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Punjab: गुरदासपुर में भाजपा की चुनौती बढ़ी, स्वर्ण सलारिया की बगावत, कविता की दावेदारी बढ़ा सकती है परेशानी
Tue, 09 Apr 2024 03:22 PM IST
निवेदिता वर्मा
सूरज प्रकाश, संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट (पंजाब)
सूरज प्रकाश, संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 09 Apr 2024 03:22 PM IST
सार
भाजपा गुरदासपुर से हमेशा सेलिब्रिटी कार्ड खेलती रही है, लेकिन इस बार पठानकोट के हलका सुजानपुर के बीजेपी पूर्व विधायक स्थानीय नेता दिनेश बब्बू को टिकट दी गई है। ग्रामीण स्तर पर किसानों की ओर से भाजपा का विरोध किया जा रहा है और भाजपा प्रत्याशियों को गांवों में नहीं घुसने दिया जा रहा।
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Dinesh babbu, swarn salaria, kavita khanna
- फोटो : फाइल
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विस्तार
लोकसभा सीट गुरदासपुर भले ही भाजपा का गढ़ रहा है, लेकिन इस बार भाजपा के लिए यहां कई चुनौतियां हैं। भाजपा नेता स्वर्ण सलारिया ने सोमवार को घोषणा की है कि वह गुरदासपुर से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने से भी इन्कार कर दिया और कहा कि वह एक 'अच्छी पार्टी' के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ेंगे।
सलारिया ने कहा, यह 13 अप्रैल तक स्पष्ट हो जाएगा। यह एक अच्छी और जीतने वाली पार्टी होगी। सलारिया ने सांसद और अभिनेता विनोद खन्ना की मृत्यु के बाद भाजपा के टिकट पर गुरदासपुर से 2017 का उपचुनाव लड़ा था। वह कांग्रेस के सुनील जाखड़ से हार गए थे। जाखड़ अब भाजपा के पंजाब प्रमुख हैं।
सलारिया ने कहा मैं पिछले कई वर्षों से निर्वाचन क्षेत्र में काम कर रहा हूं। मेरे क्षेत्र के लोग कह रहे हैं कि वे मेरी जीत सुनिश्चित करेंगे। मैं गारंटी देता हूं कि मैं 2.50 लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीतूंगा। मैंने बीजेपी से टिकट की मांग नहीं की थी। उन्होंने जिसे भी टिकट दिया है, उसे शुभकामनाएं।
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भाजपा ने हमेशा खेला सेलिब्रिटी कार्ड
भाजपा यहां से हमेशा सेलिब्रिटी कार्ड खेलती रही है, लेकिन इस बार पठानकोट के हलका सुजानपुर के बीजेपी पूर्व विधायक स्थानीय नेता दिनेश बब्बू को टिकट दी गई है। ग्रामीण स्तर पर किसानों की ओर से भाजपा का विरोध किया जा रहा है और भाजपा प्रत्याशियों को गांवों में नहीं घुसने दिया जा रहा। उधर, बब्बू के लिए अपनों की बगावत भी परेशानी खड़ी कर सकती है। टिकट नहीं मिलने से पूर्व सांसद विनोद खन्ना की पत्नी कविता खन्ना भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहीं हैं। स्वर्ण सलारिया की आम आदमी पार्टी से नजदीकियां बढ़ गई हैं।अगर दोनों चुनाव लड़ते हैं तो भाजपा के वोट बैंक में सेंध लग सकती है।
शहरी क्षेत्रों में भाजपा मजबूत, ग्रामीण में संकट
शिअद से गठबंधन टूटना भी भाजपा के लिए परेशानी खड़ी करेगा, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में शिअद मजबूत है। ऐसे में शिअद भाजपा की नैया पार लगाने में अहम भूमिका में रहती थी, लेकिन इस बार दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव मैदान में उतर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा के खिलाफ किसानों का विरोध पार्टी को नुकसान पहुंचा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान संगठनों के साथ लाखों लोग जुड़े हुए हैं। ऐसे में किसानों की नराजगी भाजपा की जीत के बीच खतरा बनी हुई है। वहीं, भाजपा की बात करें तो पार्टी मात्र पठानकोट शहर में ही अधिक मजबूत दिखाई देती रही है, क्योंकि शहर में भाजपा का काडर अधिक है। वहीं, दीनानगर शहर में भी भाजपा का काडर है, लेकिन गुरदासपुर शहर में पिछले सात साल से कांग्रेस काफी मजबूत बन कर उभरी है। इसके अलावा बटाला शहर में आम आदमी पार्टी के विधायक हैं। ऐसे में वे हर हाल में अपने हलके खास कर शहरी क्षेत्र में अपने आप को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। वहीं, जिला गुरदासपुर में अधिकांश विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के विधायक हैं। ऐसे में कांग्रेस हर हाल में अपने प्रत्याशी के पक्ष में वोटरों को मोड़ने का प्रयास करेंगे।
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सलारिया ने कहा, यह 13 अप्रैल तक स्पष्ट हो जाएगा। यह एक अच्छी और जीतने वाली पार्टी होगी। सलारिया ने सांसद और अभिनेता विनोद खन्ना की मृत्यु के बाद भाजपा के टिकट पर गुरदासपुर से 2017 का उपचुनाव लड़ा था। वह कांग्रेस के सुनील जाखड़ से हार गए थे। जाखड़ अब भाजपा के पंजाब प्रमुख हैं।
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सलारिया ने कहा मैं पिछले कई वर्षों से निर्वाचन क्षेत्र में काम कर रहा हूं। मेरे क्षेत्र के लोग कह रहे हैं कि वे मेरी जीत सुनिश्चित करेंगे। मैं गारंटी देता हूं कि मैं 2.50 लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीतूंगा। मैंने बीजेपी से टिकट की मांग नहीं की थी। उन्होंने जिसे भी टिकट दिया है, उसे शुभकामनाएं।
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भाजपा ने हमेशा खेला सेलिब्रिटी कार्ड
भाजपा यहां से हमेशा सेलिब्रिटी कार्ड खेलती रही है, लेकिन इस बार पठानकोट के हलका सुजानपुर के बीजेपी पूर्व विधायक स्थानीय नेता दिनेश बब्बू को टिकट दी गई है। ग्रामीण स्तर पर किसानों की ओर से भाजपा का विरोध किया जा रहा है और भाजपा प्रत्याशियों को गांवों में नहीं घुसने दिया जा रहा। उधर, बब्बू के लिए अपनों की बगावत भी परेशानी खड़ी कर सकती है। टिकट नहीं मिलने से पूर्व सांसद विनोद खन्ना की पत्नी कविता खन्ना भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहीं हैं। स्वर्ण सलारिया की आम आदमी पार्टी से नजदीकियां बढ़ गई हैं।अगर दोनों चुनाव लड़ते हैं तो भाजपा के वोट बैंक में सेंध लग सकती है।
शहरी क्षेत्रों में भाजपा मजबूत, ग्रामीण में संकट
शिअद से गठबंधन टूटना भी भाजपा के लिए परेशानी खड़ी करेगा, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में शिअद मजबूत है। ऐसे में शिअद भाजपा की नैया पार लगाने में अहम भूमिका में रहती थी, लेकिन इस बार दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव मैदान में उतर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा के खिलाफ किसानों का विरोध पार्टी को नुकसान पहुंचा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान संगठनों के साथ लाखों लोग जुड़े हुए हैं। ऐसे में किसानों की नराजगी भाजपा की जीत के बीच खतरा बनी हुई है। वहीं, भाजपा की बात करें तो पार्टी मात्र पठानकोट शहर में ही अधिक मजबूत दिखाई देती रही है, क्योंकि शहर में भाजपा का काडर अधिक है। वहीं, दीनानगर शहर में भी भाजपा का काडर है, लेकिन गुरदासपुर शहर में पिछले सात साल से कांग्रेस काफी मजबूत बन कर उभरी है। इसके अलावा बटाला शहर में आम आदमी पार्टी के विधायक हैं। ऐसे में वे हर हाल में अपने हलके खास कर शहरी क्षेत्र में अपने आप को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। वहीं, जिला गुरदासपुर में अधिकांश विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के विधायक हैं। ऐसे में कांग्रेस हर हाल में अपने प्रत्याशी के पक्ष में वोटरों को मोड़ने का प्रयास करेंगे।