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संगरूर के लिए बदली रणनीति: पंजाब की हॉट सीट पर सभी दलों ने उतारे सिख चेहरे, भाजपा हिंदू पर खेल सकती है दांव

Mon, 22 Apr 2024 05:03 PM IST
निवेदिता वर्मा सुशील कुमार, संवाद, सुनाम ऊधम सिंह वाला (पंजाब)
सुशील कुमार, संवाद, सुनाम ऊधम सिंह वाला (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 22 Apr 2024 05:03 PM IST
सार

संगरूर संसदीय सीट पर करीब 33 फीसदी शहरी आबादी है और इस सीट दलित वर्ग की 32 फीसदी आबादी है। यहां पर सभी पार्टियों ने सिख चेहरे पर दांव खेला है। 
 

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BJP may field hindu face in Sangrur parliamentary seat of Punjab
अरविंद खन्ना - फोटो : फाइल

विस्तार

संगरूर संसदीय सीट पर तमाम सियासी दलों की ओर से सिख चेहरों को चुनाव मैदान में उतारने के बाद भाजपा ने अपनी रणनीति बदल दी है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने हिंदू चेहरे को मैदान में उतारने का मन बना लिया है और अरविंद खन्ना भाजपा के उम्मीदवार हो सकते हैं। 

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संगरूर से आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, अकाली दल अमृतसर, शिरोमणि अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी ने सिख चेहरों पर दांव खेला है। ऐसे में भाजपा, हिंदू चेहरे के माध्यम से शहरी वोट बैंक को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। 
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सियासी जानकारों का मानना है कि भाजपा की नजर जातीय समीकरण के साथ वोट विभाजन के गणित पर भी है। भाजपा, मान कर चल रही है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में वोट का विभाजन हुआ तो शहरी वोट बैंक के जरिए किसी चमत्कार होने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।
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सूत्र बताते हैं कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को फुरसत मिलते ही एक दो दिन के भीतर इसकी औपचारिक घोषणा हो जाएगी। पार्टी की इस रणनीति की जानकारी मिलने के बाद अरविंद खन्ना की टीम में हलचल तेज हो गई है। सभी नौ विधानसभा क्षेत्रों में वर्करों को कमर कसने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।


संगरूर व धूरी से विधायक रह चुके हैं खन्ना
अरविंद खन्ना इसी संसदीय सीट का हिस्सा संगरूर व धूरी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं और कांग्रेस की टिकट पर 2004 लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं। हालांकि वे 27277 मतों के अंतर से अकाली दल के नेता सुखदेव सिंह ढींडसा से चुनाव हार गए थे। अरविंद खन्ना तब 259551 वोट लेने में सफल रहे थे। अरविंद खन्ना अपनी समाज सेवी संस्था ‘उम्मीद’ के जरिए पूरे इलाके में सुर्ख़ियों में रहे हैं। इस सीट से सिख चेहरे ही संसद भवन पहुंचते रहे हैं, लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के विजयइंदर सिंगला ने सिख बाहुल्य क्षेत्र में जीत दर्ज करके इस मिथक को तोड़ दिया था।

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