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Hindi News ›   Chandigarh ›   BJP did not announce a single candidate for Lok Sabha elections in Punjab in the first list

लोकसभा चुनाव: पंजाब में तीन से 13 के फेर में फंसी भाजपा! नहीं घोषित किया कोई प्रत्याशी, कहीं ये वजह तो नहीं

Sun, 03 Mar 2024 06:21 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 03 Mar 2024 06:21 PM IST
सार

पंजाब में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तीन से 13 की फेर में फंस गई है। यही वजह है कि पहली सूची में पार्टी ने एक भी उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। पहले पार्टी सिर्फ तीन सीटों पर उम्मीदवार उतारती थी। मगर अबकी बार पूरी 13 सीटों पर दावा ठोकेगी। यही वजह है कि उम्मीदवार तय करने में पार्टी को अतिरिक्त मंथन करना पड़ रहा है।

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BJP did not announce a single candidate for Lok Sabha elections in Punjab in the first list
भाजपा। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव का शंखनाद कर दिया है। पार्टी 195 प्रत्याशियों की सूची जारी कर चुकी है। अभी पंजाब में किसी भी उम्मीदवार का एलान पार्टी ने नहीं किया है। बताया जा रहा है कि चुनाव समिति की बैठक में पंजाब के उम्मीदवारों के नामों पर मंथन जरूर हुआ लेकिन पार्टी अभी नाम फाइनल नहीं कर पाई है। 

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दरअसल, पंजाब की सभी 13 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवार के नाम को फाइनल करने में भाजपा को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसकी वजह यह है कि इससे पहले भाजपा लोकसभा चुनाव शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के साथ गठबंधन में लड़ती थी। गठबंधन के तहत भाजपा सिर्फ तीन सीटों पर चुनाव लड़ती थी। इन सीटों में गुरदासपुर, होशियारपुर और अमृतसर सीट शामिल हैं। बाकी 10 सीटों पर शिअद अपना प्रत्याशी उतारती थी।
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अब मौजूदा स्थिति में 13 सीटों पर उम्मीदवारों का चयन करना भाजपा के सामने मुसीबत से कम नहीं है। 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा केवल गुरदासपुर और होशियारपुर लोकसभा सीट ही जीत पाई थी। गुरदासपुर से सनी देओल और होशियारपुर से सोम प्रकाश चुनाव जीते थे जबकि अमृतसर की सीट भाजपा के हाथ नहीं लगी थी।

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किसान आंदोलन के कारण सिरे नहीं चढ़ पाया गठबंधन

पिछले कुछ समय से भाजपा का शिअद के साथ गठबंधन की चर्चा शुरू चुकी थी। मगर किसानों आंदोलन ने दस्तक दे दी। यही वजह है कि गठबंधन सिरे नहीं चढ़ सका। शिअद ने पिछली बार किसान आंदोलन के समर्थन में ही भाजपा से नाता तोड़ा था। अब अगर आंदोलन के समय शिअद दोबारा भाजपा से गठबंधन कर लेती तो पार्टी को अपनी किरकिरी का डर सता रहा है। यहां तक कि कांग्रेस से भाजपा में आने वाले पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी शिअद के साथ भाजपा के गठबंधन की वकालत की थी।

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