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Chandigarh News: शाह के नेतृत्व में भाजपा ने दिया एकजुटता का संदेश
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मनोहर लाल और राव इंद्रजीत को भी विधायक दल की बैठक में बुलाया गया
बहुत दिनों बाद साथ नजर आए मनोहर और राव इंद्रजीत
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में हुई विधायक दल की बैठक में भाजपा ने एकजुटता का संदेश दिया है। शाह ने बैठक में राज्य के उन नेताओं को बुला रखा था, जिनकी गिनती अलग-अलग खेमों में होती है। बैठक में हरियाणा के सभी चुनाव प्रभारियों के साथ केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत को बुलाया गया था। दोनों ही नेता विधायक दल की बैठक में मौजूद थे। उसके बाद शाह इन नेताओं को लेकर राज्यपाल के पास पहुंचे और सभी को साथ लेकर सरकार बनाने का दावा पेश करवाया। ऐसी तस्वीर बहुत दिनों बाद देखने को मिली जब मनोहर और राव एक साथ नजर आए हों।
राव इंद्रजीत और मनोहर लाल एक दूसरे के प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं। राव इंद्रजीत जब लोकसभा चुनाव जीते तो उस दौरान भी उन्होंने हरियाणा सरकार को घेरा था और जब उनकी बेटी आरती अटेली हलके से चुनाव जीतीं तो उन्होंने कहा कि एक पूर्व सीएम ने हराने की कोशिश की। टिकट वितरण में भी मनोहर व राव अहीरवाल बेल्ट में अपने समर्थकों को टिकट दिलाने में प्रयासरत रहे थे। इस बार चुनाव में राव की बेटी भी विधायक चुनी गई हैं। भविष्य में सैनी के सामने कोई ऐसा विवाद न हो, इसलिए शाह ने राव, विज और मनोहर लाल की मौजूदगी में सैनी को विधायक दल का नेता चुना। ताकि साथ सभी विवाद यहीं खत्म कर दिए जाए। विधायक दल की बैठक के बाद राव इंद्रजीत सीएम सैनी की गाड़ी में बैठकर राजभवन पहुंचे। राव इंद्रजीत वीरवार को शपथ समारोह में भी शामिल होंगे।
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इसलिए विज से कराया अनुमोदन
सैनी के नाम का अनुमोदन अनिल विज से करवाने के पीछे अमित शाह की सोची समझी रणनीति है। इसके पीछे दो बड़ी वजहें हैं। एक तो वह भाजपा के सबसे वरिष्ठ विधायक हैं। वह सातवीं बार चुनकर विधानसभा पहुंचे हैं। जब वरिष्ठ विधायक सैनी का नाम आगे रखेंगे तो किसी अन्य को आपत्ति नहीं होगी। वहीं, अनिल विज भी सीएम पद की दावेदारी पेश करते रहे हैं। ऐसे में उनकी ओर से नाम रखे जाने के बाद सीएम पद को लेकर कयासबाजी पर विराम लग गया। सैनी के नाम का प्रस्ताव नरवाना के विधायक कृष्ण कुमार बेदी ने रखा था। वह दलित समुदाय से आते हैं। दलितों ने इस बार भाजपा को अच्छा खासा समर्थन दिया है। ऐसे में बेदी के जरिये पार्टी दलितों को संदेश देना चाहती है कि भाजपा सरकार में ही उनके प्रतिनिधि को सम्मान मिलता है।
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सैनी के साथ 10-12 मंत्री ले सकते हैं शपथ
चंडीगढ़। नायब सैनी को विधायक दल का नेता चुनने के बाद अब नजरें वीरवार को शपथ लेने वाले मंत्रिमंडल के सदस्यों पर टिकी हैं। सैनी के साथ 10 से 12 मंत्री शपथ ले सकते हैं। भाजपा हाईकमान जाति व क्षेत्रीय समीकरण के आधार पर मंत्रिमंडल का गठन करेगा। जो विधायक मंत्री बनने की दौड़ में शामिल हैं, उनमें सबसे ऊपर कृष्ण कुमार बेदी, कृष्ण लाल पंवार, मूलचंद शर्मा, महिपाल ढांडा, रणबीर गंगवा, आरती राव, विपुल गोयल, राव नरबीर, डॉ. अरविंद शर्मा, श्याम सिंह राणा, डॉ. कृष्ण मिड्ढा और राजेश नागर के नाम शामिल हैं। अनिल विज और हरविंद्र कल्याण का नाम विधानसभा अध्यक्ष के तौर पर चल रहा है। भाजपा के नेताओं ने बताया कि सीएम समेत 14 मंत्री मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं। दो मंत्री पद खाली रहेंगे, इन्हें बाद में भरा जाएगा।
क्षेत्रीय समीकरण के हिसाब से देखें तो भाजपा ने अहीरवाल क्षेत्र में अच्छी सीटें जीती हैं। ऐसे में अहीरवाल से दो विधायकों का मंत्री बनना तय है। एनसीआर क्षेत्र से भी दो मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस बार जीटी बेल्ट का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। एक तो यहां से सीएम खुद विधायक हैं। वहीं, कुछ दिग्गज चुनाव हार गए हैं। ऐसे में जीटी बेल्ट से तीन से चार मंत्री हो सकते हैं। भाजपा ने इस बार जाट लैंड में भी सीटें जीती हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों को भी प्रतिनिधित्व देने की बात कही जा रही है।
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बहुत दिनों बाद साथ नजर आए मनोहर और राव इंद्रजीत
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में हुई विधायक दल की बैठक में भाजपा ने एकजुटता का संदेश दिया है। शाह ने बैठक में राज्य के उन नेताओं को बुला रखा था, जिनकी गिनती अलग-अलग खेमों में होती है। बैठक में हरियाणा के सभी चुनाव प्रभारियों के साथ केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत को बुलाया गया था। दोनों ही नेता विधायक दल की बैठक में मौजूद थे। उसके बाद शाह इन नेताओं को लेकर राज्यपाल के पास पहुंचे और सभी को साथ लेकर सरकार बनाने का दावा पेश करवाया। ऐसी तस्वीर बहुत दिनों बाद देखने को मिली जब मनोहर और राव एक साथ नजर आए हों।
राव इंद्रजीत और मनोहर लाल एक दूसरे के प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं। राव इंद्रजीत जब लोकसभा चुनाव जीते तो उस दौरान भी उन्होंने हरियाणा सरकार को घेरा था और जब उनकी बेटी आरती अटेली हलके से चुनाव जीतीं तो उन्होंने कहा कि एक पूर्व सीएम ने हराने की कोशिश की। टिकट वितरण में भी मनोहर व राव अहीरवाल बेल्ट में अपने समर्थकों को टिकट दिलाने में प्रयासरत रहे थे। इस बार चुनाव में राव की बेटी भी विधायक चुनी गई हैं। भविष्य में सैनी के सामने कोई ऐसा विवाद न हो, इसलिए शाह ने राव, विज और मनोहर लाल की मौजूदगी में सैनी को विधायक दल का नेता चुना। ताकि साथ सभी विवाद यहीं खत्म कर दिए जाए। विधायक दल की बैठक के बाद राव इंद्रजीत सीएम सैनी की गाड़ी में बैठकर राजभवन पहुंचे। राव इंद्रजीत वीरवार को शपथ समारोह में भी शामिल होंगे।
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इसलिए विज से कराया अनुमोदन
सैनी के नाम का अनुमोदन अनिल विज से करवाने के पीछे अमित शाह की सोची समझी रणनीति है। इसके पीछे दो बड़ी वजहें हैं। एक तो वह भाजपा के सबसे वरिष्ठ विधायक हैं। वह सातवीं बार चुनकर विधानसभा पहुंचे हैं। जब वरिष्ठ विधायक सैनी का नाम आगे रखेंगे तो किसी अन्य को आपत्ति नहीं होगी। वहीं, अनिल विज भी सीएम पद की दावेदारी पेश करते रहे हैं। ऐसे में उनकी ओर से नाम रखे जाने के बाद सीएम पद को लेकर कयासबाजी पर विराम लग गया। सैनी के नाम का प्रस्ताव नरवाना के विधायक कृष्ण कुमार बेदी ने रखा था। वह दलित समुदाय से आते हैं। दलितों ने इस बार भाजपा को अच्छा खासा समर्थन दिया है। ऐसे में बेदी के जरिये पार्टी दलितों को संदेश देना चाहती है कि भाजपा सरकार में ही उनके प्रतिनिधि को सम्मान मिलता है।
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सैनी के साथ 10-12 मंत्री ले सकते हैं शपथ
चंडीगढ़। नायब सैनी को विधायक दल का नेता चुनने के बाद अब नजरें वीरवार को शपथ लेने वाले मंत्रिमंडल के सदस्यों पर टिकी हैं। सैनी के साथ 10 से 12 मंत्री शपथ ले सकते हैं। भाजपा हाईकमान जाति व क्षेत्रीय समीकरण के आधार पर मंत्रिमंडल का गठन करेगा। जो विधायक मंत्री बनने की दौड़ में शामिल हैं, उनमें सबसे ऊपर कृष्ण कुमार बेदी, कृष्ण लाल पंवार, मूलचंद शर्मा, महिपाल ढांडा, रणबीर गंगवा, आरती राव, विपुल गोयल, राव नरबीर, डॉ. अरविंद शर्मा, श्याम सिंह राणा, डॉ. कृष्ण मिड्ढा और राजेश नागर के नाम शामिल हैं। अनिल विज और हरविंद्र कल्याण का नाम विधानसभा अध्यक्ष के तौर पर चल रहा है। भाजपा के नेताओं ने बताया कि सीएम समेत 14 मंत्री मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं। दो मंत्री पद खाली रहेंगे, इन्हें बाद में भरा जाएगा।
क्षेत्रीय समीकरण के हिसाब से देखें तो भाजपा ने अहीरवाल क्षेत्र में अच्छी सीटें जीती हैं। ऐसे में अहीरवाल से दो विधायकों का मंत्री बनना तय है। एनसीआर क्षेत्र से भी दो मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस बार जीटी बेल्ट का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। एक तो यहां से सीएम खुद विधायक हैं। वहीं, कुछ दिग्गज चुनाव हार गए हैं। ऐसे में जीटी बेल्ट से तीन से चार मंत्री हो सकते हैं। भाजपा ने इस बार जाट लैंड में भी सीटें जीती हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों को भी प्रतिनिधित्व देने की बात कही जा रही है।