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सीपीएस सुल्तान सिंह जड़ौला ने थामा भाजपा की दामन
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल
Updated Sun, 17 Aug 2014 01:00 AM IST
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पूंडरी से निर्दलीय विधायक बनकर कांग्रेस को समर्थन करने वाले मुख्य संसदीय सचिव सुल्तान सिंह जड़ौला के कांग्रेस को छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है।
इससे कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। वहीं हलके में कई अन्य उम्मीदवारों की उम्मीदवारी पर भी संशय के बादल नजर आने लगे हैं।
जातीय समीकरण एवं निर्दलीय विधायक बनाने के लिए पहचान रखने वाले पूंडरी हल्का में इस राजनीतिक उलटफेर का बड़ा असर होगा।
पिछले पांच साल में कांग्रेस सरकार में सीपीएस रहे सुल्तान सिंह जड़ौला ने पूंडरी हलके की राजनीति में भूचाल पैदा कर दिया है।
बीरेंद्र सिंह की जींद रैली के दौरान मंच से जिस समय सीपीएस जड़ौला के भाजपा में शामिल होने की घोषणा हुई तो भाजपा नेताओं के साथ- साथ हलके के लोगों में हलचल पैदा हो गई। हलके में चर्चाओं का दौर गरमा गया।
पूंडरी हलके में इन दिनों राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं, जहां भाजपा की टिकट के लिए आवेदकों की संख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है।
वहीं जड़ौला द्वारा भाजपा में शामिल होने की घोषणा के बाद अब भाजपा टिकट पर दावेदारी रखने वाले नेताओं में खलबली पैदा होनी लाजमी है।
आजाद उम्मीदवार के तौर पर जीते थे जड़ौला
बता दे कि वर्ष 2009 में हलके की जनता ने सुलतान सिंह जड़ौला को आजाद उम्मीदवार के रूप में चुनकर विधानसभा भेजा था।
कांग्रेस को विधायकों की जरूरत थी सो, कांग्रेस ने उन्हें हाथों-हाथ लिया। मुख्य संसदीय सचिव सुल्तान सिंह जड़ौला ने विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही कांग्रेस सरकार को अचानक छोड़कर भाजपा में शामिल होकर पूंडरी हलके के सभी समीकरण बदलकर रख दिए हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा के कई नेताओं ने बैठक कर अपने कार्यकर्ताओं से इस राजनीतिक हालात पर चर्चा की।
आजाद उम्मीदवार सतबीर भाणा ने पूंडरी मंडी में एक बड़ी रैली कर जहां अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज करवाई। वहीं पूंडरी के पूर्व विधायक दिनेश कौशिक पहले से एक मजबूत उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में है।
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अब जडौला के भाजपा में आने से सभी पार्टियों के राजनीतिक समीकरण बिगड़ गए हैं। जड़ौला के बाद अब पूंडरी हल्का से कांग्रेस की ओर से रवि मैहला, दर्शन सिंह खनौदा, पीएल भारद्वाज, जसविंद्र पबनावा सहित कुल 11 उम्मीदवारों ने टिकट के लिए आवेदन किया है।
वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता रणधीर गोलन का कहना है कि जडौला के पार्टी में शामिल होने से पार्टी का कुनबा बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा राष्ट्रीय पार्टी है। इसमें कोई टिकट की शर्तों पर शामिल नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि
पार्टी पूंडरी के पुराने और काम करने वाले कार्यकर्ता को टिकट देगी।
जड़ौला का राजनीतिक सफर
साल 1961 में गांव जड़ौला में चौ. रामकला के घर जन्मे सुल्तान सिंह जडौला का राजनीतिक में शुरू से ही लगाव था और उनकी सादगी के चलते गांव जड़ौला के ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से 1993 में गांव का सरपंच भी बनाया था।
इसके अलावा रोड महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष भी रहे। कांग्रेस पार्टी से अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत करने वाले सुल्तान जड़ौला ने पार्टी के लिए काफी संघर्ष व सेवा की थी।
लेकिन कांग्रेस ने कई विधानसभा चुनावों में जड़ौला की अनदेखी की थी। पिछले विधानसभा चुनाव में किसी भी दल द्वारा रोड बिरादरी के नेता को टिकट न देने की सूरत में रोड बिरादरी के लोगों ने महापंचायत आयोजित कर सुल्तान जड़ौला को पूंडरी में चुनावी मैदान में उतारा था और समस्त बिरादरियों के सहयोग से विधायक का ताज उनके सिर सजा। विधायक बनने के साथ ही बिना शर्त सुल्तान जड़ौला ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार को समर्थन किया था और सरकार ने मुख्य संसदीय सचिव के पद से नवाजा था।
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इससे कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। वहीं हलके में कई अन्य उम्मीदवारों की उम्मीदवारी पर भी संशय के बादल नजर आने लगे हैं।
जातीय समीकरण एवं निर्दलीय विधायक बनाने के लिए पहचान रखने वाले पूंडरी हल्का में इस राजनीतिक उलटफेर का बड़ा असर होगा।
पिछले पांच साल में कांग्रेस सरकार में सीपीएस रहे सुल्तान सिंह जड़ौला ने पूंडरी हलके की राजनीति में भूचाल पैदा कर दिया है।
बीरेंद्र सिंह की जींद रैली के दौरान मंच से जिस समय सीपीएस जड़ौला के भाजपा में शामिल होने की घोषणा हुई तो भाजपा नेताओं के साथ- साथ हलके के लोगों में हलचल पैदा हो गई। हलके में चर्चाओं का दौर गरमा गया।
पूंडरी हलके में इन दिनों राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं, जहां भाजपा की टिकट के लिए आवेदकों की संख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है।
वहीं जड़ौला द्वारा भाजपा में शामिल होने की घोषणा के बाद अब भाजपा टिकट पर दावेदारी रखने वाले नेताओं में खलबली पैदा होनी लाजमी है।
आजाद उम्मीदवार के तौर पर जीते थे जड़ौला
बता दे कि वर्ष 2009 में हलके की जनता ने सुलतान सिंह जड़ौला को आजाद उम्मीदवार के रूप में चुनकर विधानसभा भेजा था।
कांग्रेस को विधायकों की जरूरत थी सो, कांग्रेस ने उन्हें हाथों-हाथ लिया। मुख्य संसदीय सचिव सुल्तान सिंह जड़ौला ने विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही कांग्रेस सरकार को अचानक छोड़कर भाजपा में शामिल होकर पूंडरी हलके के सभी समीकरण बदलकर रख दिए हैं।
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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा के कई नेताओं ने बैठक कर अपने कार्यकर्ताओं से इस राजनीतिक हालात पर चर्चा की।
आजाद उम्मीदवार सतबीर भाणा ने पूंडरी मंडी में एक बड़ी रैली कर जहां अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज करवाई। वहीं पूंडरी के पूर्व विधायक दिनेश कौशिक पहले से एक मजबूत उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में है।
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अब जडौला के भाजपा में आने से सभी पार्टियों के राजनीतिक समीकरण बिगड़ गए हैं। जड़ौला के बाद अब पूंडरी हल्का से कांग्रेस की ओर से रवि मैहला, दर्शन सिंह खनौदा, पीएल भारद्वाज, जसविंद्र पबनावा सहित कुल 11 उम्मीदवारों ने टिकट के लिए आवेदन किया है।
वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता रणधीर गोलन का कहना है कि जडौला के पार्टी में शामिल होने से पार्टी का कुनबा बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा राष्ट्रीय पार्टी है। इसमें कोई टिकट की शर्तों पर शामिल नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि
पार्टी पूंडरी के पुराने और काम करने वाले कार्यकर्ता को टिकट देगी।
जड़ौला का राजनीतिक सफर
साल 1961 में गांव जड़ौला में चौ. रामकला के घर जन्मे सुल्तान सिंह जडौला का राजनीतिक में शुरू से ही लगाव था और उनकी सादगी के चलते गांव जड़ौला के ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से 1993 में गांव का सरपंच भी बनाया था।
इसके अलावा रोड महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष भी रहे। कांग्रेस पार्टी से अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत करने वाले सुल्तान जड़ौला ने पार्टी के लिए काफी संघर्ष व सेवा की थी।
लेकिन कांग्रेस ने कई विधानसभा चुनावों में जड़ौला की अनदेखी की थी। पिछले विधानसभा चुनाव में किसी भी दल द्वारा रोड बिरादरी के नेता को टिकट न देने की सूरत में रोड बिरादरी के लोगों ने महापंचायत आयोजित कर सुल्तान जड़ौला को पूंडरी में चुनावी मैदान में उतारा था और समस्त बिरादरियों के सहयोग से विधायक का ताज उनके सिर सजा। विधायक बनने के साथ ही बिना शर्त सुल्तान जड़ौला ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार को समर्थन किया था और सरकार ने मुख्य संसदीय सचिव के पद से नवाजा था।