भाजपा और जजपा की सरकार तो बनी लेकिन कैसे पूरे होंगे वादे, यहां जानिए पूरा फार्मूला
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हरियाणा का हर तबका भाजपा के संकल्प पत्र और जजपा के जन सेवा पत्र में किए वादों पर नई सरकार की पहली कलम चलने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। मनोहर 2.0 की पहली कैबिनेट बैठक भी मंगलवार को हो गई। इस बैठक पर किसान, नौजवान, कर्मचारी, महिला सहित हर वर्ग की निगाह लगी हुई थी।
बैठक में किसान व नौजवान को लेकर फैसले तो लिए गए हैं, लेकिन सत्तारूढ़ दलों भाजपा और जजपा ने अपने संकल्प और जन सेवा पत्र में किए वादों में से एक पर भी अमल नहीं किया। सीएम मनोहर लाल और डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला हर कदम साथ-साथ उठा रहे हैं। कैबिनेट बैठक के बाद भी दोनों साथ ही बाहर निकले। दोनों के इस साथ से जनता अब सौगात भी चाह रही है।
पहली बैठक से भी जनता को उम्मीदें थी पर वे पूरी नहीं हो पाईं। बैठक में सीएम व डिप्टी सीएम ने अधिकारियों के साथ ज्वलंत मुद्दों पर ही चर्चा कर निर्णय लिए हैं। कोई भी बड़ी घोषणा नहीं की गई। शायद सीएम व डिप्टी सीएम पूरे कैबिनेट के साथ विचार-विमर्श कर ही न्यूनतम साझा कार्यक्रम को लागू करना चाहते हैं। इसलिए कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई।
सरकार की योजना न्यूनतम साझा कार्यक्रम में दोनों दलों के प्रमुख वादों को शामिल कर आगे बढ़ने की दिख रही है। भाजपा के गठबंधन सहयोगी जजपा के जन सेवा पत्र में अनेक वादे ऐसे भी हैं, जिन्हें लागू करने में पेच फंस सकता है। इसलिए भाजपा हर कदम फूंक-फूंक कर रखेगी ताकि जजपा के साथ रिश्तों में कोई खटास न आए।
न्यूनतम साझा कार्यक्रम चरणबद्ध तरीके से लागू करने का भी निर्णय लिया जा सकता है। जिसमें हर चरण में एक-दो बड़ी घोषणा शामिल होंगी। जिन वादों को लागू करने पर अच्छा-खासा वित्तीय बोझ पड़ेगा, उन्हें लेकर सरकार पहले पूरा होमवर्क भी करना चाहती है। ऐसे में बड़े वादे पूरा होने के लिए जनता को कुछ इंतजार भी करना पड़ सकता है।
जजपा के इन वादों पर भाजपा का अलग स्टैंड
- किसानों एवं छोटे दुकानदारों का सहकारी बैंकों का कर्ज माफ करने का जजपा ने वादा किया है। जमीन की नीलामी भी बंद की जाएगी। भाजपा सरकार अपने पहले कार्यकाल में किसानों का सहकारी बैंकों के कर्ज का 4750 करोड़ रुपये कर्ज माफ कर चुकी है। अब कर्ज माफी का निर्णय लेना आसान नहीं होगा। कर्ज माफी भाजपा के एजेंडे में नहीं है। वह किसान की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर किसान को कर्ज के दलदल से बाहर निकालना चाहती है।
- जजपा कर्मचारियों से पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करने व पंजाब समान वेतनमान देने का वादा कर चुकी है। भाजपा ने अपने पहले कार्यकाल के घोषणा पत्र में पंजाब समान वेतनमान देने का वादा किया था, मगर पूरा नहीं कर पाई। सरकार का तर्क है कि अनेक विभागों में कर्मचारी पंजाब से अधिक वेतनमान ले रहे हैं। इस पर भी पेच फंसेगा। पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करना भी भाजपा के एजेंडा में नहीं है।
- वृद्धावस्था सम्मान पेंशन 5100 रुपये प्रतिमाह देना। महिलाओं को 55 वर्ष व पुरुषों को 58 वर्ष पूर्ण होने पर घर पर ही मिलेगी। जजपा ने ये वादे किए हैं। भाजपा ने महंगाई अनुसार पेंशन बढ़ाने का वादा किया हुआ है। ऐसे में न्यूनतम साझा कार्यक्रम में चरणबद्ध तरीके से पेंशन बढ़ाने का फैसला लेने का भाजपा दबाव बना सकती है, जिससे जजपा के जनसेवा पत्र पर सवाल उठ सकते हैं।
- हरियाणा के निगम, बोर्ड व अन्य संस्थाओं के चेयरमैन, अध्यक्ष, सदस्य, ओएसडी, कुलपति, रजिस्ट्रार आदि पदों पर हरियाणा के निवासियों को ही जजपा लगाना चाहती है, जबकि भाजपा का एजेंडा इससे अलग है। भाजपा के पहले कार्यकाल में इनमें से अनेक पदों पर दूसरे प्रदेशों के व्यक्तियों की नियुक्तियां हुईं, जिन्होंने चुनाव के समय इस्तीफे दिए थे, वे पद के लिए दोबारा लॉबिंग कर रहे हैं।
- हरियाणा की सभी नौकरियों में 75 प्रतिशत पद हरियाणावियों के लिए आरक्षित करने का वादा जजपा ने किया है। इसे लागू कराने में जजपा को जद्दोजहद करनी पड़ सकती है।
- सरकारी कर्मचारियों को जजपा ने एचआरए पहली जनवरी 2017 से देने का वादा किया है। इस फैसले के लिए भाजपा को राजी करना आसान नहीं होगा। भाजपा सरकार इसे पहली जनवरी 2019 से लागू कर चुकी है।
- नौकरी मिलने तक जजपा शिक्षित युवाओं को 11 हजार रुपये बेरोजगारी भत्ता देना चाहती है, जबकि भाजपा ने सक्षम योजना चलाई हुई है, जिसके तहत वह शिक्षित युवाओं को सक्षम बनाकर सौ दिन का रोजगार देने में विश्वास रखती है।
ये वादे पूरा करना मुश्किल नहीं पर पड़ेगा वित्तीय बोझ
- जजपा के फसल के एमएसपी पर दस प्रतिशत या सौ रुपये बोनस देने के वादे को देर-सवेर लागू किया जा सकता है।
- गांवों में शराब ठेके बंद करने का वादा भाजपा के संकल्प पत्र में भी है।
- ग्रामीण बच्चों को नौकरी के लिए परीक्षा में दस अतिरिक्त अंक देने पर भी सहमति बन सकती है।
- हर गांव में आरओ का शुद्ध पानी उपलब्ध कराने की भाजपा की भी सोच रही है, इसमें दोनों दल मिलकर काम कर सकते हैं।
- कुरुक्षेत्र में संत रविदास का देश का सबसे बड़ा मंदिर बनाने में समय लग सकता है, लेकिन दिक्कत आना मुश्किल है।
- मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन कर चालान की दरों को कम करने के लिए जजपा को भाजपा को मनाना होगा।
- प्रतियोगी परीक्षाएं गृह जिले में ही आयोजित करने का निर्णय कठिन नहीं, साल में केवल सौ रुपये फीस लेने पर बन सकती है सहमति। भाजपा ने एचपीएससी परीक्षा की फीस 1000 व एसएससी की फीस पांच सौ रुपये लेने का किया है वादा। गृह जिले में ही परीक्षाएं लेने पर भाजपा भी सहमत।
- .सरपंच, पंच, बीडीसी और जिला परिषद का मानदेय बढ़ाने पर भी बन सकती है आने वाले समय में सहमति।
- दस स्पोर्ट्स कॉलेज का निर्माण भी असंभव नहीं। किसानों को ट्यूबवेल कनेक्शन और स्वरोजगार के लिए निशुल्क सीएलयू पर भी बन सकती है बात।
- कैंसर व काला पीलिया जैसी जानलेवा बीमारियों का इलाज मुफ्त व हर बीस किलोमीटर पर मोबाइल डिस्पेंसरी को लेकर भाजपा को भी नहीं होगा एतराज।
- कर्मचारियों को नियमित करने के लिए व्यवहारिक नीति बनाने पर जजपा और भाजपा के अलग-अलग विचार। भाजपा सेवा सुरक्षा देने तो जजपा पक्का करने के हक में।
- ड्रग मुक्त प्रदेश बनाने को लेकर भाजपा और जजपा साथ-साथ आगे बढ़ेंगे। एसवाईएल पर भी दोनों दलों का रुख एक जैसा।
न्यूनतम साझा कार्यक्रम लागू करने के लिए बनेगी समिति: सीएम
सीएम मनोहर लाल ने कहा है कि भाजपा-जजपा सरकार का न्यूनतम साझा कार्यक्रम जनहित में लागू किया जाएगा। इसके लिए सरकार जल्दी एक समिति का गठन करेगी। समिति की सिफारिशों के आधार पर संकल्प व जनसेवा पत्र के वादों को लागू किया जाएगा। दोनों दलों की सोच सार्थक है, इसलिए किसी भी वादे को पूरा करने में दिक्कत नहीं आएगी।