उस पार्टी का पल्लू पकड़ लेंगे। सिद्धांत तो उन्होंने उसी दिन छोड़ दिए थे, जिस दिन उन्होंने भाजपा छोड़ दी थी। चलो जहां भी रहे खुश रहें।