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राज्यसभा चुनावः भाजपा में दिग्गज हुए दरकिनार, रामचंद्र जांगड़ा और दुष्यंत कुमार गौतम को टिकट
Thu, 12 Mar 2020 12:51 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 12 Mar 2020 12:51 PM IST
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भारतीय जनता पार्टी ने आखिरकार हरियाणा में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाले चुनाव के मद्देनजर दो प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। हाईकमान ने राज्यसभा के लिए दो नामों रामचंद्र जांगड़ा और दुष्यंत कुमार गौतम के नाम पर मुहर लगाई है।
जांगड़ा मूलरूप से रोहतक निवासी है, तो गौतम दिल्ली की राजनीति व संगठन में सक्रिय हैं। गौतम भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है और भाजपा के राष्ट्रीय सदस्यता अभियान के सह संयोजक भी रहे हैं।
भाजपा की ओर से घोषित उम्मीदवारों के नामों के बाद हरियाणा के उन भाजपा दिग्गजों की उम्मीदों को झटका लगा है, जो राज्यसभा में जाने के लिए राज्य से लेकर केंद्रीय नेतृत्व तक जबरदस्त लॉबिंग में जुटे हुए थे।
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इन नेताओं में मुख्य रूप से पूर्व वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु, पूर्व कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ व पूर्व शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा शामिल है। ये तीनों पूर्व मंत्री इस बार विधानसभा चुनाव में शिकस्त खाने के बाद राज्यसभा में जाने के लिए जीतोड़ कोशिशों में जुटे हुए थे।
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जांगड़ा मूलरूप से रोहतक निवासी है, तो गौतम दिल्ली की राजनीति व संगठन में सक्रिय हैं। गौतम भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है और भाजपा के राष्ट्रीय सदस्यता अभियान के सह संयोजक भी रहे हैं।
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भाजपा की ओर से घोषित उम्मीदवारों के नामों के बाद हरियाणा के उन भाजपा दिग्गजों की उम्मीदों को झटका लगा है, जो राज्यसभा में जाने के लिए राज्य से लेकर केंद्रीय नेतृत्व तक जबरदस्त लॉबिंग में जुटे हुए थे।
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इन नेताओं में मुख्य रूप से पूर्व वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु, पूर्व कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ व पूर्व शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा शामिल है। ये तीनों पूर्व मंत्री इस बार विधानसभा चुनाव में शिकस्त खाने के बाद राज्यसभा में जाने के लिए जीतोड़ कोशिशों में जुटे हुए थे।
जातीय समीकरण साधकर तय किए गए नाम
भाजपा हाईकमान ने राज्यसभा सदस्य पद के उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करते हुए जातीय समीकरणों को साधने का भी काम किया है। भाजपा ने ऐसा कर जहां पिछड़े और अनुसूचित जाति वोट बैंक को प्रभावित करने की कोशिश की है, वहीं जांगड़ा की उम्मीदवारी से जाटलैंड में भी अच्छा प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि रामचंद्र जांगड़ा मूलरूप से रोहतक के महम जिले से हैं। वे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले गोहाना से विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। वे हरियाणा पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग कल्याण बोर्ड के चेयरमैन भी रहे हैं।
अब राज्यसभा का टिकट देकर भाजपा ने जांगड़ा को प्रदेश में पिछड़ी जाति के एक बड़े नेता के रूप में प्रोजेक्ट किया है। ऐसा कर भाजपा प्रदेश में पिछड़े वर्ग के साथ संतुलन बिठाना चाहती है। उल्लेखनीय है कि भले ही चुनावी रण में जांगड़ा को कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिली, मगर उनकी गिनती भाजपा के अनुभवी व सुलझे नेताओं में होती है। उनकी शुरुआत लोकदल (बहुगुणा) के साथ हुई थी। वह 1987 में सफीदों से उम्मीदवार बनाए गए लेकिन हार गए।
हरियाणा विकास पार्टी के टिकट पर वर्ष 1991 में महम और फिर करनाल से वर्ष 2004 में विधानसभा चुनाव में उतारे गए। उसके बाद वे भाजपा में शामिल हो गए थे। भाजपा ने वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में जांगड़ा को सोनीपत जिले की गोहाना सीट से उम्मीदवार बनाया था। भाजपा में उन्हें तीन बार प्रदेश उपाध्यक्ष और दो बार ओबीसी मोर्चे का उपाध्यक्ष बनाया गया। वह पिछड़ा वर्ग मोर्चा के अध्यक्ष भी रहे।
अब राज्यसभा का टिकट देकर भाजपा ने जांगड़ा को प्रदेश में पिछड़ी जाति के एक बड़े नेता के रूप में प्रोजेक्ट किया है। ऐसा कर भाजपा प्रदेश में पिछड़े वर्ग के साथ संतुलन बिठाना चाहती है। उल्लेखनीय है कि भले ही चुनावी रण में जांगड़ा को कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिली, मगर उनकी गिनती भाजपा के अनुभवी व सुलझे नेताओं में होती है। उनकी शुरुआत लोकदल (बहुगुणा) के साथ हुई थी। वह 1987 में सफीदों से उम्मीदवार बनाए गए लेकिन हार गए।
हरियाणा विकास पार्टी के टिकट पर वर्ष 1991 में महम और फिर करनाल से वर्ष 2004 में विधानसभा चुनाव में उतारे गए। उसके बाद वे भाजपा में शामिल हो गए थे। भाजपा ने वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में जांगड़ा को सोनीपत जिले की गोहाना सीट से उम्मीदवार बनाया था। भाजपा में उन्हें तीन बार प्रदेश उपाध्यक्ष और दो बार ओबीसी मोर्चे का उपाध्यक्ष बनाया गया। वह पिछड़ा वर्ग मोर्चा के अध्यक्ष भी रहे।
तीन बार अनुसूचित मोर्चा की कमान संभाल चुके हैं गौतम
मूल रूप से दिल्ली से ताल्लुक रखने वाले दुष्यंत कुमार गौतम तीन बार भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा की कमान संभाल चुके हैं। गौतम का जन्म 29 सिंतबर 1957 को दिल्ली के पदम सिंह गौतम के घर हुआ। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा पूरी कर दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसी दौरान वे छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए और एवीबीपी के सदस्य बन गए।
देश में जब आपातकाल की स्थिति थी, तब दुष्यंत ने राजनीति में प्रवेश किया। वे एवीबीपी के मंडल अध्यक्ष बने। इस दौरान उन्होंने दलित मुद्दों को बखूबी ढंग से उठाया। भाजपा ने उन्हें अनुसूचित मोर्चे का उपाध्यक्ष बनाया और फिर गौतम तीन बार भाजपा अनुसूचित मोर्चा के अध्यक्ष बने। 1997 में दुष्यंत पहली बार जिला पार्षद का चुनाव लड़ा था।
अटल बिहारी वाजपेयी को आदर्श मानने वाले गौतम ने चुनावी राजनीति की बजाए संगठन के कार्यों में खूब मेहनत की। भाजपा उन्हें अब हरियाणा से राज्यसभा में भेजेगी।
देश में जब आपातकाल की स्थिति थी, तब दुष्यंत ने राजनीति में प्रवेश किया। वे एवीबीपी के मंडल अध्यक्ष बने। इस दौरान उन्होंने दलित मुद्दों को बखूबी ढंग से उठाया। भाजपा ने उन्हें अनुसूचित मोर्चे का उपाध्यक्ष बनाया और फिर गौतम तीन बार भाजपा अनुसूचित मोर्चा के अध्यक्ष बने। 1997 में दुष्यंत पहली बार जिला पार्षद का चुनाव लड़ा था।
अटल बिहारी वाजपेयी को आदर्श मानने वाले गौतम ने चुनावी राजनीति की बजाए संगठन के कार्यों में खूब मेहनत की। भाजपा उन्हें अब हरियाणा से राज्यसभा में भेजेगी।