Haryana: हरियाणा भाजपा के चुनाव प्रभारी बने सतीश पुनिया, भाजपा ने खेला जाट कार्ड
राज्यसभा सांसद सुरेंद्र सिंह नागर को सह-प्रभारी हरियाणा बनाया गया है। इससे पहले बिप्लब कुमार देव चुनाव प्रभारी थे। देव अब लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं।
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भाजपा ने लोकसभा चुनाव से पहले जाट कार्ड खेल दिया है। पार्टी ने राजस्थान के पूर्व अध्यक्ष डा. सतीश पुनिया को हरियाणा का नया चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है। पुनिया की नियुक्ति पूर्व प्रभारी बिप्लब कुमार देब की जगह हुई है। देब त्रिपुरा पश्चिम लोकसभा सीट से उम्मीदवार हैं और अपने क्षेत्र में प्रचार कार्य में जुटे हैं। हालांकि देब राज्य के प्रभारी बने रहेंगे। उनकी सलाह पर ही पुनिया को हरियाणा की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद सुरेंद्र सिंह नागर पहले की तरह सहप्रभारी बने रहेंगे।
सतीश पुनिया राजस्थान में जाना-पहचाना जाट चेहरा हैं। आरएसएस से जुड़े रहे डा. पुनिया को संगठन का व्यक्ति माना जाता है। हरियाणा में जातीय समीकरण को देखते हुए पार्टी ने उन्हें यह जिम्मेदारी दी है। हरियाणा में 25 से 28 फीसदी जाट आबादी है, जो लोकसभा की चार सीटें और विधानसभा की करीब 30 से 35 सीटों में अच्छा प्रभाव रखते हैं। पार्टी ने हाल ही में मनोहर लाल को
हटाकर ओबीसी समुदाय के नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री नियुक्त किया है। ऐसे में पार्टी को जाट चेहरे की ही तलाश थी, जिसमें पुनिया बिल्कुल फिट बैठे। पुनिया हरियाणा से लगते राजस्थान से हैं, इसलिए यह बात भी उनके हक में गई। राजस्थान में अध्यक्ष बनने से पहले उन्हें गुजरात विधानसभा की 35 से ज्यादा सीटों की जिम्मेदारी दी गई थी। इनमें अधिकतर सीटों पर भाजपा ने बाजी मारी थी।उसके बाद वह राष्ट्रीय नेतृत्व के निगाह में आ गए थे और उन्हें राजस्थान का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
राजस्थान में सरकार बनवाई, मगर अपना चुनाव हार गए थे
बीते दिसंबर में राजस्थान में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत में सतीश पुनिया का अहम रोल था, मगर वह खुद का चुनाव हार गए थे। वह आमेर विधानसभा से उम्मीदवार थे। उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार प्रशांत शर्मा ने हराया था। अपनी हार से निराश पुनिया ने भविष्य में आमेर से चुनाव नहीं लड़ने का एलान कर दिया था। पूनिया उस समय भी चर्चा में आए थे, जब उन्होंने तीन साल पहले संकल्प किया था कि गुजरात, उत्तरप्रदेश और राजस्थान में भाजपा की सरकार बनने तक वह माला नहीं पहनेंगे और रात्रि का भोजन नहीं करेंगे।