{"_id":"671e9b25cbca12c349014654","slug":"bjp-sets-record-target-of-50-lakh-members-chandigarh-news-c-16-1-pkl1007-549774-2024-10-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: भाजपा ने रखा 50 लाख सदस्यों का रिकाॅर्ड लक्ष्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: भाजपा ने रखा 50 लाख सदस्यों का रिकाॅर्ड लक्ष्य
विज्ञापन
-विस चुनाव में टिकट वितरण, प्रचार तक में भाजपा रही आगे
कांग्रेस सदमे से नहीं निकल पा रही बाहर, प्रचार और टिकट वितरण में पिछड़ी, खत्म नहीं हो पा रही गुटबाजी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में जीत की हैट्रिक लगाने वाली भाजपा ने प्रदेश में सदस्यता अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। खास बात ये है कि भाजपा ने 50 लाख नए कार्यकर्ता तैयार करने का लक्ष्य रखा है। उधर, लगातार तीन बार पिछड़ने वाली कांग्रेस पार्टी सदमे से बाहर नहीं निकल पा रही है। कांग्रेस ने तो अभी तक विधायक दल का नेता चुन पाई है और न ही दस साल में संगठन तैयार कर पाई है।
एक दिन पहले ही भाजपा ने रोहतक स्थित पार्टी मुख्यालय में संगठन को और मजबूत बनाने को लेकर मंथन बैठक की थी। इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा को करीब 60 लाख वोट मिले हैं, इसी आधार पर नए 50 लाख कार्यकर्ता तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। हर बूथ पर 250 कार्यकर्ता तैयार किए जाएंगे। इसके लिए भाजपा ने जिला और ब्लाक वाइज जिम्मेदारी दी जाएगी। खासकर विधायकों को भी इसमें टारगेट दिए जाएंगे। भाजपा की प्रदेशस्तरीय बैठकों के बाद अब जिला स्तर पर संगठन की बैठकें शुरू होंगी और सदस्यता अभियान को गति दी जाएगी।
बाक्स
हर मोर्चे पर पिछड़ रही कांग्रेस
लोकसभा चुनाव को छोड़ दें तो कांग्रेस हरियाणा में हर मोर्चे पर पिछड़ रही है। लोकसभा में कांग्रेस को जरूर पांच सीटें मिली हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव में सारे समीकरण बदल गए। गुटबाजी के चलते नेता एक मंच पर नहीं आ पाए और एक एक करके पार्टी तीसरी बार सत्ता में आने से चूक गई। खेमेबाजी के चलते टिकट आवंटन में देरी हुई और इसमें भी एक ही धड़े के अधिक समर्थकों को टिकटें दी गईं। हार में पार्टी की सबसे बड़ी कमी रही कि संगठन नहीं होना। पिछले दस साल में पार्टी के तीन प्रदेशाध्यक्ष बदले जा चुके हैं, लेकिन संगठन कोई भी तैयार नहीं कर पाया। हार की जिम्मेदारी लेते हरियाणा कांग्रेस प्रभारी दीपक बाबरिया इस्तीफे की पेशकश कर चुके हैं, लेकिन हाईकमान अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं ले पाया है। दूसरा, विधानसभा का सत्र आ चुका है, लेकिन कांग्रेस पार्टी विधायक दल का नेता तक तय नहीं कर पाई है। इसके अलावा, प्रदेशाध्यक्ष बदलने को लेकर भी अटकलें चल रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
कांग्रेस सदमे से नहीं निकल पा रही बाहर, प्रचार और टिकट वितरण में पिछड़ी, खत्म नहीं हो पा रही गुटबाजी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में जीत की हैट्रिक लगाने वाली भाजपा ने प्रदेश में सदस्यता अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। खास बात ये है कि भाजपा ने 50 लाख नए कार्यकर्ता तैयार करने का लक्ष्य रखा है। उधर, लगातार तीन बार पिछड़ने वाली कांग्रेस पार्टी सदमे से बाहर नहीं निकल पा रही है। कांग्रेस ने तो अभी तक विधायक दल का नेता चुन पाई है और न ही दस साल में संगठन तैयार कर पाई है।
एक दिन पहले ही भाजपा ने रोहतक स्थित पार्टी मुख्यालय में संगठन को और मजबूत बनाने को लेकर मंथन बैठक की थी। इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा को करीब 60 लाख वोट मिले हैं, इसी आधार पर नए 50 लाख कार्यकर्ता तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। हर बूथ पर 250 कार्यकर्ता तैयार किए जाएंगे। इसके लिए भाजपा ने जिला और ब्लाक वाइज जिम्मेदारी दी जाएगी। खासकर विधायकों को भी इसमें टारगेट दिए जाएंगे। भाजपा की प्रदेशस्तरीय बैठकों के बाद अब जिला स्तर पर संगठन की बैठकें शुरू होंगी और सदस्यता अभियान को गति दी जाएगी।
विज्ञापन
बाक्स
हर मोर्चे पर पिछड़ रही कांग्रेस
लोकसभा चुनाव को छोड़ दें तो कांग्रेस हरियाणा में हर मोर्चे पर पिछड़ रही है। लोकसभा में कांग्रेस को जरूर पांच सीटें मिली हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव में सारे समीकरण बदल गए। गुटबाजी के चलते नेता एक मंच पर नहीं आ पाए और एक एक करके पार्टी तीसरी बार सत्ता में आने से चूक गई। खेमेबाजी के चलते टिकट आवंटन में देरी हुई और इसमें भी एक ही धड़े के अधिक समर्थकों को टिकटें दी गईं। हार में पार्टी की सबसे बड़ी कमी रही कि संगठन नहीं होना। पिछले दस साल में पार्टी के तीन प्रदेशाध्यक्ष बदले जा चुके हैं, लेकिन संगठन कोई भी तैयार नहीं कर पाया। हार की जिम्मेदारी लेते हरियाणा कांग्रेस प्रभारी दीपक बाबरिया इस्तीफे की पेशकश कर चुके हैं, लेकिन हाईकमान अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं ले पाया है। दूसरा, विधानसभा का सत्र आ चुका है, लेकिन कांग्रेस पार्टी विधायक दल का नेता तक तय नहीं कर पाई है। इसके अलावा, प्रदेशाध्यक्ष बदलने को लेकर भी अटकलें चल रही हैं।
विज्ञापन