अपनों को टिकट दिलाने में रोड़ा बने अमित शाह
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हरियाणा में उम्मीदवारों के चयन में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने किसी के सलाह और सुझावों को कोई तरजीह नहीं दी। शाह के इस रुख के कारण प्रदेश के सांसद और बड़े नेता न तो अपने रिश्तेदारों को टिकट से उपकृत कर पाए और न ही अपने करीबियों को टिकट का तोहफा दे पाए।
दरअसल केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक से पहले ही शाह ने प्रदेश में कराए गए तीन आंतरिक सर्वे के जरिए तैयार उम्मीदवारों के पैनल का प्रदेश इकाई द्वारा तैयार पैनल से मिलान कर नई सूची तैयार की थी। इस पर उन्होंने हरियाणा का प्रभार संभाल चुके पीएम नरेंद्र मोदी के साथ भी बैठक से पहले ही चर्चा कर ली थी।
पार्टी अध्यक्ष अन्य चुनावी राज्यों में उम्मीदवारों के चयन के मामले में भी हरियाणा का ही फार्मूला अपनाएंगे। इन राज्यों में भी शाह ने उम्मीदवारों के चयन के लिए पार्टी के स्तर पर होने वाली कसरत के इतर आंतरिक सर्वे कराकर उम्मीदवारों का पैनल पहले ही तैयार कर लिया है।
दिग्गजों ने की थी पसंदीदा नेताओं की सिफारिश
हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए प्रदेश के सांसदों के अलावा वरिष्ठ नेताओं ने अपने-अपने पसंद के उम्मीदवारों के नाम पैनल में डलवाए था। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह जहां अपनी बेटी आरती राव को टिकट दिलाना चाहते थे, वहीं महेंद्रगढ़ के सांसद धर्मवीर अपने भाई के लिए प्रयासरत थे।
इसी प्रकार केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, सांसद राजकुमार सैनी, रतनलाल कटारिया, ओमप्रकाश धनखड़ सहित कई नेताओं ने भी अपने करीबियों की सूची भेजकर इनका नाम उम्मीदवारों के पैनल में डलवाया था।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि राज्य इकाई से प्राप्त उम्मीदवारों का पैनल मिलने के बाद शाह ने आंतरिक सर्वे के आधार पर तैयार की गई उम्मीदवारों की सूची के आधार पर नई सूची तैयार की थी।
सीईसी की बैठक में इसी नई सूची पर विचार विमर्श हुआ। चूंकि हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए चौधरी बीरेंद्र सिंह खुद चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे, इसलिए उनके स्थान पर उनकी पत्नी को टिकट दिया गया।
करनाल सांसद ने उठाए तरीके पर सवाल
करनाल के भाजपा सांसद अश्विनी चोपड़ा ने हरियाणा विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर पार्टी के तरीके पर सवाल उठाए हैं। चोपड़ा ने हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए मंगलवार को जारी की गई सूची पर सवाल खडा करते हुए आरोप लगाया है कि भाजपा भी कांग्रेस की तरह राजनीति में परिवारवाद को बढ़ावा दे रही है।
उन्होंने कहा है कि योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर टिकट बांटने में परिवारों को महत्व दिया गया है। माना जा रहा है कि अश्विनी चोपड़ा और केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह में पुराना विवाद है। राव अपनी बेटी को विधानसभा चुनाव का टिकट दिलाना चाहते हैं।चोपड़ा के इस विरोध को राव की राह में कांटे बिछाने के रूप में देखा जा रहा है।
मोदी, शाह को पत्र लिखकर जताई आपत्ति
लोकसभा सदस्य ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में पार्टी के पुराने और वफादार नेताओं को विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट वितरण के मामले में तवज्जो देने और उनके सम्मान की रक्षा करने की मांग की है।
पार्टी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में अश्विनी ने पार्टी में स्थानीय स्तर पर परिवारवाद को बढ़ावा न दिया जाए। जमीन से जुड़े पार्टी कार्यकर्ताओं/नेताओं को टिकट वितरण के मामले में महत्व दिया जाए, क्योंकि पार्टी के बुरे वक्त में वे साथ रहे हैं।
सांसद ने कहा कि उन्होंने टिकट को लेकर अपनी कोई लिस्ट पार्टी नेतृत्व को नहीं सौंपी है। पत्र में उन्होंने यह भी लिखा है कि चुनावों को लेकर भाजपा के सर्वे में जिन लोगों के नाम आए थे, टिकट के बंटवारे में उनको भी महत्व दिया जाना चाहिए।
रामबिलास शर्मा के घर के बाहर हंगामा
भाजपा की पहली सूची जारी होने के बाद बुधवार देर सायं महेंद्रगढ़ पहुंचे कुछ युवकों ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रामबिलास शर्मा के आवास पर नारेबाजी की। उनका आरोप था कि भाजपा ने टिकटों का गलत वितरण किया है।
जब इन युवकों ने रामबिलास शर्मा के फोटो सहित एक बैनर को जलाने का प्रयास किया तो शर्मा के समर्थकों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इससे दोनों पक्षों में झड़प हो गई। उधर, हंगामे की सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने युवकों को वहां से खदेड़ दिया।
करीब आधा घंटे तक हंगामे के बाद युवक इधर उधर बिखर गए। बुधवार शाम करीब पांच बजे आजाद चौक पर कुछ युवक पहुचें। उन्होंने हाथ में रामबिलास शर्मा के खिलाफ लिखा हुआ बैनर लिया हुआ था।
युवक चौक से प्रदर्शन करते हुए रामबिलास शर्मा के आवास तक पहुंचे। आवास के बाहर युवकों ने रामबिलास शर्मा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
रोहतक में पार्टी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे
भाजपा की पहली सूची जारी होते ही कार्यकर्ताओं ने विरोध शुरू कर दिया। बुधवार को हलका महम और गढ़ी-सांपला-किलोई उन कार्यकर्ताओं ने पार्टी के फैसले का विरोध किया जो अपनी टिकट पक्की मान रहे थे।
महम सीट के दावेदार बलराज कुंडू ने पार्टी के इस फैसले को नोट की राजनीति बताया। दूसरी तरफ पार्टी के मजदूर मोर्चा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमेश बल्हारा हुडा कांप्लेक्स स्थित पार्टी कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए।
उन्होंने पार्टी के इस फैसले को गलत बताया। दूसरी तरफ रामकरण हुड्डा भी गढ़ी-सांपला-किलोई हलके से अपना टिकट कटने पर पार्टी आलाकमान से नाराज बताए गए हैं। हालांकि अभी तक इनमें किसी भी कार्यकर्ता ने अपनी अगली रणनीति के पत्ते नहीं खोले हैं।
रेवाड़ी में जिला पार्षद गीता ने छोड़ी भाजपा
बावल विधानसभा से टिकट नहीं मिलने से नाराज जिला पार्षद एवं भाजपा की महिला प्रदेश सचिव और महेंद्रगढ़ - रेवाड़ी की जिला प्रभारी गीता ने राजनीतिक उपेक्षा का आरोप लगाते हुए भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से त्याग पत्र दे दिया है। उन्होंने घोषणा की कि राजनीतिक उपेक्षाओं के चलते दिग्गज नेता राव इंद्रजीत सिंह और भाजपा से रिश्ता समाप्त कर लिया है।
बरवाला में जोगी राम के समर्थक बगावत पर
प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य जोगी राम सिहाग को बरवाला हलके से टिकट न दिए जाने से नाराज बरवाला मंडल के 54 पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है। पदाधिकारियों ने 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि पार्टी ने फैसला नहीं बदला तो पदाधिकारी पार्टी को अलविदा कहेंगे।
कैलाशचंद बोले, मेरे समर्थक नहीं
इस बारे में नारनौल से टिकट के प्रबल दावेदार कैलाश चंद शर्मा ने कहा कि प्रदेशाध्यक्ष रामबिलास शर्मा के घर नारेबाजी करने वाले युवक उनके समर्थक नहीं थे। हां, हो सकता है कि भाजपा के नाराज कार्यकर्ता हों। उन्होंने कहा कि वे भाजपा के सच्चे सिपाही हैं और भाजपा ने जिसको टिकट दिया है, हम उनके साथ खड़े हैं।